हरियर लुगरा ओढ़े धरती दाई चारो मुड़ा धान लहलहावाथे फूल घलो फूलगे हे फुलवारी म चारो मुड़ा ममहावत हे इहि सरग हे नई मिलै कहीं इंहाके माटी ला चन्दन लगा के तो देख एक बार गाँव आके तो देख

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