India GDP Ranking: भारत को लगा बड़ा झटका! चौथी अर्थव्यवस्था बनने का सपना टूटा, ब्रिटेन ने फिर छोड़ा पीछे

रुपये की कमजोरी से भारत पांचवें से फिसलकर छठी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बना, ब्रिटेन और जापान निकले आगे

India GDP Ranking:

India GDP Ranking: भारत दुनिया की छठी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था क्यों बना

India GDP Ranking: रुपये की कमजोरी ने बिगाड़ा खेल! भारत पांचवें से फिसलकर छठी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बना

भारत की अर्थव्यवस्था को लेकर एक ऐसी खबर सामने आई है जिसने करोड़ों लोगों को चौंका दिया है। जिस भारत को दुनिया की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने का मजबूत दावेदार माना जा रहा था, वह अब वैश्विक रैंकिंग में पीछे खिसक गया है। इतना ही नहीं, ब्रिटेन ने फिर भारत को पीछे छोड़ दिया है, जबकि जापान भी भारत से आगे बना हुआ है।

ताजा आंकड़ों के मुताबिक, डॉलर के आधार पर भारत दुनिया की छठी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन गया है। यानी भारत, जो कुछ समय पहले ब्रिटेन को पछाड़कर पांचवें स्थान पर पहुंचा था, अब एक बार फिर पीछे चला गया है।

सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि ऐसा तब हुआ जब घरेलू स्तर पर भारत की अर्थव्यवस्था मजबूत रफ्तार से बढ़ रही है। ऐसे में सवाल उठ रहा है—अगर भारत की GDP बढ़ रही है, तो फिर रैंकिंग नीचे क्यों चली गई? क्या भारत का चौथी अर्थव्यवस्था बनने का सपना टूट गया?

आइए आसान भाषा में समझते हैं पूरा मामला

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भारत की अर्थव्यवस्था बढ़ी, फिर भी रैंकिंग क्यों गिरी?

भारत सरकार द्वारा जारी राष्ट्रीय आय के अनंतिम अनुमानों के अनुसार, वित्त वर्ष 2025-26 में भारत की अर्थव्यवस्था का आकार लगभग 346.36 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया है।

यह पहले जारी अनुमान 345.47 लाख करोड़ रुपये से थोड़ा ज्यादा है। यानी भारत की अर्थव्यवस्था में वास्तविक तौर पर वृद्धि हुई है।

इतना ही नहीं, वित्त वर्ष 2021 से 2026 के बीच भारत की GDP में 10.8 फीसदी की सालाना चक्रवृद्धि वृद्धि (CAGR) दर्ज की गई है।

यानी घरेलू स्तर पर भारत की आर्थिक तस्वीर मजबूत दिखाई देती है।

लेकिन असली झटका तब लगा जब इन आंकड़ों को डॉलर में बदला गया

यहीं से भारत की वैश्विक रैंकिंग बदल गई।

रुपये की कमजोरी ने कैसे बिगाड़ा पूरा गणित?

भारत की अर्थव्यवस्था आमतौर पर रुपये में मापी जाती है, लेकिन दुनिया की अर्थव्यवस्थाओं की तुलना अमेरिकी डॉलर में होती है।

यहीं सबसे बड़ा फर्क सामने आया।

विशेषज्ञों के मुताबिक, पिछले कई वर्षों से रुपया डॉलर के मुकाबले लगातार कमजोर हुआ है।

इसका मतलब यह है कि:

भले ही भारत की अर्थव्यवस्था रुपये में तेजी से बढ़ रही हो, लेकिन जब उसी GDP को डॉलर में बदला जाता है, तो उसका आकार अपेक्षाकृत छोटा दिखता है।

सरल भाषा में समझें:

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अगर आपकी सैलरी रुपये में बढ़े लेकिन डॉलर लगातार महंगा होता जाए, तो अंतरराष्ट्रीय तुलना में आपकी कमाई उतनी तेज नहीं बढ़ेगी।

भारत की अर्थव्यवस्था के साथ भी फिलहाल कुछ ऐसा ही हुआ है।

ब्रिटेन और जापान कैसे निकल गए आगे?

वित्त वर्ष 2025 में भारत ब्रिटेन को पीछे छोड़कर दुनिया की पांचवीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन गया था।

उस समय इसे भारत की बड़ी उपलब्धि माना गया था।

लेकिन वित्त वर्ष 2026 में तस्वीर बदल गई

ताजा अनुमानों के अनुसार:

भारत की GDP

करीब 3.92 लाख करोड़ डॉलर

ब्रिटेन की GDP

लगभग 4 लाख करोड़ डॉलर

जापान की GDP

करीब 4.43 लाख करोड़ डॉलर

यानी डॉलर के आधार पर भारत दोनों देशों से पीछे रह गया।

इसी वजह से भारत की रैंकिंग पांचवें से फिसलकर छठे स्थान पर पहुंच गई।

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क्या टूट गया चौथी बड़ी अर्थव्यवस्था बनने का सपना?

पिछले कुछ वर्षों से यह उम्मीद जताई जा रही थी कि भारत जल्द ही जापान को पीछे छोड़कर दुनिया की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन सकता है।

लेकिन ताजा आंकड़ों ने इस उम्मीद को फिलहाल झटका दिया है।

विशेषज्ञों का मानना है कि:

भारत की Growth मजबूत है, लेकिन अगर रुपया कमजोर होता रहा, तो वैश्विक रैंकिंग में तेजी से आगे बढ़ना मुश्किल हो सकता है।

हालांकि इसका मतलब यह बिल्कुल नहीं है कि भारत का सपना खत्म हो गया है।

बल्कि कहा जा रहा है कि यह सपना कुछ समय के लिए टल गया है

अगर:

  • रुपया स्थिर होता है
  • आर्थिक Growth मजबूत रहती है
  • निर्यात और निवेश बढ़ते हैं
  • डॉलर के मुकाबले मुद्रा पर दबाव कम होता है

तो भारत फिर तेजी से ऊपर आ सकता है।

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घरेलू अर्थव्यवस्था मजबूत होने के बावजूद चिंता क्यों?

कई लोग सोच सकते हैं कि अगर भारत की GDP बढ़ रही है, तो चिंता किस बात की?

असल में, वैश्विक रैंकिंग सिर्फ प्रतिष्ठा का सवाल नहीं होती।

इसका असर:

  • विदेशी निवेश
  • अंतरराष्ट्रीय प्रभाव
  • वैश्विक आर्थिक शक्ति
  • व्यापारिक भरोसा

पर भी पड़ता है।

हालांकि विशेषज्ञ यह भी कहते हैं कि सिर्फ डॉलर आधारित रैंकिंग से भारत की असली आर्थिक ताकत को पूरी तरह नहीं मापा जा सकता।

भारत की बड़ी आबादी, घरेलू बाजार, डिजिटल अर्थव्यवस्था और इंफ्रास्ट्रक्चर निवेश अब भी उसे दुनिया की सबसे तेज बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं में बनाए हुए हैं।

क्या आने वाले सालों में भारत फिर आगे निकल सकता है?

अर्थशास्त्रियों का मानना है कि भारत के पास अब भी बड़ा मौका है।

अगर भारत अगले कुछ वर्षों में:

  • 7%+ Growth बनाए रखता है
  • मैन्युफैक्चरिंग मजबूत होती है
  • विदेशी निवेश बढ़ता है
  • रुपये की कमजोरी नियंत्रित होती है

तो भारत फिर ब्रिटेन और जापान को चुनौती दे सकता है।

कई वैश्विक एजेंसियां अब भी मानती हैं कि लंबी अवधि में भारत दुनिया की टॉप अर्थव्यवस्थाओं में शामिल रहेगा।

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आम आदमी को इससे क्या फर्क पड़ेगा?

सीधे तौर पर इसका असर तुरंत नहीं दिखेगा, लेकिन लंबे समय में:

  • रुपये की कमजोरी से आयात महंगे हो सकते हैं
  • पेट्रोल-डीजल की कीमतों पर असर पड़ सकता है
  • विदेशी निवेश का रुख प्रभावित हो सकता है
  • महंगाई पर दबाव बढ़ सकता है

हालांकि घरेलू स्तर पर भारत की आर्थिक मजबूती अभी भी बनी हुई है।

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India GDP Ranking: निष्कर्ष

भारत की अर्थव्यवस्था मजबूत रफ्तार से बढ़ रही है, लेकिन रुपये की कमजोरी ने डॉलर आधारित वैश्विक रैंकिंग में बड़ा झटका दिया है। भारत अब दुनिया की छठी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन गया है और ब्रिटेन-जापान उससे आगे निकल गए हैं।

हालांकि चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने का सपना खत्म नहीं हुआ है, लेकिन फिलहाल यह सपना कुछ समय के लिए जरूर टलता नजर आ रहा है।

अब सबसे बड़ी चुनौती यही होगी कि भारत मजबूत Growth के साथ अपनी मुद्रा को भी स्थिर रख पाए।

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