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सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला, बेनामी संपत्ति मामले में अब नहीं जाना होगा जेल supreem kort ka bada phaisala, benaamee sampatti maamale mein ab nahin jaana hoga jel

नई दिल्ली | [कोर्ट बुलेटिन] | Supreme Court News : बेनामी संपत्ति कानून को चुनौती देने वाली याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार यानि आज 23 अगस्त को सुनवाई की। इस दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि बेनामी संपत्ति अधिनियम-2016 में किया गया संशोधन उचित नहीं है।

 

इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा फैसला लेते हुए बेनामी संपत्ति के मामले में 3 साल तक की सजा के कानून को निरस्त कर दिया है। यह प्रावधान बेनामी लेनदेन अधिनियम, 2016 की धारा 3(2) में किया गया था। अदालत ने कहा कि यह धारा स्पष्ट रूप से मनमाना है।

 

सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा कि 2016 के एक्ट के तहत सरकार को दी गई संपत्ति को जब्त करने का अधिकार पूर्वव्यापी नहीं हो सकता। यानी पुराने मामलों में 2016 के कानून के तहत कार्रवाई नहीं की जा सकती है।

 

 क्या है बेनामी संपत्ति ?

 

बेनामी संपत्ति वह संपत्ति है, जिसकी कीमत किसी और ने चुकाई है, लेकिन किसी अन्य व्यक्ति के नाम पर। यह संपत्ति पत्नी, बच्चों या किसी रिश्तेदार के नाम पर भी खरीदी जाती है, जिस व्यक्ति के नाम से ऐसी संपत्ति खरीदी जाती है, उसे ‘बेनामदार’ कहा जाता है।

 

बेनामी संपत्ति का हकदार कौन है ?

 

हालांकि, यह संपत्ति किसके नाम पर ली गई है, वह केवल इसका नाममात्र का मालिक है, जबकि वास्तविक शीर्षक उस व्यक्ति का है जिसने उस संपत्ति के लिए पैसे का भुगतान किया है। ज्यादातर लोग ऐसा इसलिए करते हैं ताकि अपने काले धान को छुपा सकें।

 

पिछले कुछ सालों में केंद्र सरकार ने काले धन के लेन-देन को खत्म करने के लिए कई कदम उठाए हैं। इस वजह से ‘बेनामी संपत्ति’ भी सुर्खियों में रही। इसी तरह बेनामी संपत्ति के मामलों को कम करने के लिए भी कई योजनाएं बनाई गईं।

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Big decision of Supreme Court, will not go to jail in benami property case

 

New Delhi | [Court Bulletin] | Supreme Court News: The Supreme Court will hear the petition challenging the Benami Property Act on Tuesday, August 23. During this, the Supreme Court said that the amendment made in the Benami Property Act-2016 is not proper.

 

Along with this, taking a big decision, the Supreme Court has repealed the law of punishment of up to 3 years in the case of benami property. This provision was made in section 3(2) of the Benami Transactions Act, 2016. The court said that this section is clearly arbitrary.

 

The Supreme Court also held that the power to confiscate property given to the government under the 2016 Act cannot be retrospective. That is, in old cases, action cannot be taken under the 2016 law.

 

  What is benami property?

 

Benami property is property the price of which has been paid by someone else, but in the name of another person. This property is also purchased in the name of wife, children or any relative, the person in whose name such property is purchased is called ‘benamdar’.

 

 Who is entitled to Benami property?

 

However, in whose name this property is taken, he is only the nominal owner of it, whereas the actual title belongs to the person who has paid the money for that property. Most of the people do this to hide their black paddy.

 

In the last few years, the central government has taken several steps to eliminate black money transactions. Because of this ‘benami property’ also remained in the headlines. Similarly, many schemes were also made to reduce the cases of benami property.

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