Ambedkar Controversy 2025-? “आंबेडकर का फोटो फाड़ने पर बवाल: प्रिंसिपल बोले- ‘हां, मैंने फड़वाया’, स्कूल में घुसे 100 ग्रामीण!”
Ambedkar Controversy 2025-?

हमीरपुर में बाबा साहेब आंबेडकर की फोटो फाड़ी गई स्कूल में जातीय भेदभाव का आरोप
? क्या भारत में शिक्षा मंदिर भी अब जातिवाद से अछूते नहीं रहे?
Ambedkar Controversy 2025-? उत्तर प्रदेश के हमीरपुर जिले में स्थित एक सरकारी उच्च प्राथमिक विद्यालय से आई एक खबर ने पूरे देश को झकझोर दिया है। मामला संविधान निर्माता बाबा साहेब डॉ. भीमराव आंबेडकर जी की तस्वीर को फाड़ने का है — और सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि इस पर स्कूल के प्रधानाध्यापक ज्ञानेंद्र सिंह ने खुद कहा, “हां, हमने फड़वाया है, नोट कर लो।” यह बयान कैमरे में कैद हो चुका है और सोशल मीडिया पर वायरल हो गया है। हालांकि बता दें कि वायरल वीडियो के पुष्टि का दावा ऑनलाइन बुलेटिन नहीं करता है।
? विवाद की शुरुआत: क्या हुआ था स्कूल में?
Ambedkar Controversy 2025-? यह घटना सुमेरपुर ब्लॉक की ग्राम पंचायत सिमनौड़ी के उच्च प्राथमिक विद्यालय में सामने आई। शनिवार को छुट्टी के बाद कुछ दलित छात्रों ने आरोप लगाया कि स्कूल के प्रधानाध्यापक ज्ञानेंद्र सिंह ने सवर्ण छात्रों से संविधान निर्माता डॉक्टर आंबेडकर जी की तस्वीर फड़वाकर फिंकवा दी। जब अभिभावकों को यह जानकारी मिली, तो उन्होंने सोमवार को स्कूल पहुंचकर इसका विरोध किया।
? वायरल वीडियो और गुस्से से निकला कबूलनामा
livehindustan की खबर के मुताबिक, जब स्कूल पहुंचे अभिभावकों और ग्रामीणों ने सवाल पूछे, तो पहले तो प्रधानाध्यापक ने इसे छात्रों की आपसी लड़ाई का नतीजा बताया। लेकिन जैसे-जैसे भीड़ का दबाव बढ़ा, उन्होंने गुस्से में कह दिया – “हां, हमने सभी बच्चों से भीमराव आंबेडकर का फोटो फड़वाया है, नोट कर लो।” यह बयान एक ग्रामीण ने मोबाइल में रिकॉर्ड कर लिया और अब यह सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है।
? शिक्षा मंदिर या जातिवाद का अड्डा?
ग्रामीणों – जिनमें रमेशचंद्र, मोहनलाल, रामबहादुर, विकास, पवन, और अजय कुमार जैसे लोग शामिल हैं – ने डीएम और बीएसए से शिकायत की है कि प्रधानाध्यापक वर्षों से यहां जमे हैं और छात्रों के साथ भेदभाव करते हैं। उनका आरोप है कि छात्रों के मन में ऊंच-नीच, छुआछूत और जातीय नफरत की भावना भरने का काम यह शिक्षक कर रहा है।
? प्रिंसिपल की सफाई: गुस्से में निकल गया मुंह से
हालांकि बाद में प्रधानाध्यापक ज्ञानेंद्र सिंह ने सफाई दी कि सोमवार को सौ से ज्यादा ग्रामीण स्कूल में घुस आए थे और जबरन आरोप लगा रहे थे। उन्होंने कहा, “मैंने गुस्से में बोल दिया कि मैंने फोटो फड़वाई, लेकिन सच्चाई यह है कि छात्रों ने आपस में झगड़े में फोटो फाड़ दी थी।” पर सवाल यह है कि एक शिक्षक से ऐसी भाषा और रवैया अपेक्षित है?
?⚖️ जांच के आदेश: सच्चाई सामने आएगी या दबा दी जाएगी?
बीएसए आलोक सिंह ने बताया कि इस घटना की जांच ब्लॉक एजुकेशन ऑफिसर (BEO) मौदहा और सुमेरपुर को सौंपी गई है। दो दिन में रिपोर्ट मांगी गई है। अब देखना यह होगा कि प्रशासन इस मामले में निष्पक्ष कार्रवाई करता है या यह मामला भी फाइलों में दबा दिया जाएगा।
? जातिवाद बनाम संविधान: क्या आज भी समाज में आंबेडकर के विचारों की हत्या हो रही है?
डॉ. आंबेडकर ने संविधान बनाकर भारत को सामाजिक न्याय और समानता का रास्ता दिखाया। लेकिन जब उनके फोटो को स्कूल में फाड़ा जाता है, और वह भी एक शिक्षक द्वारा, तो यह सवाल खड़ा होता है कि क्या समाज आज भी संविधान के मूल्यों से दूर जा रहा है?
? सोशल मीडिया पर भड़का आक्रोश
जैसे ही वीडियो वायरल हुआ, सोशल मीडिया पर #JusticeForAmbedkar, #AmbedkarInsult और #CasteDiscriminationInSchool जैसे हैशटैग ट्रेंड करने लगे। लोग इस बात पर हैरानी जता रहे हैं कि कैसे एक शिक्षक जातिवादी मानसिकता से ग्रसित हो सकता है।
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? निष्कर्ष: क्या होगा अगला कदम?
Ambedkar Controversy 2025-? इस घटना ने एक बार फिर देश के शिक्षा संस्थानों में व्याप्त जातिवाद की मानसिकता को उजागर कर दिया है। जांच चल रही है, लेकिन इस बार समाज को भी सजग रहना होगा, ताकि इस तरह की घटनाएं भविष्य में न हों।
क्योंकि जब एक शिक्षक ही संविधान निर्माता के सम्मान को ठेस पहुंचाता है, तो यह सिर्फ एक व्यक्ति का नहीं, बल्कि पूरे देश की आत्मा का अपमान है।

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