Chhattisgarh Backlog Recruitment 2026: छत्तीसगढ़ में 2003 से अटके बैकलॉग पदों पर बड़ा फैसला! अजाक्स ने उठाई पदोन्नति में आरक्षण की मांग, हजारों कर्मचारियों को मिल सकता है सीधा लाभ
बैकलॉग पदों की नए सिरे से पारदर्शी गणना की मांग, 2019 से बाधित पदोन्नति में आरक्षण पर तत्काल आदेश जारी करने का आग्रह

Chhattisgarh Backlog Recruitment 2026 :

Chhattisgarh Backlog Recruitment 2026 : Chhattisgarh Backlog Recruitment 2026 2003 से लंबित बैकलॉग पदों पर विशेष भर्ती अभियान और पदोन्नति में आरक्षण
Chhattisgarh Backlog Recruitment 2026: छत्तीसगढ़ में बैकलॉग पदों पर बड़ा अपडेट, अजाक्स ने 2003 से लंबित पदोन्नति के लिए उठाई आवाज
Chhattisgarh Backlog Recruitment 2026 : नवा रायपुर। छत्तीसगढ़ में लंबे समय से लंबित बैकलॉग पदों को लेकर एक बार फिर बड़ा मुद्दा सामने आया है। राज्य सरकार द्वारा अनुसूचित जाति (SC), अनुसूचित जनजाति (ST) और अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) के आरक्षित बैकलॉग पदों को भरने के लिए विशेष भर्ती अभियान को प्राथमिकता दिए जाने के बाद अब छत्तीसगढ़ अनुसूचित जाति/जनजाति अधिकारी एवं कर्मचारी संघ (अजाक्स) ने सरकार के सामने कई महत्वपूर्ण मांगें रखी हैं।
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अजाक्स ने मुख्यमंत्री और मुख्य सचिव को पत्र लिखकर वर्ष 2003 से अब तक लंबित बैकलॉग पदों की नए सिरे से विस्तृत और पारदर्शी गणना कराने की मांग की है। इसके साथ ही संघ ने वर्ष 2019 से बाधित चल रही पदोन्नति में आरक्षण की प्रक्रिया को लेकर भी तत्काल शासनादेश जारी करने का आग्रह किया है।
अजाक्स का कहना है कि बैकलॉग पदों की वास्तविक संख्या स्पष्ट नहीं होने के कारण हजारों पात्र अभ्यर्थियों और कर्मचारियों को अपने संवैधानिक अधिकारों से वंचित होना पड़ रहा है। ऐसे में अब सरकार द्वारा शुरू किए गए विशेष भर्ती अभियान को पारदर्शी तरीके से लागू करना बेहद जरूरी है।
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छत्तीसगढ़ में बैकलॉग पदों को भरने के लिए विशेष भर्ती अभियान
छत्तीसगढ़ सरकार ने राज्य के सभी विभागों, विभागाध्यक्षों और जिला कलेक्टरों को बैकलॉग पदों को भरने के संबंध में आवश्यक निर्देश जारी किए हैं। सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा जारी आदेश के अनुसार, सीधी भर्ती के अंतर्गत अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और अन्य पिछड़ा वर्ग के आरक्षित बैकलॉग पदों को भरने के लिए विशेष अभियान चलाया जाएगा।
इस अभियान की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यह प्रक्रिया केवल कुछ समय के लिए सीमित नहीं रहेगी। आदेश के अनुसार, जब तक संबंधित विभागों में सभी बैकलॉग रिक्त पदों को भर नहीं लिया जाता, तब तक विशेष भर्ती अभियान जारी रहेगा।
इस फैसले को आरक्षित वर्गों के बेरोजगार युवाओं के लिए एक महत्वपूर्ण अवसर माना जा रहा है। यदि विभागों द्वारा वास्तविक रिक्तियों की सही पहचान कर भर्ती प्रक्रिया शुरू की जाती है, तो लंबे समय से लंबित हजारों पदों पर नियुक्ति का रास्ता साफ हो सकता है।
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अधिकारियों की होगी जवाबदेही, लापरवाही पर कार्रवाई
सरकार ने बैकलॉग भर्ती प्रक्रिया में अधिकारियों की जवाबदेही भी तय की है। निर्देशों के अनुसार, यदि किसी विभाग में बैकलॉग पदों को भरने में अनावश्यक देरी या शिथिलता बरती जाती है, तो इसके लिए संबंधित विभाग प्रमुख और नियुक्ति देने वाले सक्षम अधिकारी सीधे तौर पर जिम्मेदार होंगे।
इतना ही नहीं, लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों के विरुद्ध प्रशासनिक स्तर पर कार्रवाई का प्रावधान भी किया गया है। अधिकारियों की गोपनीय चरित्रावली में भी इस प्रकार की लापरवाही का उल्लेख किए जाने की बात कही गई है।
सरकार के इस सख्त रुख से यह संकेत मिल रहा है कि बैकलॉग भर्ती को अब केवल कागजी प्रक्रिया तक सीमित नहीं रखा जाएगा, बल्कि विभागों को वास्तविक रूप से रिक्त पदों की पहचान कर भर्ती प्रक्रिया आगे बढ़ानी होगी।
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अजाक्स ने उठाई 2003 से लंबित बैकलॉग पदों की पारदर्शी गणना की मांग
सरकार के विशेष भर्ती अभियान का स्वागत करते हुए अजाक्स ने कहा है कि बैकलॉग पदों की वास्तविक स्थिति को लेकर अब तक कई विभागों में स्पष्टता का अभाव है। संगठन का कहना है कि राज्य गठन के बाद विशेष रूप से वर्ष 2003 से लेकर वर्तमान समय तक विभिन्न विभागों और संवर्गों में बैकलॉग पदों की स्थिति की विस्तृत समीक्षा आवश्यक है।
अजाक्स के प्रांतीय अध्यक्ष डॉ. लक्ष्मण कुमार भारती और संगठन सचिव जितेंद्र पाटले ने मुख्यमंत्री एवं मुख्य सचिव को पत्र लिखकर मांग की है कि वर्ष 2003 से अब तक सभी विभागों और संवर्गों में बैकलॉग पदों की नए सिरे से गणना कराई जाए।
संघ का तर्क है कि जब तक वास्तविक रिक्तियों की संख्या स्पष्ट नहीं होगी, तब तक विशेष भर्ती अभियान का पूरा लाभ पात्र अभ्यर्थियों तक नहीं पहुंच सकेगा।
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नए सिरे से हो बैकलॉग पदों की विस्तृत गणना
अजाक्स ने सरकार से मांग की है कि बैकलॉग पदों की गणना केवल विभागीय रिकॉर्ड के आधार पर औपचारिक रूप से न की जाए, बल्कि प्रत्येक विभाग, संवर्ग और श्रेणी के अनुसार विस्तृत आंकड़े तैयार किए जाएं।
संघ के अनुसार, गणना के दौरान यह स्पष्ट किया जाना चाहिए कि:
- वर्ष 2003 से अब तक कितने आरक्षित पद स्वीकृत हुए।
- कितने पदों पर नियुक्तियां हुईं।
- कितने पद अभी भी रिक्त हैं।
- किन पदों पर भर्ती प्रक्रिया शुरू नहीं हो सकी।
- किन विभागों में बैकलॉग पदों की संख्या सबसे अधिक है।
- किन संवर्गों में आरक्षित पद लंबे समय से लंबित हैं।
अजाक्स का मानना है कि इस तरह की पारदर्शी गणना से बैकलॉग पदों की वास्तविक स्थिति सामने आएगी और पात्र अभ्यर्थियों को उनके संवैधानिक अधिकार का लाभ मिल सकेगा।
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पदोन्नति में आरक्षण पर भी तत्काल आदेश की मांग
बैकलॉग भर्ती के साथ-साथ अजाक्स ने पदोन्नति में आरक्षण का मुद्दा भी प्रमुखता से उठाया है। संघ ने कहा है कि वर्ष 2019 से पदोन्नति में आरक्षण की प्रक्रिया बाधित चल रही है।
इसका सीधा असर सरकारी विभागों में कार्यरत अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति वर्ग के कर्मचारियों पर पड़ रहा है। संगठन का कहना है कि लंबे समय से पदोन्नति प्रक्रिया में आरक्षण का लाभ नहीं मिलने के कारण हजारों कर्मचारी बिना पदोन्नति के ही सेवानिवृत्त हो चुके हैं।
अजाक्स ने सरकार से मांग की है कि पदोन्नति में आरक्षण से जुड़ी बाधाओं को दूर कर तत्काल आवश्यक आदेश जारी किए जाएं। संघ का कहना है कि इस विषय में लगातार देरी से कर्मचारियों के सेवा संबंधी अधिकार प्रभावित हो रहे हैं।
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हजारों कर्मचारियों को मिल सकता है लाभ
यदि सरकार अजाक्स की मांगों के अनुरूप वर्ष 2003 से अब तक बैकलॉग पदों की विस्तृत गणना कराती है और पदोन्नति में आरक्षण से जुड़ी प्रक्रिया को आगे बढ़ाती है, तो इसका व्यापक असर देखने को मिल सकता है।
एक ओर जहां छत्तीसगढ़ के हजारों बेरोजगार युवाओं को आरक्षित बैकलॉग पदों पर भर्ती का अवसर मिल सकता है, वहीं दूसरी ओर सरकारी सेवाओं में कार्यरत कर्मचारियों को पदोन्नति का लाभ मिलने की उम्मीद बढ़ सकती है।
विशेष भर्ती अभियान के तहत यदि विभागवार रिक्तियों का सही आकलन किया जाता है, तो आने वाले समय में छत्तीसगढ़ में बड़ी संख्या में भर्ती विज्ञापन जारी होने की संभावना बन सकती है।
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सरकार के फैसले पर अब सबकी नजर
छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा बैकलॉग पदों को भरने के लिए विशेष भर्ती अभियान को लगातार जारी रखने का निर्णय महत्वपूर्ण माना जा रहा है। अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि विभिन्न विभागों में लंबित बैकलॉग पदों की वास्तविक संख्या कितनी है और सरकार इस आंकड़े को किस प्रकार सार्वजनिक करती है।
अजाक्स की मांग के बाद अब आरक्षित वर्गों के युवाओं और कर्मचारियों की नजर सरकार की अगली कार्रवाई पर टिकी हुई है। यदि वर्ष 2003 से अब तक की बैकलॉग रिक्तियों की पारदर्शी गणना होती है, तो लंबे समय से लंबित भर्ती प्रक्रिया को नई दिशा मिल सकती है।
वहीं, पदोन्नति में आरक्षण के मुद्दे पर तत्काल आदेश जारी होने से हजारों सरकारी कर्मचारियों को राहत मिलने की उम्मीद है।
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Chhattisgarh Backlog Recruitment 2026 : निष्कर्ष
छत्तीसगढ़ में Chhattisgarh Backlog Recruitment 2026 को लेकर सरकार का विशेष भर्ती अभियान आरक्षित वर्गों के युवाओं के लिए बड़ा अवसर बन सकता है। अजाक्स ने सरकार से वर्ष 2003 से अब तक लंबित बैकलॉग पदों की पारदर्शी गणना और वर्ष 2019 से बाधित पदोन्नति में आरक्षण पर तत्काल निर्णय की मांग की है।
अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि सरकार इस मांग पर क्या कदम उठाती है और विभागों में वास्तविक बैकलॉग पदों की संख्या कितनी सामने आती है। यदि प्रक्रिया पारदर्शी और समयबद्ध तरीके से आगे बढ़ती है, तो छत्तीसगढ़ में लंबे समय से लंबित बैकलॉग भर्ती और पदोन्नति के मामलों में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है।














