दलित आइकॉन डॉ. आंबेडकर की फोटो अपने घर पर लगाएंगे किसान, जानें क्या है नई रणनीति | newsforum

नई दिल्ली | केंद्र सरकार की ओर से लागू 3 कृषि कानूनों के विरोध में चल रहे आंदोलन को मजबूत करने के लिए किसानों ने कई फैसले लिए हैं। आंदोलन पर ‘जाट राजनीति’ का टैग लगने के बाद किसान अब इसे अन्य वर्गों तक भी पहुंचाने की कोशिश में हैं। इसी के तहत शनिवार को किसानों की एक महापंचायत इसे बहुसंख्यक दलित समुदाय तक पहुंचाने हरियाणा के हिसार जिले के बरवाला कस्बे में हुई। मीटिंग में लंबे समय से संघर्ष के गवाह रहे जाट और जाटव समुदाय को एक करने की रणनीति पर बात हुई।

 

बता दें कि हरियाणा में दलित आबादी 20 फीसदी है। जाट, सैनी, यादव जैसे समुदायों के बाद दलित समुदाय का भी राजनीति पर अच्छा खासा प्रभाव रहा है ऐसे में दलित समुदाय का समर्थन मिल जाए किसान आंदोलन को संजीवनी मिल जाएगी।

 

महापंचायत में दलितों और जाटों के बीच एकता स्थापित करने को लेकर बात हुई। मीटिंग में यह प्रस्ताव भी पारित हुआ किसान अपने घरों में दलित आइकॉन व भारत रत्न बाबा साहेब आंबेडकर की तस्वीरें लगाएं। इसके अलावा दलितों को अपने घर में सर छोटू राम की तस्वीरें लगाने के लिए कहा गया। सर छोटू राम को जाटों के बीच एक आइकॉन के तौर पर देखा जाता है।

 

चंदूनी ने इस मीटिंग के दौरान कहा कि हमारी लड़ाई सिर्फ सरकार के खिलाफ ही नहीं है बल्कि पूंजीवाद के भी खिलाफ है। उन्होंने कहा कि आज भी सरकार हमें बांटने में लगी है। कभी यह बंटवारा जाति के नाम पर किया जाता है तो कभी मजहब के नाम पर। हम सरकार की साजिशों को समझते हैं।

 

यही नहीं किसान महापंचायत में आंदोलन को दूसरे राज्यों तक ले जाने पर भी बात हुई। चंदूनी ने कहा कि हमें हरियाणा और पंजाब में महापंचायतें करने की जरूरत नहीं है। आंदोलन को दूसरे राज्यों तक ले जाना होगा।

 

उन्होंने कहा कि मजदूरों को यह समझना होगा कि तीन कृषि कानूनों के खिलाफ लड़ाई सिर्फ किसानों की ही नहीं है। इससे मजदूर भी प्रभावित होंगे। इसलिए हमारी अपील है कि वे भी इस आंदोलन का हिस्सा बनें। यही नहीं उन्होंने आगामी पंचायत चुनावों का जिक्र करते हुए महापंचायत में मौजूद लोगों से अपील की कि बीजेपी को छोड़ आप लोग किसी को भी वोट कर सकते हैं।


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