होवत बिहान चिरई चिरगुन सबला रोज बिहनहा जगाथे कोयली घलो अपन राग म गुरु सुनाथे आमा लिम के छाँव म बइठके अपन थकान ला मिटाके तो देख एक बार गाँव आके तो देख

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