.

थानों में बंद 138 आत्माओं की शांति के लिए पुलिस ने कराया पूजा-पाठ, जानिए क्या होता है बिसरा | ऑनलाइन बुलेटिन

रायपुर | [धर्मेंद्र गायकवाड़] | छत्तीसगढ़ के कबीरधाम जिले में थानों में कैद आत्माओं की शांति के लिए पूजा पाठ का इंतजाम पुलिस विभाग ने किया। जिले के थानों में बंद 183 आत्माओं की शांति के लिए एसडीएम के निर्देश के बाद विधि विधान से शांति पूजा कर उन्हें जमीन के अंदर दबा दिया गया।

 

यह सुनकर आपके मन में सवाल उठ रहे होंगे की आखिर आत्माएं कैसे थानों में बंद हो सकती है। जी हां ये सभी थानों के मालखाने में बन्द थे। पुलिस विभाग ने यही मानकर आत्माओं की शांति के लिए पूजा पाठ कराया। पुलिस विभाग की भाषा में इसे विसरा कहा जाता है।

 

नष्टीकरण के लिए एसडीएम की अनुमति जरूरी

 

पुलिस अधिकारियों के अनुसार इस तरह के मामलों में एसडीएम की अनुमति आवश्यक होती है। जिसके कारण पुलिस विभाग ने सभी 183 प्रकरणों में नष्टीकरण के लिए एसडीएम से अनुमति मांगी थी।

 

फारेंसिंक साइंस लैब (FSL) और पुलिस की जांच पूरी होने के बाद इनकी उपयोगिता खत्म हो चुकी थी। वहीं कई विसरा 8 से 10 सालों से मालखानो में धूल खाते पड़े थे। वहीं कई सालों से बोतलों में बंद बिसरा से दुर्गंध आने लगी थी, जिसके चलते इन्हें नष्ट किया जाना आवश्यक हो गया था।

 

पुलिस अधिकरी रहे मौजूद

 

एसपी डॉ. लाल उमेंद सिंह बताया कि सभी थानों में कई सालों से विसरा जमा हो गए थे। जिसकी जांच पूरी हो चुकी थी। जिसे एसडीएम से विधिवत अनुमति लेने के बाद नष्ट किया गया। वहीं इस दौरान एएसपी मनीषा रावटे और एसडीएम के निर्देश पर विसरा को भूमि में दफन कर दिया गया। इस के दौरान विशेष रूप से ब्राम्हण को बुलाकर मृत आत्माओं और थानों में शांति के लिए पूजा पाठ कराया गया।

षड्यंत्र है जातिवाद | ऑनलाइन बुलेटिन
READ

 

इन थानों में विसरा प्रिजर्व

 

कबीरधाम जिले के 9 थानों में विसरा कई सालों से जमा था। जिसे अब नष्ट करने की कार्रवाई की गई है। सबसे अधिक पंडरिया थाने में 54 विसरा प्रिजर्व रखे थे, जिसे नष्ट किया गया। पांडातराई थाने के 36, पिपरिया थाने में 24, कुकदुर थाने के 21, कुंडा थाने के 4, दामापुर चौकी में 10, कवर्धा कोतवाली थाने में 29, बाजार चारभाठा चौकी में 1 दशरंगपुर चौकी के 4 मिलाकर कुल 183 मर्ग व हत्या के मामलों में जब्त बिसरा को नष्ट किया।

 

अधिकांश मामले सर्पदंश, फांसी और जहर खाने के

 

जिले में मर्ग व हत्या के प्रकरणों में प्रिजर्व किए गए मामलों में अधिकांश मामले सर्पदंश, जहर सेवन करने व फांसी जैसे मामलों के थे। पोस्टमार्टम व फारेंसिंक जांच के बाद बिसरा थानों में जमा कराया गया था। लेकिन परिजनों द्वारा बताए गए कारण संदिग्ध लगने पर विसरा प्रिजर्व किया गया था। थानों रखे होने के कारण थाना परिसर भी अशुद्ध हो रहा था। अब इस शुद्ध करने और आत्माओं की शांति के लिए पूजा पाठ कराया गया।

 

क्या होता है विसरा

 

अब आपको हम बताते है कि ये डिब्बे में बंद करके मालखाने में जमा किया गया विसरा होता क्या है। किसी भी दुर्घटना हादसे या हत्या जैसे मामलों जब पुलिस को मौत का कारण अस्पष्‍ट होता है। या फिर संदेह हो, तब मृतकों के शरीर के कुछ अंगों को सुरक्षित कर लिया जाता है। जिसे पुलिस विभाग की भाषा में विसरा कहते हैं।

 

विसरा प्रिजर्व करते समय मृतक का लिवर, हृदय, स्पीलिन, और किडनी का हिस्सा एक बोतल में सुरक्षित किया जाता हैं। इसके अलावा पोस्टमार्टम करते समय पुलिस द्वारा बताए गए मौत के कारण से जब डाॅक्टर संतुष्ट नहीं होते। तब भी बिसरा सुरक्षित करते हैं।

RPF ने नुक्कड़-नाटक कर यात्रा के दौरान ज्वलनशील सामान नहीं रखने हेतु यात्रियों को किया जागरूक | newsforum
READ

 

ये भी पढ़ें:

CG News: नई हेल्पलाइन सेवा शुरू, ताकि बुजुर्गों, दिव्यांगों और थर्ड जेंडर को न हो दिक्कत | ऑनलाइन बुलेटिन

 

Related Articles

Back to top button