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छेड़छाड़ की एफआईआर नहीं होगी रद्द, शिकायत गलत निकली तो लड़की देगी क्षतिपूर्ति chhedachhaad kee ephaeeaar nahin hogee radd, shikaayat galat nikalee to ladakee degee kshatipoorti

नई दिल्ली | [कोर्ट बुलेटिन] | दिल्ली हाईकोर्ट ने छेड़छाड़ के एक हाईप्रोफाइल मामले में एफआईआर खारिज करने से साफ इनकार कर दिया। दिल्ली हाईकोर्ट ने साथ ही कहा कि निचली अदालत में केस चलेगा, अगर आरोप गलत साबित हुए तो लड़की द्वारा आरोपी को क्षतिपूर्ति दी जाएगी। मामले का आरोपी यूएन में अहम पद नियुक्त था, लेकिन पीड़ित द्वारा यूएन को शिकायती पत्र लिखने के बाद उसे इस्तीफा देना पड़ा था।

 

आरोपी ने एफआईआर खारिज करने के लिए हाईकोर्ट में यह याचिका दायर की थी। जस्टिस जसमीत सिंह ने कहा कि हाईकोर्ट ने 3 सितंबर 2021 को दोनों पक्षों को आदेश दिया था कि चूंकि वे मध्यस्थता प्रक्रिया में हैं, इसलिए मामले में जल्दबाजी न करें। इसके बावजूद लड़की ने यूएन को पत्र लिखा। इसी वजह से क्षतिपूर्ति को लेकर आदेश देना पड़ रहा है।

 

यह है मामला

 

लड़की ने आरोपी और अपने ससुराल पक्ष पर एफआईआर करवाई थी। इसके अनुसार आरोपी लड़की की ननद का बॉयफ्रेंड था। 13 दिसंबर 2019 की रात 9 बजे जब वह अपने ससुराल में थी, आरोपी ने उससे छेड़छाड़ की। उसने ससुराल वालों को बताया, तो सास-ससुर और ननद ने उसकी पिटाई कर दी।

 

बचाव पक्ष के तर्क

 

बचाव पक्ष ने कहा कि लड़की ने घटना के 1 साल बाद 16-17 दिसंबर 2020 को शिकायत दर्ज करवाई। यह कानूनी प्रक्रिया का दुरुपयोग है।

लड़की के अनुसार रात 9 बजे अपराध हुआ। आरोपी और उसकी ननद शाम पौने 7 बजे साउथ एक्सटेंशन में थे लेकिन रात 8:47 बजे उन्होंने लाजपत नगर के एक स्टोर से खरीदारी की। इसके क्रेडिट कार्ड से भुगतान के साक्ष्य दिए गए। आरोपी का वहां से साउथ दिल्ली पहुंचना संभव नहीं था, जहां की घटना बताई गई है। बल्कि वे डिनर के बाद रात करीब सवा 11 बजे लड़की के ससुराल पहुंचे, रात डेढ़ बजे आरोपी कैब लेकर वहां से चला गया।

लड़की के पति ने उससे तलाक के लिए 7 दिसंबर 2020 को अर्जी दी थी। इसी से भड़क कर उसने 16-17 दिसंबर को छेड़छाड़ का केस किया, जो झूठा है।

 

अभियोजन पक्ष के जवाब

 

लड़की के वकील ने कहा कि लड़की को आरोपों, देरी, बयानों में विरोधाभास या आचरण को लेकर सफाई देने की जरूरत नहीं है। केस का ट्रायल चल रहा है। बचाव पक्ष इस बारे में सुनवाई में सवाल कर सकता है। सभी साक्ष्यों के आधार पर अदालत ही इन पर निर्णय देगी।

एफआईआर में देरी इसलिए भी हुई क्योंकि घटना लड़की की शादी के महज 7 दिन बाद हुई। वह अपनी शादी को बचाए रखना चाहती थी, इसलिए चुप रही।

 

शिकायतकर्ता को सुनना चाहिए

 

हाईकोर्ट ने कहा कि बचाव पक्ष की दलीलों पर अपनी सफाई देने का मौका मिलना चाहिए। यह संवेदनशील मामला है, शिकायतकर्ता को सुनना चाहिए। हाईकोर्ट जांच एजेंसी या ट्रायल कोर्ट की तरह साक्ष्यों व गवाहियों की जटिलता में जाने का काम नहीं कर सकती। एफआईआर में एक संज्ञेय अपराध दर्ज है, इसलिए ट्रायल चलेगा। इसमें जो चीजें सामने आ रही हैं, ट्रायल कोर्ट ही उनकी समीक्षा करेगी और निर्णय देगी।

 

©Delhi Highcourt logo

 

FIR of molestation will not be canceled, if the complaint turns out to be wrong, the girl will compensate

 

 

New Delhi | [Court Bulletin] | The Delhi High Court categorically refused to quash the FIR in a high-profile molestation case. The Delhi High Court also said that the case will proceed in the lower court, if the allegations are proved wrong, then the girl will give compensation to the accused. The accused in the case was appointed to a key position in the UN, but had to resign after the victim wrote a complaint letter to the UN.

 

The accused had filed this petition in the High Court to quash the FIR. Justice Jasmeet Singh said that on September 3, 2021, the High Court had ordered both the parties not to rush the matter since they are in the mediation process. Despite this, the girl wrote a letter to the UN. For this reason, an order for compensation has to be given.

 

this is the case

 

The girl had lodged an FIR against the accused and her in-laws side. According to this, the accused was the boyfriend of the girl’s sister-in-law. The accused molested her on the night of 13 December 2019 at 9 pm when she was at her in-laws’ house. When she told her in-laws, her mother-in-law and sister-in-law beat her up.

 

defense arguments

 

The defense said that the girl filed the complaint on 16-17 December 2020, 1 year after the incident. This is an abuse of the legal process.

According to the girl, the crime took place at 9 pm. The accused and his sister-in-law were in South Extension at 7.45 pm but at 8:47 pm they made purchases from a store in Lajpat Nagar. Proof of payment by credit card was given. It was not possible for the accused to reach South Delhi from where the incident has been reported. Rather, after dinner, they reached the girl’s in-laws at around 11.15 pm, the accused left from there with a cab at 1.30 pm.

The girl’s husband had applied for divorce from her on 7 December 2020. Enraged by this, he filed a case of molestation on 16-17 December, which is false.

 

 Prosecution’s response

 

The girl’s lawyer said that the girl need not explain the allegations, delay, contradiction in statements or conduct. The trial of the case is going on. The defense can question about this at the hearing. On the basis of all the evidence, the court will give its decision.

The delay in the FIR was also because the incident happened just 7 days after the girl’s marriage. She wanted to save her marriage, so she kept quiet.

 

 complainant must listen

 

The High Court said that the defense should be given an opportunity to explain itself on the arguments. This is a sensitive matter, the complainant should be heard. The High Court cannot go into the complexity of the evidence and witnesses like the investigating agency or the trial court. A cognizable offense is registered in the FIR, so the trial will go on. The things that are coming out in this, the trial court will review them and give a decision.

 

 

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