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Famous Courtesans Of India: भारत की वो खास तवायफें, जिनका नाम आज भी बड़ी इज्ज़त से लिया जाता है…

Famous Courtesans Of India:

 

Famous Courtesans Of India: ऑनलाइन बुलेटिन डेस्क | तवायफ एक दौर में हर मौहल्ले की शान हुआ करती थी और उनके पास बड़े बड़े राजा और महाराज जाया करते थे और वहां पर रौनक लगाया करते थे. हम आपको भारत की उन चुनिंदा तवायफों से परिचित कराना चाहते हैं, , जब औरतों का पढ़ना-लिखना तो दूर घर से बाहर निकलना भी दुर्लभ होता था. लेकिन जिनका नाम इतिहास बड़े ही आदर के साथ लेता है. (Famous Courtesans Of India)

तहज़ीब की तो उन्हें पाठशाला समझा जाता था और बड़े-बड़े नवाबों, सरदारों के साहबज़ादों को तहज़ीब के गुर सीखने के लिए उनके पास भेजा जाता था. यह उस ज़माने की बातें हैं, जब औरतों का पढ़ना-लिखना तो दूर घर से बाहर निकलना भी दुर्लभ होता था. उस दौर में तवायफों की ज़िंदगी खुदमुख्तारी की मिसाल हुआ करती थी. (Famous Courtesans Of India)

तवायफ एक दौर में हर मौहल्ले की शान हुआ करती थी और उनके पास बड़े बड़े राजा और महाराज जाया करते थे और वहां पर रौनक लगाया करते थे. कभी तवायफों को बहुत सम्मान की नज़रों से देखा जाता था. शायरी, संगीत, नृत्य और गायन जैसी कलाओं में उनको महारत हासिल होती थी और एक कलाकार के तौर पर उनको बेहद इज्ज़त मिलती थी. (Famous Courtesans Of India)

आर्थिक रूप से भी वो काफी समृद्ध हुआ करती थीं. ऐतिहासिक दस्तावेज़ बताते हैं कि उन्नीसवीं सदी के अंत में लखनऊ की तवायफें राजकीय ख़ज़ाने में सबसे ज़्यादा टैक्स जमा किया करती थीं. यहां तक कि वे चाहें तो शादी करके घर भी बसा सकती थीं. (Famous Courtesans Of India)

ऐसे में आज हम आपको संगीत को एक समृद्ध विरासत सौंपने वाली कुछ चुनिंदा तवायफों पर नज़र डालते है जो उस दौर में अपने हुनर से हर किसी को अपना बना लेती थी. (Famous Courtesans Of India)

लखनऊ के चौक इलाके में एक तवायफ हुआ करती थीं दिलरुबा जान, जो बला की खूबसूरत थीं. उनके चाहने वाले लखनऊ से लेकर आसपास के शहरों तक फैले थे. साल 1920 में लखनऊ में नगर पालिका का चुनाव होना था, चुनाव प्रचार के लिए निकलतीं तो उनके पीछे सैकड़ों की भीड़ चलती. उनकी सभाओं में मनमानी भीड़ उमड़ने लगी.हालांकि जब उन्हें मात मिली तो उनके कोठे की रौनक चली गई. (Famous Courtesans Of India)

रसूलन बाई बनारस घराने की इस महान फनकार वो कलाकार हैं, जिनका ज़िक्र उस्ताद बिस्मिल्लाह ख़ान बेहद आदर से किया करते थे. उन्हें ईश्वरीय आवाज़ कहा करते थे.. आज़ादी के बाद बनारस में हिंदुओं का सांस्कृतिक बोध कुछ ज्यादा सबल हुआ. लोगों ने पहले तवायफों के मोहल्ले से गुज़रने से इनकार किया और जल्द ही तवायफों के वहां रहने पर ऐतराज़ उठाना शुरू कर दिया और आखिरी दिनों में इलाहाबाद के फुटपाथ पर कुछ–कुछ बेचा करती थीं(Famous Courtesans Of India)

ज़ोहरा बाई को भारतीय शास्त्रीय संगीत के पिलर्स में से एक माना जाता है. उनके संगीत का प्रभाव उनके बाद के फनकारों पर साफ़ देखा जा सकता है. तवायफों की गौरवशाली विरासत में उनका नाम गौहर जान के साथ बड़े ही आदर से लिया जाता है. . बड़े ग़ुलाम अली ख़ान भी ज़ोहराबाई का ज़िक्र बड़े ही भक्तिभाव से किया करते. रिकॉर्ड पर उनकी कोई 78 रचनाएं उपलब्ध हैं. 1994 में उनके 18 मशहूर गानों को ग्रामोफोन से ऑडियो टेप पर ट्रांसफर किया गया. 2003 में उसकी सीडी भी बनाई गई. ज़ोहराबाई की आवाज़ में ‘पिया को ढूंढन जाऊं सखी रे’आप सुन सकते हैं(Famous Courtesans Of India)

जद्दनबाई उन्नीसवीं सदी की शुरुआत में जद्दनबाई एक ऐसा नाम था, जिसका ज़िक्र संगीत के कदरदानों में बेहद अदब से लिया जाता था. बता दें ये मशहूर एक्ट्रेस नरगिस की मां थी. इतना ही नहीं उन्होने अपनी आवाज के दम पर भारतीय फिल्म इंडस्ट्री की पहली महिला संगीत निर्देशक बनी. 1935 में प्रदर्शित फिल्म ‘तलाश-ए-हक’ में उन्होंने संगीत भी दिया. इस फिल्म में कोठे पर फिल्माए गए कुछ गीतों में उन्होंने अभिनय भी किया. (Famous Courtesans Of India)

बेग़म हज़रत महल इन्हें ‘अवध की बेग़म’ भी कहा जाता था. इनका असली नाम मुहम्मदी ख़ानम था. पेशे से तवायफ़ हज़रत महल को खवासिन के तौर पर शाही हरम में शामिल किया गया. आगे चल के अवध के नवाब वाजिद अली शाह ने उनसे शादी कर ली. उसी के बाद उन्हें हज़रत महल नाम दिया गया. 1857 की क्रांति में अंग्रेजों के नाक में दम करने वालों की लिस्ट में बेग़म का नाम प्रमुखता से था. (Famous Courtesans Of India)

बनारस और कलकत्ते की मशहूर तवायफ गौहर जान ने रिकॉर्डिंग इंडस्ट्री में अपनी आवाज से हर किसी को अपना बना लिया था.गौहर जान 19वीं शताब्दी के शुरुआत की सबसे महंगी गायिका थीं, जो महफिलें सजाती थीं. उनके बारे में मशहूर था कि सोने की एक सौ एक गिन्नी लेने के बाद ही वह किसी महफिल में गाने के लिए हामी भरती थीं. (Famous Courtesans Of India)

पटना में एक तवायफ तन्नो बाई सजावट वाली एक इमारत में रहती थीं. उनकी आवाज का एक जादू एक वैष्णव मंदिर के पुजारी पर ऐसा चला कि हर जुबान पर उनके किस्से सालों साल बने रहे. दरअसल दोनों को एक दूसरे से इश्का था लेकिन उनका इंतकाल हो गया और तन्नो बाई आजीवन अकेली रह गई. (Famous Courtesans Of India)

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