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थी वो कोई अनामिका…

©गायकवाड विलास 

परिचय- मिलिंद महाविद्यालय, लातूर, महाराष्ट्र


 

थी वो कोई अनामिका,

बहती हवा का झोंका

जाने कहां चली गई ,

कोई ख्वाब बनके ।

 

प्यारी चंचल तितली,

फूलों के संग वो खिली

अंजानी राहों पे चली,

नए ख्वाब भरके ।

 

निर्मल बहती धारा ,

ढुंढती हुई किनारा

आशाएं लिए मन में,

जीती रही हंसके ।

 

थी वो कोई अनामिका,

सच्चे दिल की मलिका,

छोड़ गयी प्रीत रंग ,

खुश रंग हिना के ।

 

Gaikwad Vilas, Latur, Maharashtra
गायकवाड विलास

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