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मासूम को कोबरा ने डसा तो घरवालों ने बनाया बंधक, बच्चे को अस्पताल से मिली छुट्टी तब हुई रिहाई maasoom ko kobara ne dasa to gharavaalon ne banaaya bandhak, bachche ko aspataal se milee chhuttee tab huee rihaee

कोरबा | [छत्तीसगढ़ बुलेटिन] | कोबरा सांप ने घर के आंगन में खेल रहे बच्चे को काट लिया। बच्चे के पिता ने गुस्से में आकर सांप को मछली पकड़ने के जाली से पकड़ा और उसे प्लास्टिक के धमेला में बंद कर दिया। बच्चे को माता-पिता अस्पताल लेकर गए और उपचार शुरू करवाया।

 

अभी तक आपने इंसानों को बंधक बनाने का मामला सुना होगा, लेकिन छत्तीसगढ़ में एक ग्रामीण ने सर्प को बंधक बना लिया। दरअसल, ग्रामीण ने सोच रखा था कि अगर उसके बच्चे को कुछ हुआ तो सांप से बदला लेगा।

 

एंटी वेनम इंजेक्शन से बच्चे की जान बच गई और 4 दिन बाद उसे अस्पताल से छुट्टी मिली। तब जाकर सांप को ग्रामीण ने जंगल में छोड़ा।

 

बरसात का मौसम शुरू होते ही विषैले जीव-जंतु विचरण करने बाहर निकलने लगे हैं। 4 दिन पहले कोरबा जिले के ग्राम कनकी निवासी गंगाराम के घर एक कोबरा सांप पहुंच गया।

 

आंगन में रखी लकड़ी के पास कोबरा छुपकर बैठा था। खेलते-खेलते मासूम लकड़ी के पास पहुंच गया। सांप ने मासूम को काट लिया। इसके बाद घर में कोहराम मच गया।

 

बच्चे को इलाज के लिए जिला अस्पताल लेकर गए। अस्पताल जाने से पहले गुस्साए घर वालों ने सांप को मछली पकड़ने के जाल में फंसाया और घर के अंदर एक प्लास्टिक की तगाड़ी उस पर रख दिया।

 

सांप भाग न पाए इसके लिए ऊपर से एक झउंहा (लकड़ी से बनी टोकरी) ढंक दिया और फिर उसके ऊपर अनाज की एक बोरी को रख दिया।

 

कोबरा को रेस्क्यू कर जंगल में छोड़ा गया

 

परिजनों ने सोच रखा था कि अगर बच्चे को कुछ हुआ तो सांप से बदला लिया जाएगा। घर में सांप को बंधक बनाए जाने की सूचना सर्प मित्र जितेंद्र सारथी को मिली तब वह गांव पहुंचे। उसने बच्चे के परिजनों से सर्प को छोड़ने का आग्रह किया, लेकिन घर के लोगों ने देने से साफ मना कर दिया।

 

4 दिन बाद बच्चा स्वस्थ होकर घर लौटा, तब परिजनों से सर्प मित्र जितेंद्र ने फिर सांप को छोड़ने का आग्रह किया। इसके बाद गंगाराम मान गया।

 

ग्रामीणों को लग रहा था कि कोबरा 4 दिनों में मर गया होगा। प्लास्टिक का धमेला हटाया गया तो कोबरा में हलचल हो रही थी। जितेंद्र सारथी ने सांप को सुरक्षित रेस्क्यू किया और जंगल में छोड़ दिया।

 

 

Innocent was bitten by the cobra, the family members took hostage, the child was released from the hospital then released

 

 

Korba | [Chhattisgarh Bulletin] | Cobra snake bitten a child playing in the courtyard of the house. The child’s father got angry and caught the snake with a fishing net and locked it in a plastic bag. The parents took the child to the hospital and started treatment.

 

Till now you must have heard the matter of taking humans hostage, but in Chhattisgarh a villager took a snake hostage. Actually, the villager had thought that if something happened to his child, he would take revenge on the snake.

 

The child’s life was saved by anti-venom injection and he was discharged from the hospital after 4 days. Then the villager left the snake in the forest.

 

As soon as the rainy season starts, poisonous creatures have started coming out to roam. Four days ago, a cobra snake reached the house of Gangaram, a resident of village Kanaki in Korba district.

 

The cobra was hiding near the wood kept in the courtyard. While playing, the innocent reached near the wood. The snake bitten the innocent. After this there was chaos in the house.

 

The child was taken to the district hospital for treatment. Before going to the hospital, the angry family members trapped the snake in a fishing net and placed a plastic bag on it inside the house.

 

To prevent the snakes from running away, a jhanha (basket made of wood) was covered from above and then a sack of grain was placed over it.

 

 The cobra was rescued and released into the forest

 

The family had thought that if something happened to the child, then the snake would be avenged. Snake friend Jitendra Sarathi got information about the snake being held hostage in the house, then he reached the village. He urged the family of the child to release the snake, but the people of the house flatly refused to give it.

 

After 4 days, the child returned home after recovering, then the snake friend Jitendra again urged the family members to release the snake. After this Gangaram agreed.

 

The villagers thought that the cobra would have died in 4 days. When the plastic bag was removed, there was a stir in the cobra. Jitendra Sarathi rescued the snake safely and left it in the forest.

 

 

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