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DNA जांच रेप के मामले में निर्णायक सबूत नहीं, बलात्कर के मामले पर कोर्ट की टिप्पणी dn jaanch rep ke maamale mein nirnaayak saboot nahin, balaatkar ke maamale par kort kee tippanee

मुंबई | [कोर्ट बुलेटिन] | बॉम्बे हाईकोर्ट ने अपने एक आदेश में कहा है कि बलात्कार के किसी मामले में DNA 🧬 जांच को निर्णायक साक्ष्य नहीं माना जा सकता और उसका इस्तेमाल केवल कन्फर्मेशन के लिए ही किया जा सकता है। बॉम्बे हाईकोर्ट ने आरोपी की जमानत याचिका 26 जुलाई को खारिज की थी और विस्तृत आदेश की प्रति शुक्रवार को उपलब्ध कराई गई। इस मामले में आरोपी को सितंबर 2020 में गिरफ्तार किया गया था।

 

जस्टिस भारती डांगरे ने नवी मुंबई के निवासी एक व्यक्ति की जमानत याचिका खारिज करते हुए यह टिप्पणी की जिस पर अपने पड़ोस में रहने वाली 14 साल की एक लड़की का बलात्कार करने का आरोप है। आरोपी ने कथित तौर पर 10 दिन तक नाबालिग लड़की के साथ बलात्कार किया।

 

निगेटिव आई है पीड़िता की DNA 🧬 जांच

 

आरोपपत्र के अनुसार लड़की आरोपी के घर पर काम करती थी और उसने उसका गलत फायदा उठाया। अदालत ने कहा कि डीएनए जांच ‘निगेटिव’ है लेकिन पीड़िता के बयान को झूठा नहीं माना जा सकता जिसने अपने ऊपर हुए यौन हमले के कृत्य का विवरण दिया है। हाईकोर्ट ने कहा कि बलात्कार के मामले में डीएनए जांच को निर्णायक साक्ष्य नहीं कहा जा सकता और उसका इस्तेमाल केवल संपुष्टिकरण साक्ष्य के तौर पर ही किया जा सकता है।

 

पीड़िता दर्ज कार चुकी है अपना बयान

 

अदालत ने कहा, इस पर कोई विवाद नहीं है कि डीएनए विश्लेषण के साक्ष्य का इस्तेमाल कन्फर्मेशन के लिए किया जा सकता है। पीड़िता और उसकी मां का बयान दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 164 के तहत दर्ज किया गया है। पीड़िता ने अपने ऊपर कई बार हुए यौन हमले की घटनाओं का विवरण दिया है जो उसके अनुसार आवेदनकर्ता द्वारा किया गया।

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मुंह बंद करने के लिए आरोपी ने दी थी धमकी

 

अदालत ने कहा कि पीड़िता ने विशेष रूप से कहा है कि आरोपी ने उसे कुछ पैसों का लालच दिया और घटना के बारे में किसी को नहीं बताने की धमकी भी दी। जिसकी वजह से वह चुप रही। जब लड़की गर्भवती हो गई, तब उसने अपने माता पिता को बताया कि आरोपी इस गर्भ के लिए जिम्मेदार है और उसने बलात उसे गर्भवती किया। जस्टिस डांगरे ने कहा, डीएनए जांच से आवेदनकर्ता उस बच्चे का पिता नहीं साबित होता लेकिन इससे पीड़िता को झूठा नहीं माना जा सकता। जिसे अपने 164 के बयान में कहा है कि आवेदनकर्ता (आरोपी) ने उसके साथ जबरन यौन संबंध बनाया।

 

 

 

DNA test is not conclusive evidence in rape case, court’s comment on rape case

 

 

Mumbai | [Court Bulletin] | The Bombay High Court, in one of its orders, has held that DNA test cannot be considered conclusive evidence in a rape case and can only be used for confirmation. The Bombay High Court had dismissed the bail plea of ​​the accused on July 26 and a copy of the detailed order was made available on Friday. The accused in this case was arrested in September 2020.

 

Justice Bharti Dangre made the observation while dismissing the bail plea of ​​a Navi Mumbai resident who is accused of raping a 14-year-old girl living in his neighbourhood. The accused allegedly raped the minor girl for 10 days.

 

 The victim’s DNA test has come negative

 

मुन्शी प्रेमचंद munshee premachand
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According to the chargesheet, the girl used to work at the house of the accused and he took undue advantage of her. The court said the DNA test is “negative” but the statement of the victim who has given details of the act of sexual assault on her cannot be taken to be false. The High Court held that DNA test cannot be termed as conclusive evidence in a rape case and can be used only as corroborative evidence.

 

 Victim has recorded her statement

 

“There is no dispute that the evidence of DNA analysis can be used for confirmation,” the court said. The statement of the victim and her mother has been recorded under section 164 of the Code of Criminal Procedure. The victim has given details of incidents of sexual assault on her several times which according to her was committed by the applicant.

 

 The accused had threatened to shut his mouth

 

The court noted that the victim has specifically stated that the accused lured her of some money and also threatened not to tell anyone about the incident. Because of which she remained silent. When the girl became pregnant, she told her parents that the accused was responsible for the pregnancy and he forcibly impregnated her. Justice Dangre said that the DNA test does not prove the applicant to be the father of the child, but it does not make the victim a liar. Which in his statement of 164 has said that the applicant (accused) forcibly had sex with him.

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