Cg Job- कोरोना काल के 98-99% वाले नंबर अब सरकारी नौकरी में बन रहे बाधा – जानें छात्रों की बड़ी समस्या

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Cg Job- कोरोना महामारी के दौरान स्कूलों और बोर्ड्स द्वारा छात्रों को दिए गए हाई परसेंटेज आज सरकारी नौकरी की राह में सबसे बड़ी चुनौती बनते जा रहे हैं। ऑनलाइन परीक्षाओं और लचीले मूल्यांकन ने उस समय छात्रों को 98-99% अंक तो दिला दिए, लेकिन अब वही अंक उनकी वास्तविक क्षमता को मापने में नाकाफी साबित हो रहे हैं। हाल ही में छत्तीसगढ़ में कलेक्टोरेट भर्ती के दौरान यह मुद्दा उजागर हुआ, जब उच्च प्रतिशत वाले छात्र एक साधारण परीक्षा में शून्य अंक लाते नजर आए।

कोरोना काल में नंबर तो मिले, लेकिन ज्ञान अधूरा रह गया

Cg Job- 2019-2022 के बीच कोरोना के दौरान छात्रों ने ऑनलाइन या घर से ही बोर्ड परीक्षाएं दीं। स्कूलों ने लचीली मूल्यांकन प्रणाली अपनाते हुए छात्रों को अधिक अंक दिए। नतीजतन, छात्रों के 90-98% तक अंक आ गए। लेकिन अब जब ऑफलाइन परीक्षाएं हो रही हैं, तो इन्हीं छात्रों की वास्तविक योग्यता पर सवाल उठने लगे हैं।

सरकारी भर्ती में छात्रों का प्रदर्शन

Cg Job- छत्तीसगढ़ में कलेक्टोरेट के 132 पदों पर भर्ती के लिए प्रक्रिया चल रही है। इनमें सहायक ग्रेड-3, शीघ्रलेखक, वाहन चालक, चौकीदार, अर्दली जैसे पद शामिल हैं। भर्ती प्रक्रिया में 12वीं के अंकों का 70% और हिंदी टाइपिंग स्किल (5,000 शब्द प्रति घंटा) का 30% वेटेज दिया गया है।

हालांकि, 12वीं में 98% से अधिक अंक लाने वाले कई छात्रों ने कौशल परीक्षा में खराब प्रदर्शन किया, और कुछ तो लिखित परीक्षा में शून्य अंक तक लाए।

अभ्यर्थियों की आपत्ति और मांग

Cg Job- भर्ती प्रक्रिया के खिलाफ अभ्यर्थियों ने आपत्ति जताते हुए कहा है कि कौशल परीक्षा से पहले लिखित परीक्षा आयोजित की जानी चाहिए।

  • उनका तर्क: केवल मेरिट के आधार पर 15% उम्मीदवारों को कौशल परीक्षा के लिए बुलाना, योग्य अभ्यर्थियों को बाहर कर सकता है।
  • उनका अनुभव: कोरोना काल में मिले उच्च अंकों के बावजूद, ऑफलाइन परीक्षाओं में छात्रों के प्रदर्शन ने वास्तविकता को उजागर कर दिया है।

मेरिट बनाम वास्तविक योग्यता

यह स्थिति सवाल खड़े करती है:

  • क्या सिर्फ अंकों के आधार पर योग्यता को मापा जा सकता है?
  • क्या ऑनलाइन परीक्षाओं की पारदर्शिता और प्रभावशीलता पर पुनर्विचार करने की जरूरत है?

भर्ती प्रक्रिया में बदलाव की जरूरत

Cg Job- अभ्यर्थियों ने मांग की है कि कौशल परीक्षा से पहले लिखित परीक्षा आयोजित की जाए। यह प्रक्रिया अधिक पारदर्शी और निष्पक्ष साबित होगी, क्योंकि यह वास्तविक ज्ञान और कौशल को प्राथमिकता देगी।

क्या सीखा जा सकता है?

  1. ऑनलाइन शिक्षा और मूल्यांकन प्रणाली में सुधार:
    ऑनलाइन शिक्षा के दौरान दिए गए अंकों की तुलना में छात्रों की वास्तविक योग्यता पर ध्यान देने की आवश्यकता है।
  2. भर्ती प्रक्रिया में सुधार:
    लिखित और कौशल परीक्षाओं का संतुलन, मेरिट और योग्यता के सही मूल्यांकन के लिए जरूरी है।
  3. छात्रों के विकास पर ध्यान:
    छात्रों को नंबर के बजाय स्किल और प्रैक्टिकल नॉलेज पर फोकस करना चाहिए।

निष्कर्ष

Cg Job- कोरोना काल में छात्रों को दिए गए उच्च अंक अब उनके लिए चुनौती बनते जा रहे हैं। छत्तीसगढ़ की कलेक्टोरेट भर्ती ने इस समस्या को उजागर किया है, जो शिक्षा प्रणाली और भर्ती प्रक्रिया में सुधार की जरूरत को रेखांकित करता है।

क्या आप भी इस मुद्दे से सहमत हैं? अपनी राय नीचे कमेंट में जरूर साझा करें!

 


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