बाढ़ से जूझ रहे नेपाल पर नया संकट! कभी भी फट सकती है लेंडे नदी पर बनी झील, चीन ने किया अलर्ट

काठमांडू
नेपाल में एक और तबाही आने वाली है. नेपाल में जानलेवा बाढ़ से हाहाकार मचा हुआ है. पिछले चार दिनों में सैकड़ों लोगों की मौत हो चुकी. हजारों लोग लापता हैं. मलबों में जिंदगी दम तोड़ रही है. अपनों की तलाश हो रही. चार दिन बाद भी रेस्क्यू ऑपरेशन जारी है. इस बीच नेपाल में एक बार फिर बाढ़ का खतरा मंडरा रहा है. खुद चीन ने नेपाल को एक और बाढ़ की तबाही झेलने को रेडी रहने को चेताया है. चीन ने बकायदा नेपाल को एक सीक्रेट संदेश भेजा है. ड्रैगन का कहना है कि नेपाल के ऊपर चीनी क्षेत्र में ल्हेंदे नदी पर एक और बर्फ की झील कभी भी फटने को बेताब है. अगर ग्लेशियर लेक टूटा तो भयंकर तबाही मच सकती है।
इंडिया टुडे की रिपोर्ट के मुताबिक, चीन ने चेतावनी दी है कि नेपाल और तिब्बत की सीमा के पास ऊपर की ओर ल्हेंदे नदी पर बनी एक अस्थायी झील किसी भी समय टूट सकती है. अगर ऐसा हुआ तो झील का पानी तेजी से नीचे की ओर बह सकता है और नदियों का जलस्तर बढ़ सकता है. चीन के अधिकारियों ने नेपाल के विदेश मंत्रालय को यह चेतावनी तब दी जब झील में कुछ बदलाव देखे गए. मसलन पानी का रंग लगातार गहरा होना. चीन के मुताबिक, यह संकेत हो सकता है कि झील का प्राकृतिक बांध कमजोर हो रहा है और वह टूट सकती है।
चीन ने अपने संदेश में क्या कहा
चीन ने अपने चेतावनी संदेश में यह भी बताया है कि झील में उसने पानी के संभावित बहाव को लेकर मॉडलिंग यानी जांच की है. इसके मुताबिक, अगर झील पर बने प्राकृतिक अवरोध का कुछ हिस्सा टूटता है तो नदी प्रणाली में अधिकतम करीब 500 घन मीटर प्रति सेकंड की रफ्तार से पानी पहुंच सकता है. यानी झील का बैरियर टूटने पर नदी में अधिकतम बहाव लगभग 500 क्यूबिक मीटर प्रति सेकंड हो सकता है. इसका मतलब है कि नेपाल को एक औ बाढ़ का सामना करना पड़ेगा।
नई चेतावनी क्यों दी गई है?
चीन के अधिकारियों ने झील के बदलते रूप को खतरे का संकेत माना है. नेपाल को भेजे गए संदेश में कहा गया, ‘परसों बनी झील का रंग लगातार गहरा होता जा रहा है. इसका मतलब है कि यह फट सकती है.’ चीन ने कहा कि अभी झील में जमा पानी की मात्रा बहुत अधिक नहीं है. उसने यह भी कहा कि अगर रुकावट टूटती है, तो नदी के निचले हिस्से में बहाव थोड़ा बढ़ सकता है, लेकिन बहुत अधिक बढ़ोतरी की संभावना कम है. हालांकि, निचले इलाकों में रहने वाले लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी गई है।
कहां फटने को बेताब है यह झील
यह अस्थायी झील ल्हेंदे नदी प्रणाली के ऊपरी हिस्से में बनी है. यह झील ग्लेशियर के टूटने से बने मलबे की प्राकृतिक रुकावट के कारण बनी है. कहा जा रहा है कि इसी ग्लेशियर के टूटने से इस हफ्ते की शुरुआत में नेपाल और तिब्बत में अचानक बाढ़ आई थी. इसी मलबे ने नदी के रास्ते में एक प्राकृतिक दीवार या बांध बना दिया. इसके पीछे पानी जमा होने लगा और धीरे-धीरे एक अस्थायी झील बन गई. इससे ही तबाही मची है. यह झील चीनी तरफ चोचेन नदी और नेपाली तरफ पुरेपु नदी के संगम के पास स्थित है।
चीन के जल संसाधन मंत्रालय के अनुसार, इस झील का जलस्तर धीरे-धीरे बढ़ रहा है. शुक्रवार तक लगभग 25 लाख (2.5 मिलियन) क्यूबिक मीटर पानी जमा हो गया था. चीन के अधिकारियों ने पहले अनुमान लगाया था कि अगले तीन दिनों में झील में और 30 लाख (3 मिलियन) क्यूबिक मीटर पानी जमा हो सकता है ।
दो नदियों के संगम के पास बनी है झील
यह झील चीन की तरफ चोचेन नदी और नेपाल की तरफ पुरेपु नदी के संगम के पास बनी है. चीन के जल संसाधन मंत्रालय के मुताबिक, झील में पानी का स्तर लगातार बढ़ रहा है. शुक्रवार तक इसमें करीब 25 लाख घन मीटर पानी जमा हो चुका था. खतरे को देखते हुए चीन ने निचले इलाकों में रहने वाले लोगों को सतर्क रहने को कहा है, साथ ही ड्रोन और सैटेलाइट के जरिए पूरे इलाके पर नजर रखी जा रही है।
झील फटी तो कितना बढ़ेगा पानी?
रिपोर्ट्स के मुताबिक, चीन ने यह जानने के लिए बाढ़ का मॉडल भी तैयार किया है कि झील टूटने पर कितना असर पड़ सकता है. आकलन के मुताबिक, ऐसी स्थिति में नदी तंत्र में पानी का अधिकतम बहाव 500 घन मीटर प्रति सेकंड तक पहुंच सकता है. ऐसे में चीन का कहना है कि अगर प्राकृतिक बांध का कुछ हिस्सा टूट भी जाता है, तब भी पानी नदी के किनारों के भीतर ही रहेगा. यानी अचानक पानी बढ़ सकता है, लेकिन बड़े पैमाने पर नदी के बाहर फैलने की संभावना कम बताई गई है।
चीन के मुताबिक, शुक्रवार को झील का पानी लेंडे खोला और त्रिशूली नदियों में बहना शुरू हो गया था. दोपहर तक वहां पैदा हुआ खतरा संभालने लायक माना गया. फिर भी नेपाल में चिंता बनी हुई है. बुधवार को आई फ्लैश फ्लड में अब तक 626 लोगों की मौत हो चुकी है. तिब्बत में भी सात लोगों की मौत की पुष्टि हुई है।
नेपाल अभी हालिया बाढ़ की भयानक तबाही और जख्मों से जूझ ही रहा है. ऐसे में लेंडे नदी के ऊपरी हिस्से में बनी यह झील प्रशासन के लिए नई सिरदर्दी बन गई है, क्योंकि इसका बांध टूटा तो निचले इलाकों में एक बार फिर तबाही मच सकती है।
अगर प्राकृतिक रुकावट टूट जाए तो क्या होगा?
चीन ने बाढ़ की मॉडलिंग करके यह पता लगाने की कोशिश की है कि अगर अस्थायी रुकावट का कुछ हिस्सा टूटता है तो कितना पानी निचले इलाकों में जा सकता है. चीनी संदेश में कहा गया, ‘अगर बांध का कुछ हिस्सा टूटता है, तो पानी का अधिकतम बहाव 500 क्यूबिक मीटर प्रति सेकंड हो सकता है. यह नदी के किनारों के भीतर ही रहेगा.’ बहरहाल, अधिकारी ड्रोन और सैटेलाइट का इस्तेमाल करके भी इस इलाके पर नजर रख रहे हैं।
झील से पानी पहले ही बहने लगा है
शुक्रवार को झील का पानी लेन्डे खोला और त्रिशूली नदियों में बहने लगा. चीन के सरकारी ब्रॉडकास्टर CCTV के अनुसार, दोपहर तक इस बहाव से होने वाले तुरंत खतरे को काबू में माना जा रहा था. हालांकि, इस आकलन के बावजूद, झील के टूटने की आशंका को लेकर चिंता बनी हुई है, क्योंकि नेपाल अभी भी बुधवार को आई अचानक बाढ़ के असर से उबरने की कोशिश कर रहा है. बता दें कि नेपाल में अब तक 600 लोग मर चुके हैं और सैकड़ों अब भी लापता हैं।










