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ईसाई संस्थाओं ने अकाल तख्त के साथ मीटिंग कर नकली पादरियों और चमत्कारों का किया खंडन | ऑनलाइन बुलेटिन

अमृतसर | [पंजाब बुलेटिन] | पंजाब में सिख सिद्धांतों को लगातार चुनौती देने वाले नकली पादरी, झूठ और अंधविश्वास के भ्रम के माध्यम से धर्मांतरण, गुरबानी का अपमान, सिख सिद्धांतों के बारे में झूठा प्रचार और निर्दोष लोगों का शारीरिक, मानसिक और वित्तीय शोषण के मुद्दों पर एक गंभीर चर्चा बैठक में की गई।

 

इस बीच, जालंधर के बिशप एंजेलिनो राफिनो ग्रेसियस ने कहा कि नकली पादरियों का ईसाई धर्म से कोई लेना-देना नहीं है। उनके द्वारा फैलाए गए अंधविश्वास और पाखंड बाइबिल के अनुसार नहीं हैं। उन्होंने कहा कि हम सिख सिद्धांतों के अपमान और नकली पादरियों द्वारा किए गए चमत्कारों का खंडन करते हैं।

 

श्री अकाल तख्त साहिब के जत्थेदार ज्ञानी हरप्रीत सिंह और जत्थेदार तख्त श्री केस सहगढ़ रघबीर सिंह के नेतृत्व में सिख विचारकों की बैठक हुई। जिसमें क्रिश्चियन महासभा पंजाब, कैथोलिक चर्च ऑफ इंडिया, चर्च ऑफ नॉर्थ इंडिया और अन्य 7 चर्चों का संयुक्त प्रतिनिधिमंडल ने शिरकत की। बैठक में नकली पादरियों और चमत्कारों का खंडन किया गया। बैठक में ईसाई संस्थानों ने पल्ला झाड़ा और कहा कि नकली पादरियों का ईसाई धर्म से कोई लेना-देना नहीं है।

 

इस अवसर पर अमृतसर के बिशप डॉ. प्रदीप कुमार सामंतराय ने कहा कि फर्जी पादरियों की पहचान के लिए एक सर्कुलर जारी किया जाएगा, जिसमें ईसाई पादरी बनने की संख्या को सार्वजनिक किया जाएगा और फर्जी पादरियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। चंडीगढ़ के बिशप डेनियल पीपल्स डायोसिस ने कहा कि सरकार द्वारा फर्जी पादरियों की फंडिंग के स्रोतों की जांच की जानी चाहिए।

 

ईसाई प्रतिनिधिमंडल ने संयुक्त रूप से कहा कि नकली पादरी और पैगंबर वास्तव में ‘मसीह विरोधी’ हैं और उनके खिलाफ सख्त धार्मिक और कानूनी कार्रवाई की जानी चाहिए। यह सब सिखों के समन्वय से किया जाएगा।

 

ईसाई प्रतिनिधिमंडल और सिख विद्वानों की चर्चा के बाद श्री अकाल तख्त साहिब के जत्थेदार ज्ञानी हरप्रीत सिंह ने कहा कि ईसाई नेताओं को पंजाब में स्थिति को शांतिपूर्ण बनाए रखने के लिए ईसाई धर्म के नाम पर किए जा रहे भ्रामक प्रचार को रोकने के लिए कड़े फैसले लेने की जरूरत है।

 

और फर्जी पादरियों को उनसे अलग कर जल्द से जल्द उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई करने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि सिख समुदाय इस कार्रवाई के लिए आवश्यक सहयोग प्रदान करेगा। दोनों पक्ष इस बात पर सहमत हुए कि एक संयुक्त समन्वय समिति का गठन किया जाना चाहिए, जो समय-समय पर उत्पन्न होने वाली चुनौतियों का समाधान करेगी।

 

 

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