मगर चलना कभी रुक सकता नहीं … दूरियां अगर बढ़ भी जाये तो… एक बार किया प्यार भुलाया जाता नहीं… आपस में बात गर ना हो पाये तो भी … यादों का सिलसीला कभी रुकता नहीं … साहील पर बैठकर सागर का
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दोस्ती | ऑनलाइन बुलेटिन
©संजय वासनिक, वासु परिचय– चेंबुर, मुंबई. धीरे धीरे उम्र ढल जाती है… ये जिॅदगी यादों की, एक किताब बन…
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