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अंधविश्वास की अविश्वसनीय घटना; 17 महीने तक IT अफसर के जिंदा होने की आस, घर में ही रखी थी लाश | ऑनलाइन बुलेटिन

लखनऊ | [उत्तर प्रदेश बुलेटिन] | कानपुर के 7/401 कृष्णापुरी रोशन नगर के एक कमरे में 17 महीने से शव के साथ परिवार के रहने की खबर ने पूरे शहर को चौंका दिया। इस घर में आयकर अफसर विमलेश अपने माता-पिता, भाई-भाभी, पत्नी-बच्चों के साथ रहते थे। विमलेश आयकर विभाग, अहमदाबाद में एएओ (एसिस्टेंट एकाउंटर आफिसर) थे।

 

कानपुर में 10 लोगों का एक परिवार पिछले 17 महीने से आयकर अफसर की लाश के साथ रहता पाया गया। सड़ी-गली हालत में मिले शव को कोमा में समझकर ऑक्सीजन दी जा रही थी। आयकर विभाग की सूचना पर पुलिस के साथ पहुंची मेडिकल टीम ने शव की जांच कर उसे मृत घोषित किया, तब भी परिवार उसे मृत मानने को तैयार नहीं था।

 

देर शाम शव अंतिम संस्कार करने की हिदायत के साथ परिजनों को दिया गया। अस्पताल से घर के रास्ते में परिजनों ने अस्पताल कर्मियों को एंबुलेंस से उतार दिया और शव लेकर गायब हो गए। कुछ देर में पुलिस ने उन्हें ढूंढ़ निकाला और अंतिम संस्कार कराया।

 

पिछले साल अप्रैल में वह कानपुर आए। बीमार होने पर 19 अप्रैल 2021 को उन्हें मोती अस्पताल में भर्ती कराया गया। 2 दिन बाद उसकी मौत हो गई। अस्पताल ने मृत्यु प्रमाण पत्र भी जारी कर दिया लेकिन परिवार ने उसका अंतिम संस्कार नहीं किया।

 

विमलेश के भाई दिनेश ने बताया कि हम अर्थी लेकर जाने वाले थे कि भाई के शरीर में धड़कन लौट आई। तो हम उन्हें घर ले आए। तब से उन्हें ऑक्सीजन दे रहे थे। रोज गंगाजल से शरीर पोंछते रहे। वह सुबह भी जीवित थे।

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ताज्जुब की बात- शव में कोई दुर्गंध नहीं

 

मोहल्ले के लोगों का कहना है कि यह परिवार अलग-थलग रहता है। हमें यही पता था कि विमलेश कोमा में है। हमें कभी शव की दुर्गंध भी महसूस नहीं हुई। मेडिकल टीम ने भी दुर्गंध न होने की तस्दीक की है। यह परिवार किसी को घर में नहीं आने देता है।

 

ऐसे खुला घर में शव रखने का भेद

 

17 माह से नौकरी पर न जाने के कारण विभाग ने जांच शुरू की। एक टीम घर भेजी गई तो परिजनों ने बाहर से ही उसे लौटा दिया। 30 अगस्त को जेडएओ, सीबीडीटी पीबी सिंह ने सीएमओ को पत्र लिख कर जांच को कहा। सीएमओ ने डीएम को पत्र लिखा। तब पुलिस के साथ मेडिकल टीम भेजी गई।

 

परिजन इस टीम से भी भिड़ गए। आधे घंटे तक समझाने के बाद टीम शव को मेडिकल कॉलेज ला सकी। साथ में पत्नी मिताली और बच्चों को छोड़ कर पूरा परिवार भी आ गया।

 

यहां भी वे विमलेश को जीवित बताते रहे। जांच में मृत घोषित करने के बाद परिजनों ने लिखकर दिया कि वह पोस्टमार्टम नहीं कराना चाहते। अंतत: पुलिस ने तम संस्कार करने की हिदायत के साथ शव परिजनों को सौंप दिया।

 

दो कर्मी साथ भेजे गए, जिन्हें उतार कर परिवार शव लेकर लापता हो गया। बमुश्किल पुलिस ने उन्हें तलाश कर भैरोघाट विद्युत शवदाह गृह में अंतिम संस्कार करा दिया।

 

सीएमओ डॉक्टर आलोक रंजन के अनुसार विमलेश कुमार की मौत काफी पहले हो चुकी थी। ताज्जुब की बात है कि शरीर से कोई दुर्गंध नहीं आई। मांस सूख कर हड्डियों से चिपक चुका था। त्वचा काफी खराब हालत में थी। संभवत: शरीर को किसी केमिकल से संरक्षित रखने की कोशिश की गई लेकिन परिजनों ने इससे इंकार किया है।

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पुलिस कमिश्नर बीपी जोगदंड के अनुसार मेडिकल जांच में तस्दीक हुई है कि मृत्यु काफी पहले हो चुकी थी। जांच के बाद शव परिजनों को सौंप दिया गया। उन्होंने अंतिम संस्कार कर दिया है।

 

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