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कुतुब मीनार में किस कानून के तहत चाहिए पूजा का हक, हिंदू पक्ष से कोर्ट का सवाल kutub meenaar mein kis kaanoon ke tahat chaahie pooja ka hak, hindoo paksh se kort ka savaal

नई दिल्ली | [कोर्ट बुलेटिन] | दिल्ली के महरौली में स्थित Qutub Minar (कुतुब मीनार) परिसर में 27 हिंदू और जैन मंदिरों के जीर्णोद्धार के संबंध में दायर एक अपील पर साकेत कोर्ट में आज सुनवाई खत्म हो गई है। सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं ने कोर्ट को बताया कि कुतुब मीनार परिसर में स्थित कुव्वत-उल-इस्लाम मस्जिद; मंदिर परिसर के स्थान पर बनाई गई थी। कोर्ट ने इस मामले में आदेश सुरक्षित रखते हुए फैसला सुनाने के लिए 9 जून 2022 की तारीख तय की है।

 

हिंदू पक्ष के वकील हरि शंकर जैन ने कहा कि कुतुब मीनार को 27 हिन्दू और जैन मंदिरों को तोड़कर बनाया गया था। आज भी यहां कई हिंदू देवी-देवताओं की मूर्तियां मौजूद हैं। इसे देखते हुए देखते हुए हिन्दुओं को कुतुब मीनार परिसर में पूजा करने की इजाजत दी जानी चाहिए।

 

हिंदू पक्ष का यह भी दावा है यहां 1600 साल पुराना लोहे का स्तंभ और पूजा की वस्तु आज भी मौजूद हैं। इस स्तंभ पर संस्कृत में लिखे गए श्लोक भी मौजूद हैं। हिंदू पक्ष के वकील हरि शंकर जैन और वकील रंजना अग्निहोत्री से यह मुकदमा दायर किया गया है।

 

सुनवाई के दौरान कोर्ट ने याचिकाकर्ताओं से पूछा कि आपको क्या लगता है कि यह एक स्मारक है या पूजा स्थल? कौन सा कानूनी अधिकार आपको किसी स्मारक को पूजा स्थल में बदलने का अधिकार देता है?

 

याचिकाकर्ता जैन ने एएमएएसआर अधिनियम 1958 (AMASR Act 1958) की धारा 16 को पढ़ा, इस अधिनियम के तहत केंद्र सरकार द्वारा संरक्षित एक संरक्षित स्मारक जो पूजा स्थल या तीर्थस्थल है, उसका उपयोग, उसके चरित्र के साथ असंगत किसी भी उद्देश्य के लिए नहीं किया जाएगा।

 

साकेत कोर्ट ने कहा कि दिल्ली के महरौली स्थित कुतुब मीनार परिसर में 27 हिंदू और जैन मंदिरों के जीर्णोद्धार के संबंध में अपील पर आदेश सुनाने के लिए 9 जून 2022 की तारीख तय की है।

 

 

कुतुब मीनार परिसर में 27 हिंदू और जैन मंदिरों के जीर्णोद्धार के संबंध में एक अपील पर साकेत कोर्ट में सुनवाई होने के बाद वकील सुभाष गुप्ता ने कहा कि कोर्ट से मेरा निवेदन था कि अगर कोई सुरक्षा स्थान बिना किसी व्यवधान के 800 वर्षों से जारी है तो उसे जारी रहना चाहिए। पूजा का मौलिक अधिकार है, लेकिन यह पूर्ण अधिकार नहीं है जैसा कि सुप्रीम कोर्ट ने कई फैसलों में बताया है।

 

एएसआई ने दायर किया हलफनामा

 

कुतुब मीनार परिसर में मंदिरों के जीर्णोद्धार से संबंधित अपील के जवाब में भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) ने भी साकेत कोर्ट में एक हलफनामा दायर किया है। एएसआई ने याचिका का विरोध करते हुए कहा है कि कुतुब मीनार एक स्मारक है और इस तरह की संरचना पर कोई भी मौलिक अधिकार का दावा नहीं कर सकता है और इस जगह पर पूजा करने का कोई अधिकार नहीं दिया जा सकता है।

 

एएसआई ने कहा है कि AMASR अधिनियम 1958 के तहत ऐसा कोई प्रावधान नहीं है जिसके तहत किसी भी लिविंग मॉन्यूमेंट पर पूजा शुरू की जा सकती है। दिल्ली हाईकोर्ट ने अपने आदेश दिनांक 27/01/1999 में स्पष्ट रूप से इसका उल्लेख किया है।

 

 

बता दें कि, हिंदू पक्ष की ओर से मुकदमे में दावा किया गया है कि भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) द्वारा प्रदर्शित एक संक्षिप्त इतिहास बताता है कि आक्रमणकारी मोहम्मद गौरी की सेना में कमांडर कुतुबदीन ऐबक द्वारा 27 मंदिरों को ध्वस्त कर दिया गया था और कुव्वत-उल-इस्लाम मस्जिद को परिसर के अंदर खड़ा किया गया था।

 

Under which law is the right to worship in Qutub Minar, the question of the court from the Hindu side

 

New Delhi | [Court Bulletin] | Hearing on an appeal filed in connection with the restoration of 27 Hindu and Jain temples in the Qutub Minar (Qutub Minar) complex located in Mehrauli, Delhi, ended today in the Saket Court. During the hearing, the petitioners told the court that the Quwwat-ul-Islam mosque located in the Qutub Minar complex; The temple was built on the site of the complex. The court, while reserving the order in this matter, has fixed June 9, 2022 for delivering the verdict.

 

Hari Shankar Jain, counsel for the Hindu side, said that Qutub Minar was built by demolishing 27 Hindu and Jain temples. Even today idols of many Hindu deities are present here. Keeping this in view, Hindus should be allowed to worship in the Qutub Minar complex.

 

The Hindu side also claims that a 1600-year-old iron pillar and objects of worship are still present here. Shlokas written in Sanskrit are also present on this pillar. The suit has been filed by advocate Hari Shankar Jain and advocate Ranjana Agnihotri for the Hindu side.

 

During the hearing, the court asked the petitioners that what do you think is a memorial or a place of worship? Which legal right gives you the right to convert a monument into a place of worship?

 

Petitioner Jain read section 16 of the AMASR Act 1958, a protected monument protected by the Central Government under this Act, being a place of worship or a place of pilgrimage, shall not be used for any purpose inconsistent with its character. Will go

 

The Saket court said that it has fixed June 9, 2022 for hearing the order on appeal regarding the restoration of 27 Hindu and Jain temples in the Qutub Minar complex in Mehrauli, Delhi.

 

 

After hearing in the Saket court on an appeal regarding the restoration of 27 Hindu and Jain temples in the Qutub Minar complex, advocate Subhash Gupta said that my request to the court was that if a security place is continuing for 800 years without any disturbance, then He should continue. Worship is a fundamental right, but it is not an absolute right as stated in several judgments of the Supreme Court.

 

 ASI filed affidavit

 

The Archaeological Survey of India (ASI) has also filed an affidavit in the Saket Court in response to an appeal related to the restoration of temples in the Qutub Minar complex. The ASI has opposed the petition, saying that Qutub Minar is a monument and no one can claim a fundamental right on such a structure and no right can be granted to worship at this place.

 

The ASI has said that under the AMASR Act 1958 there is no such provision under which puja can be started at any living monument. The Delhi High Court in its order dated 27/01/1999 has clearly mentioned this.

 

 

The suit, on behalf of the Hindu side, claims that a brief history displayed by the Archaeological Survey of India (ASI) shows that 27 temples were demolished by Qutubdin Aibak, commander in the army of the invader Mohammad Ghori, and Quwwat -Ul-Islam Mosque was erected inside the premises.

 

 

 

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