Ullas Navbharat Literacy Program- उल्लास नवभारत साक्षरता कार्यक्रम: जेल के बंदी भी बने साक्षर, अब करेंगे हस्ताक्षर!
Ullas Navbharat Literacy Program- ? ?✍️

? Ullas Navbharat Literacy Program- छत्तीसगढ़ के बिलासपुर जिले में उल्लास नवभारत साक्षरता कार्यक्रम के तहत 95% शिक्षार्थी परीक्षा में हुए शामिल!
? Ullas Navbharat Literacy Program- केंद्रीय जेल के बंदियों ने सीखा पढ़ना-लिखना, अब अंगूठे की जगह देंगे हस्ताक्षर!
? Ullas Navbharat Literacy Program- कलेक्टर अवनीश शरण की अनोखी पहल—छत्तीसगढ़ी बोली में “नेवता पाती” भेजकर बढ़ाया जागरूकता का स्तर!
? बिलासपुर में शिक्षा की नई रोशनी—नवसाक्षरों की परीक्षा संपन्न!

छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा चलाई जा रही “उल्लास नवभारत साक्षरता कार्यक्रम” के तहत 23 मार्च 2025 (रविवार) को बिलासपुर जिले में एक व्यापक मूल्यांकन परीक्षा का आयोजन किया गया। इस परीक्षा का मुख्य उद्देश्य असाक्षर नागरिकों को शिक्षा से जोड़ना और उन्हें आत्मनिर्भर बनाना था।
बिलासपुर जिले में चारों विकासखंडों में 550 परीक्षा केंद्र बनाए गए, जिनमें 23760 शिक्षार्थियों ने हिस्सा लिया। इनमें 14192 महिलाएं और 9568 पुरुष शामिल थे।
? ? परीक्षा के मुख्य आंकड़े:
✅ परीक्षा में शामिल कुल शिक्षार्थी: 23,760
✅ महिला शिक्षार्थी: 14,192
✅ पुरुष शिक्षार्थी: 9,568
✅ सबसे अधिक परीक्षा केंद्र: कोटा (321 केंद्र)
✅ बिल्हा विकासखंड: 70 परीक्षा केंद्र
✅ मस्तुरी विकासखंड: 61 परीक्षा केंद्र
✅ तखतपुर विकासखंड: 98 परीक्षा केंद्र

? बिलासपुर केंद्रीय जेल में ऐतिहासिक बदलाव – अब बंदी करेंगे हस्ताक्षर!
बिलासपुर केंद्रीय जेल में भी 142 असाक्षर बंदियों का नामांकन किया गया था। इस साक्षरता अभियान के अंतर्गत, वे बंदी जो पहले अंगूठा लगाकर दस्तावेजों पर हस्ताक्षर करते थे, अब वे अपना नाम लिखने में सक्षम हो चुके हैं।
? बंदी साक्षरता आंकड़े:
? पुरुष बंदी: 110
? महिला बंदी: 32
? परीक्षा में शामिल हुए कुल बंदी: 137
? “पहले अंगूठा लगाकर जेल में दाखिल हुए थे, अब हस्ताक्षर करते हुए बाहर निकलेंगे!”
यह पहल कलेक्टर अवनीश शरण के मार्गदर्शन में सफल हुई। जेल में शिक्षित बंदियों ने अन्य असाक्षर बंदियों को पढ़ाने का कार्य किया।
? कलेक्टर अवनीश शरण की अनोखी पहल—”छत्तीसगढ़ी नेवता पाती” से बदला माहौल!
? कलेक्टर एवं जिला साक्षरता मिशन प्राधिकरण के अध्यक्ष अवनीश शरण ने इस परीक्षा को सफल बनाने के लिए “छत्तीसगढ़ी नेवता पाती” भेजकर लोगों को जागरूक किया।
इस पहल के चलते गाँवों में एक सकारात्मक माहौल बना और लोगों में परीक्षा को लेकर उत्साह बढ़ा। ग्रामीण क्षेत्रों में यह तरीका बेहद प्रभावी साबित हुआ और हजारों असाक्षरों ने परीक्षा में भाग लिया।

? साक्षरता प्रमाणपत्र और आगे की राह!
? जो भी शिक्षार्थी इस आकलन परीक्षा में शामिल हुए हैं, उन्हें “राष्ट्रीय मुक्त विद्यालय शिक्षा संस्थान (NIOS)” दिल्ली द्वारा प्रमाणपत्र दिया जाएगा।
? इस प्रमाणपत्र का उपयोग करके वे 5वीं और 8वीं की समतुल्यता परीक्षा में बैठ सकते हैं।
? इससे उन्हें आगे सरकारी नौकरियों और अन्य अवसरों में फायदा मिलेगा।

? छत्तीसगढ़ में 100% साक्षरता लक्ष्य—2027 तक “उल्लास साक्षरता अभियान” जारी रहेगा!
? 2011 जनगणना के अनुसार, बिलासपुर जिले में साक्षरता दर 74.76% थी।
? 2030 तक पूरे देश को 100% साक्षर बनाने का लक्ष्य रखा गया है।
? पहले चरण में 2027 तक “उल्लास नवभारत साक्षरता कार्यक्रम” के तहत कार्य किया जाएगा।
? परीक्षा की मॉनिटरिंग और निरीक्षण
? परीक्षा के सुचारू संचालन के लिए विशेष निरीक्षण दल गठित किया गया था, जो सुबह 10 बजे से शाम 5 बजे तक परीक्षा केंद्रों का निरीक्षण करता रहा।
? भारत सरकार की राष्ट्रीय साक्षरता केंद्र प्रकोष्ठ से विशेष ऑब्जर्वर श्री शिवा श्रीवास्तव ने भी परीक्षा केंद्रों का निरीक्षण किया।

? निष्कर्ष – शिक्षा से बदलेगी तस्वीर!
? उल्लास नवभारत साक्षरता कार्यक्रम केवल एक परीक्षा नहीं है, बल्कि एक सामाजिक क्रांति है!
✅ यह अभियान न केवल गांवों के असाक्षरों को शिक्षित कर रहा है, बल्कि केंद्रीय जेल में बंदियों को भी एक नई पहचान दे रहा है।
✅ इससे गाँव-गाँव, घर-घर में शिक्षा का उजाला पहुंचेगा और छत्तीसगढ़ जल्द ही 100% साक्षरता दर हासिल करेगा।

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