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चूहों के पेशाब से हो रहा घातक बुखार, यहां जानें क्या है बीमारी और उसके लक्षण choohon ke peshaab se ho raha ghaatak bukhaar, yahaan jaanen kya hai beemaaree aur usake lakshan

नई दिल्ली / गोरखपुर | [नेशनल बुलेटिन] | यूपी में इंसेफेलाइटिस (दिमागी बुखार) को काबू में कर लिया गया है। इसके बावजूद बुखार के मरीज मिल रहे हैं। बीते कुछ वर्षों से एक नए प्रकार के घातक बुखार का असर देखने को मिल रहा है। इसे लेकर गोरखनाथ विश्वविद्यालय और इससे संबद्ध चिकिसालय द्वारा आरएमआरसी (रीजनल मेडिकल रिसर्च सेंटर) के सहयोग से रिसर्च किया गया है।

 

रिसर्च के परिणाम चौंकाने वाले हैं। यह घातक बुखार वास्तव में लेप्टोस्पायरोसिस नामक बीमारी है। जिसके मुख्य वाहक चूहे हैं।

 

बुखार के नए स्वरूप पर गोरखनाथ विश्वविद्यालय द्वारा किए गए रिसर्च/केस स्टडी को लेकर शुक्रवार को विभिन्न संस्थाओं के विशेषज्ञों के मध्य मंथन हुआ। केस स्टडी का प्रेजेंटेशन देते हुए विश्वविद्यालय के कुलपति मेजर जनरल ने बताया कि अस्पताल में भर्ती मरीजों पर 5 प्रकार की बीमारियों स्क्रब टायफस, लेप्टोस्पायरोसिस, डेंगू, चिकनगुनिया व एंटरोवायरस पर जांच शुरू की गई। 20 जून से 6 अगस्त तक कुल 88 रक्त नमूनों की जांच के बाद गहन विश्लेषण किया गया। इनमें से 50 फीसद यानी 44 नमूने लेप्टोस्पायरोसिस पॉजिटिव पाए गए। जबकि 1 नमूने में स्क्रब टायफस, 9 में डेंगू आईजीएम, 3 में चिकनगुनिया व 3 में एंटरोवायरस पॉजिटिव होने का पता चला।

 

चौथे-पांचवें दिन हल्के पीलिया व निमोनिया के लक्षण

 

विश्लेषण में पाया गया कि लेप्टोस्पायरोसिस बीमारी 20 से 60 वर्ष के उम्र के लोगों में हो रही है। इससे बिना ठंड के उच्च तापमान का बुखार हो रहा है। मरीज के पूरे शरीर में दर्द रहता है। चौथे-पांचवे दिन कुछ मरीजों में हल्के पीलिया व कुछ में निमोनिया के लक्षण मिलने लगते हैं। ध्यान देने वाली बात यह भी है कि मोनोसेफ, मैरोपैनम व थर्ड-फोर्थ जनरेशन की एंटीबायोटिक दवाओं का उतना असर नहीं होता जितना सामान्य निमोनिया के मामलों में दिखता है।

 

चूहों के पेशाब से हो रही लेप्टोस्पायरोसिस बीमारी

 

विश्वविद्यालय के कुलपति ने बताया कि लेप्टोस्पायरोसिस अधिकतर चूहों के शरीर में रहता है और उसके पेशाब से यह वातावरण में आता है। त्वचा के जरिये यह मनुष्य के शरीर में पहुंच उसे बीमार कर सकता है। लेप्टोस्पायरोसिस के इलाज में टेट्रासाइक्लिन, क्लोरोमाईसेटिन, डॉकसीसाईक्लिन आदि एंटीबायोटिक दवाएं कारगर हैं। दवाओं की उपयोगिता समझने के साथ इस बीमारी पर नियंत्रण पाने के लिए चूहों पर नियंत्रण पाना बेहद अहम होगा।

 

शोध में सहयोग करेगा गोरखनाथ यूनिवर्सिटी

 

विश्वविद्यालय के कुलपति ने कहा कि फिलहाल यह रिसर्च सिर्फ गुरु गोरखनाथ चिकित्सालय में हो रहा है। यदि पूर्वी उत्तर प्रदेश के 4-5 अन्य संस्थानों में इजे तरह का शोध हो तो बीमारी का विश्लेषण और निकटवर्ती स्तर पर हो सकेगा। शोध में सहयोग के लिए यह चिकित्सालय और महायोगी गोरखनाथ विश्वविद्यालय तैयार है। उन्होंने यह भी बताया कि यह पता लगाने की भी कोशिश हो रही है कि आदमियों के पेशाब में लेप्टोस्पायरोसिस के कीटाणु उत्सर्जित होते हैं या नहीं।

 

इन विशेषज्ञों ने किया केस स्टडी के विश्लेषण पर मंथन

 

गोरखनाथ विश्वविद्यालय के कुलपति मेजर जनरल डॉ अतुल वाजपेयी के प्रेजेंटेशन (केस स्टडी और विश्लेषण) पर आयोजित कांफ्रेंस में एम्स गोरखपुर की कार्यकारी निदेशक डॉ सुरेखा किशोर, डॉ तेजस्वी, केजीएमयू लखनऊ के कुलपति जनरल विपिन पुरी, मेडिसिन विभाग के अध्यक्ष डॉ हिमांशु, गोरखपुर के सीएमओ डॉ आशुतोष कुमार दूबे, बीआरडी मेडिकल कॉलेज से डॉ राजकिशोर, आरएमआरसी से डॉ राजीव सिंह, डॉ एसपी बेहरा, गुरु गोरखनाथ चिकित्सालय के सह निदेशक डॉ कामेश्वर सिंह, डॉ राजीव श्रीवास्तव, डॉ आशीष गोयल, डॉ अवधेश अग्रवाल, डॉ शैलेश सिंह, डॉ आदित्य विक्रम सिंह, गुरु श्री गोरक्षनाथ इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज के प्रो गणेश पाटिल, गुरु गोरक्षनाथ कॉलेज ऑफ नर्सिंग की प्राचार्या डॉ डीएस अजीथा समेत बीएएमएस व बीएससी अंतिम वर्ष के चुनिंदा 75 विद्यार्थी शामिल हुए।

 

भयावह नहीं होने पाएगी बीमारी

 

कांफ्रेंस का संयोजन करते हुए विश्वविद्यालय के कुलसचिव डॉ प्रदीप कुमार राव ने कहा कि समय से शोध शुरू होने से लेप्टोस्पायरोसिस की बीमारी इंसेफेलाइटिस की तरह भयावह नहीं होने पाएगी। इंसेफेलाइटिस के भयावह होने का एक बड़ा कारण समयानुकूल शोध का अभाव रहा।

 

डॉ राव ने कहा कि पूर्वी उत्तर प्रदेश की बीमारियों पर शोध व निदान के लिए अपने कुलाधिपति, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के मार्गदर्शन में महायोगी गोरखनाथ विश्वविद्यालय ने एम्स, केजीएमयू, आरएमआरसी, बीआरडी मेडिकल कॉलेज जैसी महत्वपूर्ण संस्थाओं के साथ एमओयू किया है और उसके अनुरूप कार्य शुरू भी कर दिए हैं।

 

 

 

 

Fatal fever caused by urine of rats, know here what is the disease and its symptoms

 

New Delhi / Gorakhpur | [National Bulletin] |E6ncephalitis (brain fever) has been brought under control in UP. Despite this, fever patients are being found. In the last few years, the effect of a new type of deadly fever is being seen. Research has been done by Gorakhnath University and its affiliated hospitals in collaboration with RMRC (Regional Medical Research Center).

 

The research results are shocking. This deadly fever is actually a disease called leptospirosis. The main carriers of which are rats.

 

On Friday, there was a churning between experts of various institutions regarding the research / case study done by Gorakhnath University on the new form of fever. Giving a presentation of the case study, the Vice Chancellor of the University, Major General, said that investigations on five types of diseases, scrub typhus, leptospirosis, dengue, chikungunya and enterovirus were started on hospitalized patients. From June 20 to August 6, a total of 88 blood samples were tested and thoroughly analyzed. Of these, 50 percent i.e. 44 samples were found to be leptospirosis positive. Whereas scrub typhus was detected in 1 sample, Dengue IgM in 9, Chikungunya in 3 and Enterovirus positive in 3.

 

Symptoms of mild jaundice and pneumonia on the fourth-fifth day

 

The analysis found that leptospirosis disease is occurring in people between 20 and 60 years of age. This is causing a high temperature fever without chills. The patient has pain all over the body. On the fourth-fifth day, some patients start getting mild jaundice and some pneumonia symptoms. It is also worth noting that the antibiotics of Monocef, Maropenum and third-fourth generation do not have the same effect as seen in cases of common pneumonia.

 

 leptospirosis disease caused by urine of rats

 

The Vice Chancellor of the university said that leptospirosis mostly lives in the body of rats and it comes into the environment through their urine. If it reaches the human body through the skin, it can make him sick. Antibiotics such as tetracycline, chlormycetin, doxycycline, etc. are effective in the treatment of leptospirosis. Along with understanding the usefulness of drugs, it will be very important to control rats to control this disease.

 

 Gorakhnath University will cooperate in research

 

The Vice Chancellor of the university said that at present this research is being done only in Guru Gorakhnath Hospital. If this kind of research is done in 4-5 other institutes of Eastern Uttar Pradesh, then the analysis of the disease can be done at a more near level. This hospital and Mahayogi Gorakhnath University are ready to cooperate in research. He also told that efforts are also being made to find out whether the germs of leptospirosis are excreted in the urine of men.

 

These experts brainstormed on the analysis of case studies

 

In the conference organized on the presentation (case study and analysis) of Major General Dr. Atul Bajpai, Vice Chancellor, Gorakhnath University, Dr. Surekha Kishore, Executive Director of AIIMS, Gorakhpur, Dr. Tejashwi, Vice Chancellor of KGMU Lucknow, General Vipin Puri, Chairman of the Department of Medicine, Dr. Himanshu, Gorakhpur K. CMO Dr. Ashutosh Kumar Dubey, Dr. Rajkishore from BRD Medical College, Dr. Rajiv Singh from RMRC, Dr. SP Behera, Co-Director of Guru Gorakhnath Hospital, Dr. Kameshwar Singh, Dr. Rajiv Srivastava, Dr. Ashish Goyal, Dr. Awadhesh Agarwal, Dr. Shailesh Singh, Dr. Aditya Vikram Singh, Prof. Ganesh Patil of Guru Shree Gorakshanath Institute of Medical Sciences, Dr. DS Ajitha, Principal of Guru Gorakshanath College of Nursing, along with 75 selected students of BAMS and B.Sc final year attended.

 

 The disease will not be scary

 

Coordinating the conference, Dr. Pradeep Kumar Rao, Registrar of the University said that the disease of leptospirosis will not be as dangerous as encephalitis if research is started in time. One of the major reasons for the frightening of encephalitis was the lack of timely research.

 

Dr Rao said that under the guidance of its Chancellor, Chief Minister Yogi Adityanath, Mahayogi Gorakhnath University has signed MoUs with important institutions like AIIMS, KGMU, RMRC, BRD Medical College for research and diagnosis on diseases of Eastern Uttar Pradesh and work accordingly. have also started.

 

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