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महिलाओं को नहीं मिलेगा सरकारी सेवाओं में आरक्षण का लाभ ? mahilaon ko nahin milega sarakaaree sevaon mein aarakshan ka laabh ?

देहरादून | [उतराखंड बुलेटिन] | महिलाओं को उत्तराखंड की सरकारी सेवाओं में मिले आरक्षण पर सवाल खड़े होने के बीच आम लोगों में तीखी प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है। लोग सवाल उठा रहे हैं कि जब हरियाणा जैसे राज्य निजी क्षेत्र में भी स्थानीय को आरक्षण दे रहा है तो उत्तराखंड में सरकारी सेवा में मिला आरक्षण गलत कैसे हो सकता है?

 

वामपंथी नेता इंद्रेश मैखुरी ने सोशल मीडिया पोस्ट में लिखा है कि सभी राज्य रोजगार में अपने नागरिकों को प्राथमिकता देने के लिए विशेष उपाय करते हैं, लेकिन उत्तराखंड में ऐसे कुछ उपायों को सरकार खुद ही ध्वस्त करती है। मैखुरी ने चेताते हुए कहा है कि यदि इस विषय पर प्रभावी पैरवी न हुई तो, नौकरियों में उत्तराखंडी महिलाओं को मिला आरक्षण भी निपट जाएगा।

 

युवा आशीष ने ट्वीटर पर लिखा है कि हरियाणा प्राइवेट सेक्टर में स्थानीय युवाओं के लिए 70% आरक्षण लागू कर रहा है। उत्तराखंड में सरकारी क्षेत्र में भी आरक्षण पर संकट खड़ा किया जा रहा है। एडवोकेट अल्का शर्मा के मुताबिक राज्य को राज्य स्तरीय सेवाओं की शर्तें तय करने का अधिकार है।

 

इसी आधार पर जरूरतमंद तबके को सरकारी नौकरियों में प्राथमिकता देते हैं। इधर, एक पहल सोसायटी की अध्यक्ष अरुणा रावत के मुताबिक नौकरियों में आरक्षण से उत्तराखंड में महिलाओं की स्थिति में बदलाव आया है। बतादें कि इससे पहले सरकारी सेवाओं में आंदोलनकारियों को मिला दस प्रतिशत क्षैतिज आरक्षण भी कानूनी पेच में उलझकर खारिज हो चुका है।

 

खून से सीएम को लिखा खत

 

सयुंक्त मंच द्वारा शहीद स्मारक में राज्य आंदोलनकारियों को राज्याधीन सेवाओं में देय 10% क्षैतिज आरक्षण की बहाली को लेकर चल रहा धरना 38वें दिन और क्रमिक अनशन 28वें दिन भी जारी रहा। क्रमिक अनशन में विमल जुयाल, पंकज सिंह रावत बैठे। राज्य आंदोलनकारियों ने रक्त से लिखा मांग पत्र मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को भेजा।

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इस दौरान क्रांति कुकरेती कोटद्वार, धर्मेन्द्र बिष्ट खटीमा, पंकज सिंह रावत उत्तरकाशी, लाखन सिंह चिलवाल हल्द्वानी, जगदीश रौतेला, हरीश पन्त, विकास रावत, पंकज रावत मौजूद रहे।

 

 

 

Women will not get the benefit of reservation in government services?

 

 

Dehradun [Uttarakhand Bulletin] | Amid questions being raised on the reservation given to women in the government services of Uttarakhand, there is a strong reaction among the common people. People are raising the question that when a state like Haryana is giving reservation to the locals even in the private sector, then how can the reservation in government service in Uttarakhand be wrong?

 

Left leader Indresh Maikhuri has written in a social media post that all states take special measures to give priority to their citizens in employment, but in Uttarakhand some such measures are demolished by the government itself. Maikhuri has warned that if there is no effective lobbying on this subject, then the reservation given to Uttarakhandi women in jobs will also be settled.

 

Youth Ashish has written on Twitter that Haryana is implementing 70% reservation for local youth in private sector. In Uttarakhand, a crisis is being created over reservation in the government sector as well. According to Advocate Alka Sharma, the state has the right to decide the conditions of state level services.

 

On this basis, priority is given to the needy sections in government jobs. Here, according to Aruna Rawat, president of Ek Pahal Society, the status of women in Uttarakhand has changed due to reservation in jobs. Let us inform that earlier 10 percent horizontal reservation given to the agitators in government services has also been rejected by getting entangled in legal trouble.

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 letter written to CM with blood

 

The sit-in by the Joint Forum for the restoration of 10% horizontal reservation payable to the state agitators in the Martyrs Memorial in the state services continued on the 38th day and the successive fast continued for the 28th day. Vimal Juyal, Pankaj Singh Rawat sat in a gradual fast. State agitators sent a demand letter written in blood to Chief Minister Pushkar Singh Dhami.

 

During this, Kranti Kukreti Kotdwar, Dharmendra Bisht Khatima, Pankaj Singh Rawat Uttarkashi, Lakhan Singh Chilwal Haldwani, Jagdish Rautela, Harish Pant, Vikas Rawat, Pankaj Rawat were present.

 

 

 

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