Indian Culture Globalization Debate 2025? भूमंडलीकृत वैश्वीकरण में भारतीय संस्कृति और दलित विमर्श पर बोलेगा बीकानेर — श्याम निर्मोही का अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी में विशेष व्याख्यान
विषय: भूमंडलीकृत वैश्वीकरण के संदर्भ में भारतीय संस्कृति का बाजारीकरण और दलित विमर्श पर व्याख्यान देंगे – बीकानेर के युवा साहित्यकार श्याम निर्मोही
Indian Culture Globalization Debate 2025?
विषय: भूमंडलीकृत वैश्वीकरण के संदर्भ में भारतीय संस्कृति का बाजारीकरण और दलित विमर्श पर व्याख्यान देंगे – बीकानेर के युवा साहित्यकार श्याम निर्मोही
?️ सीकर में अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी – भारतीय संस्कृति पर होगा विमर्श
Indian Culture Globalization Debate 2025? राजस्थान के सीकर ज़िले के सांगलिया में स्थित बाबा खींवादास स्नातकोत्तर महाविद्यालय में 30 और 31 अक्टूबर को आयोजित होने जा रही ‘दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी एवं शिक्षा, साहित्य, शोध पुरस्कार’ कार्यक्रम में बीकानेर के युवा साहित्यकार और शिक्षाविद् श्याम निर्मोही अपने विचार प्रस्तुत करेंगे।
Indian Culture Globalization Debate 2025? इस संगोष्ठी का आयोजन मानविकी बहु-अनुशासनिक साहित्य शोध संस्थान, रावतसर (हनुमानगढ़), चिंतन प्रकाशन, कानपुर और बाबा खींवादास स्नातकोत्तर महाविद्यालय, सांगलिया (सीकर) के संयुक्त तत्वावधान में किया जा रहा है।
✍️ श्याम निर्मोही का व्याख्यान – भारतीय संस्कृति का बाजारीकरण और दलित विमर्श
Indian Culture Globalization Debate 2025? बीकानेर के प्रतिष्ठित युवा साहित्यकार श्याम निर्मोही इस संगोष्ठी में “भूमंडलीकृत वैश्वीकरण के संदर्भ में भारतीय संस्कृति का बाजारीकरण: बाजारवाद और दलित विमर्श” विषय पर अपना विशेष व्याख्यान देंगे।
Indian Culture Globalization Debate 2025? उनका यह व्याख्यान भारतीय समाज में बाजार आधारित उपभोक्तावादी प्रवृत्तियों और दलित चेतना के उभार के बीच के वैचारिक संबंधों पर केंद्रित होगा।
? विषय की प्रासंगिकता: भारतीय संस्कृति और बाजारवाद का टकराव
Indian Culture Globalization Debate 2025? भूमंडलीकरण के इस युग में जहाँ बाजार हर चीज़ को एक “उत्पाद” के रूप में प्रस्तुत करने लगा है, वहीं भारतीय संस्कृति की गहराई, दर्शन, और परंपरा को भी इसका प्रभाव झेलना पड़ा है।
श्याम निर्मोही का विचार है कि —
“भारतीय संस्कृति आत्मा का बाज़ार नहीं, बल्कि विचार और समरसता की संवेदना है।”
वे इस बात पर बल देते हैं कि जब संस्कृति बाज़ार की वस्तु बनती है, तो दलित, आदिवासी और वंचित समाज की अस्मिता पर सबसे पहले चोट पड़ती है।
? भूमंडलीकृत विश्व और भारतीय परंपरा का संघर्ष
भूमंडलीकृत वैश्विक व्यवस्था ने भारतीय समाज में उपभोक्तावाद और पूंजीवाद के प्रभाव को गहरा किया है।
विज्ञापन, मीडिया और सोशल प्लेटफ़ॉर्म्स ने भारतीय संस्कृति की गहराई को एक “ब्रांड” के रूप में प्रस्तुत किया है।
श्याम निर्मोही इस संदर्भ में अपने व्याख्यान में यह विमर्श करेंगे कि —
-
कैसे बाजार भारतीय मूल्यों को प्रभावित कर रहा है,
-
कैसे दलित साहित्य ने इन प्रभावों का प्रतिरोध किया है,
-
और क्यों भारतीय संस्कृति को पुनः मानवीय दृष्टिकोण से देखने की आवश्यकता है।
? दलित विमर्श: बाज़ारवाद के विरुद्ध एक वैचारिक आंदोलन
दलित साहित्य केवल समाज की पीड़ा का बयान नहीं, बल्कि यह बाज़ार और सत्ता दोनों के विरुद्ध एक सांस्कृतिक प्रतिरोध है।
श्याम निर्मोही अपने व्याख्यान में यह रेखांकित करेंगे कि —
“दलित विमर्श का उद्देश्य केवल समानता की मांग नहीं, बल्कि बाजार के द्वारा रची जा रही असमानताओं को चुनौती देना भी है।”
उनका मानना है कि भूमंडलीकृत अर्थव्यवस्था में जब सब कुछ बिक रहा हो — तो विचार, संवेदना और साहित्य को बिकने से बचाना ही असली चुनौती है।
? कार्यक्रम की विशेषताएं
-
? दिनांक: 30 और 31 अक्टूबर 2025
-
? स्थान: बाबा खींवादास स्नातकोत्तर महाविद्यालय, सांगलिया (सीकर)
-
? आयोजक संस्थान:
-
मानविकी बहु-अनुशासनिक साहित्य शोध संस्थान, रावतसर (हनुमानगढ़)
-
चिंतन प्रकाशन, कानपुर
-
बाबा खींवादास स्नातकोत्तर महाविद्यालय, सांगलिया
-
-
?️ मुख्य वक्ता: श्याम निर्मोही (बीकानेर)
-
? विशेष सहयोग: प्रकाश पुंज फाउंडेशन, बीकानेर
? श्याम निर्मोही का साहित्यिक योगदान
श्याम निर्मोही राजस्थान के उन चुनिंदा युवा साहित्यकारों में से हैं जिन्होंने दलित साहित्य, सामाजिक न्याय और शिक्षा के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य किया है।
वे “मानविकी बहु-अनुशासनिक साहित्य शोध संस्थान, रावतसर” की सलाहकार मंडल समिति के सक्रिय सदस्य भी हैं।
उनका लेखन भारतीय समाज के समकालीन प्रश्नों को वैचारिक रूप से परिभाषित करता है।
?️ प्रकाश पुंज फाउंडेशन, बीकानेर की भूमिका
Indian Culture Globalization Debate 2025? प्रकाश पुंज फाउंडेशन, बीकानेर के निदेशक डॉ. सुभाष प्रज्ञ ने जानकारी दी कि —
“श्याम निर्मोही का व्याख्यान भारतीय संस्कृति और दलित विचारधारा के नए आयामों को उजागर करेगा। यह भारत के समकालीन समाज में बाजार और मूल्य आधारित टकराव पर गहन विमर्श होगा।”
Indian Culture Globalization Debate 2025? फाउंडेशन ने श्याम निर्मोही को इस कार्यक्रम के लिए शुभकामनाएं दी हैं और उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की है।
?
संपर्क: 8005571948
? फाउंडेशन: प्रकाश पुंज फाउंडेशन, बीकानेर

JOIN ON WHATSAPP

#IndianCultureGlobalizationDebate2025 #IndianCulture #Globalization #DalitDiscourse #ShyamNirmohi #BikanerNews #SikarSeminar #PrakashPunjFoundation #LiteratureDebate #CulturalStudies #GlobalIndia #EducationConference #RajasthanNews #onlinebulletin












