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मंदिर तोड़कर मस्जिद बनाने के सबूत नहीं, कोर्ट में ASI की दलील mandir todakar masjid banaane ke saboot nahin, kort mein asi kee daleel

नई दिल्ली | [कोर्ट बुलेटिन] | कुतुब मीनार परिसर में मंदिर तोड़कर मस्जिद बनाने के दावे को लेकर दिल्ली की साकेत कोर्ट में सुनवाई हुई। कोर्ट ने इस मामले में आदेश को सुरक्षित रख लिया है। मामले में 9 जून 2022 को अदालत अपना फैसला सुनाएगी। ASI (पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग) ने कोर्ट को बताया कि इस बात को कई प्रमाण नहीं है कि कुतुब मीनार परिसर में स्थित मस्जिद किसी मंदिर को तोड़कर बनाई गई थी।

एएसआई ने कहा कि इस बात का भी कोई सबूत नहीं है कि लोहे का पिलर और मंदिर के अवशेष वहां पहले से मौजूद थे या कहीं बाहर से लाए गए थे। एएसआई ने स्पष्ट रूप से कहा कि कुतुब मीनार कभी भी पूजा का स्थान नहीं था। कुतुब मीनार परिसर में मंदिर का जीर्णोद्धार कराने की मांग का एएसआई ने विरोध किया। उसने कहा कि 1914 से कुतुब मीनार की एक ऐतिहासिक इमारत के रूप में सुरक्षा की जा रही है और इसके स्ट्रक्चर को बदला नहीं जा सकता।

 

क्या है मामला?

 

याचिका में दावा किया गया था कि कुतुब मीनार परिसर में हिंदू और जैन मंदिर थे जिन्हें तोड़ दिया गया था। याचिकाकर्ता ने परिसर में पूजा कि इजाजत भी मांगी थी। यह विवाद तब शुरू हुआ जब एएसआई के पूर्व रीजनल डायरेक्टर धर्मवीर शर्मा ने दावा किया कि कुतुब मीनार को हिंदू राजा विक्रमादित्य ने बनवाया था न कि कुतुब अल दीन एबक ने।

 

उनका कहना था कि यह एक सन टावर था। उन्होंने यह भी दावा किया था कि परिसर में हिंदू देवी-देवताओं की मूर्तियां पाई गईं और कुव्वत उल इस्लाम मस्जिद को 27 जैन मंदिर तोड़कर बनाया गया था।

 

सन टावर है कुतुब मीनार, राजा विक्रमादित्य ने कराया था निर्माण; धर्मवीर शर्मा का दावा san taavar hai kutub meenaar, raaja vikramaadity ne karaaya tha nirmaan; dharmaveer sharma ka daava

 

No evidence to build a mosque by demolishing a temple, ASI’s argument in court

 

 

New Delhi | [Court Bulletin] | Hearing was held in Delhi’s Saket court regarding the claim of building a mosque by demolishing the temple in the Qutub Minar complex. The court has reserved the order in this case. The court will give its verdict in the case on 9 June 2022. The ASI (Archaeological Survey Department) told the court that there was no evidence to suggest that the mosque located in the Qutub Minar complex was built by demolishing a temple.

 

The ASI said that there is also no evidence that the iron pillar and the remains of the temple were already there or were brought from outside. The ASI clearly stated that Qutub Minar was never a place of worship. The ASI opposed the demand for restoration of the temple in the Qutub Minar complex. He said that since 1914, Qutub Minar is being protected as a historical building and its structure cannot be changed.

 

 What’s the matter?

 

The petition claimed that there were Hindu and Jain temples in the Qutub Minar complex which were demolished. The petitioner had also sought permission for worship in the premises. The controversy started when former ASI regional director Dharamvir Sharma claimed that the Qutub Minar was built by the Hindu king Vikramaditya and not Qutb al-Din Aibak.

 

He said that it was a sun tower. They also claimed that idols of Hindu gods and goddesses were found in the premises and that the Quwwat-ul-Islam mosque was built by demolishing 27 Jain temples.

 

सन टावर है कुतुब मीनार, राजा विक्रमादित्य ने कराया था निर्माण; धर्मवीर शर्मा का दावा san taavar hai kutub meenaar, raaja vikramaadity ne karaaya tha nirmaan; dharmaveer sharma ka daava

 

 

 

हसदेव रोवत हे hasadev rovat he

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