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gam de gaya maanavata ke yaar ka jaana !! गम दे गया मानवता के यार का जाना !!

के. विक्रम राव

©K. Vikram Rao, New Delhi

The author is the National President of the Indian Federation of Working Journalists (IFWJ).


 

When Mikhail Gorbachev came on his visit to India (November 1986) (this was his first trip to Asia) he wrote the New Delhi Declaration with Rajiv Gandhi. There was a special mention in it: ‘It is the effort of the Soviet Union and India to create a world where there is no violence, no nuclear weapons.’ This was the philosophy of Gorbachev’s life. May there be peace, development of man, his youth passed when the modern incarnation of Genghis Khan was ruled by Joseph Stalin. Since then this communist youth had set the objectives of glasnost (free expression) and perestroika (reconstruction). Gorbachev’s incarnation in the corridors of power of the Kremlin three and a half decades after the terrorist of the monstrous Stalin was an epoch-making and epoch-making event. The first task Gorbachev did was to give a natural and human shape to the artificial, demonic constitution of the Soviet Union. Russia was then freed from fear. The age-old fear of the common man has come to an end. Dictator Leonid Brezhnev (24 December 1979) sent his Red Army to capture Kabul, Gorbachev liberated Afghanistan (on 15 February 1989). However, again the Americans took over and they were killed and driven away. But in the nectar festival year of their independence, Indians will especially remember Gorbachev, pay tribute. cause? He freed his neighboring nations from Soviet slavery. Berlin (East Germany), Poland, Bulgaria, Romania, Hungary, Mongolia and Czechoslovakia were made independent republics. From Stalin to Brezhnev, the independence of these nations was snatched through the Red Army. Gorbachev ended the race to manufacture nuclear weapons. The amount was invested in economic development. He was the Messiah of Freedom. The communists, who were apprehensive of China, remained close to India. The US under Ronald Reagan became a friend of Russia for the first time.

 

 

The old Stalinist gangs of Moscow considered Gorbachev to be an enemy of the nation. He was always in favor of human rights and election by vote. This incident happened in August 1991. Then I went to a press conference in Pyongyong (North Korea). Suddenly the news came that the Russian army overthrew Gorbachev. Russian tanks surrounded the Red Square in Moscow. Then the Stalinist, brutal dictator North Korea’s Kim Jong Il (Dear Leader) celebrated a procession of happiness. I was sad. But the communist journalists were beaming with joy. Then the news turned. Boris Yelsin reversed the bet. Gorbachev survived. The conspiracy was crushed. That night I hit my glass of milk, but the drunken Communist comrades were not picking up the drink. were disappointed. In despair.

 

Gorbachev was deeply in love with his wife Raisa Maximona. Used to get emotional. She was suffering from cancer. Died. When Gorbachev was awarded the Nobel Prize in 1990, he donated all the prize money (about ten crore rupees) to children with cancer. In 1987, he named a square as Indira Gandhi at Lal Chowk in Moscow. Rajiv Gandhi was there then. He was the winner of Indira Gandhi Peace Prize.

 

Be Gorbachev’s great favorite of Islamists. In the Soviet Union, Vladimir Lenin and Joseph Stalin made Asian Islamic nations communist colonies. Then Gorbachev abolished this Soviet imperialism. Among these states were: Uzbekistan, Azerbaijan, Turkmenistan, Kyrgyzstan, Kazakhstan, etc. Mosques were demolished during Stalin’s time in these Muslim states. A museum was opened in them. Not only Azaan, Namaz was also banned. Pig meat was sold openly. Islam was outlawed. As today Communist China has done in the Muslim region of Uighurs. Gorbachev gave complete autonomy to these Muslim territories. Freed from the reign of Moscow.

 

Gorbachev was worried about the Russian attack on Ukraine. They were half Ukrainian. From the maternal side. But the stubborn Putin did not listen. He was troubled by it. Rajiv’s expression in this context was very appropriate. When the two reunited in 1989, Rajiv said: “When we meet friends, the heart is lehrata hai, it is the heartbeat.” This was the sentiment of the common Indian.

 

But the Indian communists used to suffer over it. Gorbachev stopped financial aid to the world’s communist parties. These communists, who grew up on Soviet stipends, considered them tyrants. On his visit to Delhi, Gorbachev refused to meet the leaders of both the Communist parties of India (CPI-M and CPI). However, in the period from Nehru to Atal, Russian leaders used to meet these Indian communist fraternities from Delhi in a traditional way.

 

Today (31 August 2022) due to the death of Gorbachev, the common man feels that a great man has passed away. Chaman was deserted. He fell asleep while telling the story. We kept listening. Got a call from Varanasi today afternoon. Senior journalist Dayanand. He was the Principal Secretary of Kashi Journalist Association. Professor in the School of Journalism. Doctorate in Mass Communication. Blindly told the bad news received from Moscow. I was writing on the British colonial occupation of the Falklands. Changed subject. My humble tribute to Gorbachev.

 

 

मिखाइल गोर्बाचेव

गम दे गया मानवता के यार का जाना !!

के. विक्रम राव

©के. विक्रम राव, नई दिल्ली

–लेखक इंडियन फेडरेशन ऑफ वर्किंग जर्नलिस्ट (IFWJ) के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं।


 

 

जब मिखाइल गोर्बाचेवने अपनी भारत यात्रा (नवम्बर 1986)  पर ( यह उनकी एशिया का पहला सफर था।) आये थे तो उन्होंने राजीव गांधी के साथ नयी दिल्ली घोषणा पत्र रचा था। उसमें एक विशेष उल्लेख था: ‘सोवियत संघ और भारत का प्रयास है कि ऐसा विश्व बने जहां न हिंसा हो, न आणविक शस्त्र।‘‘ गोर्बाचेवकी जिंदगी का फलसफा यही था। शांति हो, मानव का विकास हो, उनका यौवन बीता जब चंगेज खां के आधुनिक अवतार जोसेफ स्टालिन का राज था। तभी से इस कम्युनिस्ट तरूण ने ग्लासनोस्त (मुक्त अभिव्यक्ति) तथा पेरस्ट्रोइका (पुनर्निर्माण) का मकसद निर्धारित कर लिया था। नरराक्षस स्टालिन के आतंकी साढे तीन दशकों बाद गोर्बाचेवको क्रेमलिन की सत्ता के गलियारे में अवतार एक युगांतकारी तथा युगांतरकारी घटना रही। पहला काम गोर्बाचेवका था कि सोवियत संघ के कृत्रिम, दानवीय गठन को स्वाभाविक तथा इंसानी आकार दिया जाये। रूस तब खौफ से मुक्त हुआ। आमजन के सदियों पुराने डर का अंत हो गया। तानाशाह लियोनिड ब्रेज्नेव ने (24 दिसंबर 1979) अपनी लाल सेना को काबुल कब्जाने रवाना किया था, (15 फरवरी 1989 को)  अफगानिस्तान को गोर्बाचेवने आजाद कर दिया था। हालांकि फिर अमेरीकियों ने हथियाया और वे मारकर भगाये गये। लेकिन अपनी आजादी के अमृत महोत्सव वर्ष में भारतीयजन गोर्बाचेवको खास तौर पर याद करेंगेे, श्रद्धांजलि देंगे। कारण? उन्होंने अपने पड़ोसी राष्ट्रों को सोवियत गुलामी से स्वतंत्र किया। बर्लिन (पूर्वी जर्मनी), पोलैण्ड, बलगेरिया, रोमानिया, हंगरी, मंगोलिया और चेकोस्लोवाकिया को स्वाधीन गणराज्य बनवाया। स्टालिन से ब्रेज्नेव तक ने इन राष्ट्रों की आजादी लाल सेना के मार्फत छीनी थी। गोर्बाचेवने आणविक शस्त्र निर्माण की होड़ खत्म की थी। आर्थिक विकास में राशि निवेश कराया था। वे स्वाधीनता के मसीहा थे। कम्युनिष्ट चीन से आशंकित रहे भारत के आत्मीय रहे। रोनल्ड रीगन वाला अमेरिका पहली बार रूस का सुहृद बना।

 

मास्को के पुराने स्टालिनवादी गिरोह गोर्बाचेवको राष्ट्रशत्रु मानते थे। वे मानव अधिकारों तथा मतदान द्वारा निर्वाचन के हमेशा पक्षधर रहे। यह वाकया है अगस्त 1991 का। तब में एक पत्रकार सम्मेलन में प्योंगयोंग (उत्तरी कोरिया) मैं गया था। अकस्मात खबर आयी कि रूसी फौज ने गोर्बाचेवका तख्ता पलट दिया। मास्को के लाल चौक को रूसी टैंकों ने घेर लिया। तब स्टालिनवादी, क्रूर तानाशाह उत्तर कोरिया का किंम जोंग इल (डियर लीडर) ने खुशी का जलसा मनाया था। मैं दुखी था। मगर कम्युनिस्ट पत्रकार हर्ष से झूम रहे थे। तभी खबर पलटी। बोेरिस येल्सिन ने दांव उलट दिया। गोर्बाचेवबच गये। साजिश कुचल दी गयी। उस रात मैंने अपने दूधभरे ग्लास को टकराया, पर शराबी कम्युनिस्ट साथी जाम नहीं उठा रहे थे। निराश थे। विषाद में।

 

गोर्बाचेवको अपनी पत्नी राइसा मैक्सिमोना से बड़ा प्यार था। भावुक हो जाते थे। वे कैंसर ग्रस्त थी। मर गयीं। जब 1990 में गोर्बाचेवको नोबेल पुरस्कार से नवाजा गया तो उन्होंने पुरस्कार की समस्त राशि (करीब दस करोड़ रूपये) कैंसरग्रस्त बच्चों को दान में दे दी। मास्को के लाल चौक पर 1987 में उन्होंने एक चौराहे को इंदिरा गांधी का नाम दिया। राजीव गांधी तब वहां थे। इंदिरा गांधी शांति पुरस्कार के वे विजेता रहे।

 

इस्लामिस्टों के गोर्बाचेवबड़े मनपंसद रहें। सोवियत संघ में व्लादिमीर लेनिन और जोसेफ स्टालिन ने एशियाई इस्लामी राष्ट्रों को कम्युनिस्ट उपनिवेश बना डाला था। तब गोर्बाचेवने इस सोवियत साम्राज्यवाद का उन्मूलन किया। इन राज्यों में: उजबेकिस्तान, अजरबैजान, तुर्कमेनिस्तान, किर्गिस्तान, कजाकिस्तान आदि थे। इन मुस्लिम राज्यों में स्टालिन के समय मस्जिदें ढा दी गयीं थी। उनमें संगीतालय खोल दिया गया था। अजान ही नहीं, नमाज पर भी पाबंदी लगा दी थी। सुअर का गोश्त खुलेआम बेचा जाता था। इस्लाम को गैरकानूनी करार दिया गया था। जैसा आज कम्युनिस्ट  चीन ने मुस्लिम क्षेत्र उइगर में कर डाला है। गोर्बाचेवने इन मुसलमान प्रदेशों को पूरी स्वायतता दी। मास्को के राज से मुक्त कर दिया।

 

यूक्रेन पर रूसी हमले से गोर्बाचेवचिंतित थे। वे आधे यूक्रेनी थे। ननिहाल की तरफ से। मगर जिद्दी पुतिन ने सुनी नहीं। उन्हें इसका क्लेश रहा।  इस संदर्भ में राजीव की अभिव्यक्ति बड़ी उचित थी। जब 1989 में वे दोनों दोबारा मिल थे तो राजीव बोले: ‘‘हम जब दोस्तों से मिलते हैं, तो दिल लहराता है, फड़फड़ाता है।‘‘ आम भारतीय की भी ऐसी ही यही भावना थी।

 

मगर भारतीय कम्युनिस्ट इस पर पीड़ित रहते थे। गोर्बाचेवने विश्व की कम्युनिस्ट पार्टियों को वित्तीय मदद देना बंद कर दिया था। सोवियत वजीफों पर पलने वाले यह कम्युनिस्ट उन्हें आततायी मानते थे। अपनी दिल्ली यात्रा पर गोर्बाचेवने भारत की दोनों कम्युनिस्ट पार्टियों (माकपा तथा भाकपा) के नेताओं से भेंट करने से इंकार कर दिया।  हालांकि नेहरू से अटल तक के दौर में परंपरागत तरीके से रूसी नेता दिल्ली से इन भारतीय कम्युनिस्ट भ्राताओं से मिलते थे।

 

आज (31 अगस्त 2022) गोर्बाचेवके दिवंगत होने से आम इंसान को लग रहा है कि एक महामानुष गुजर गया। चमन को वीरान कर गया। दास्तां कहते-कहते वह सो गया। हम सुनते रह गये। आज अपहरा्न वाराणसी से फोन आया था। वरिष्ठ पत्रकार दयानन्द का। वे काशी पत्रकार संघ के प्रधान सचिव रहे। पत्रकारिता के विद्यापीठ में प्रोफेसर हैं। जनसंचार में डाक्टरेट की। रूंधे कंठ से मास्को से प्राप्त बुरी खबर सुनायी। मैं फाकलैण्ड पर ब्रिटिश उपनिवेशवादी कब्जा पर लिख रहा था। विषय बदल दिया। गोर्बाचेवको मेरी विनम्र श्रद्धांजलि।

 

 

दुबई मैच: गगन पर नीला, जमीं पर सब्ज !! dubee maich: gagan par neela, jameen par sabj !!

 

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