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जूही की महक, कहानी – भाग एक joohee kee mahak, kahaanee – bhaag ek

©श्याम कुंवर भारती

परिचय- बोकारो, झारखंड


 

 

कड़ाके की ठंड और ऊपर से जमकर बारिश ने मौसम में काफी सिहरन पैदा कर दिया था। ऐसे सर्द और भीगे मौसम में ट्रेन हाफते कांपते उस छोटे से स्टेशन पर मुंह से भाप छोड़ते हुए रुकी। ट्रेन रुकते ही जूही ने अपनी कलाई घड़ी पर नजर डाली रात के साढ़े बारह बज चुके थे। उसने जल्दी से अपना सामान उठाया और बारिश में भीगते हुए अंदर प्लेटफार्म के सेड में पहुंच गई। लगभग आधा भीग चुकी थी। ऊपर से ठंड भी ज्यादा थी वो कांपने लगी थी।

 

जूही ने इधर उधर नजर दौड़ाई प्लेटफार्म पर बहुत कम लोग थे। उसे चिंता होने लगी थी उसे इस नई जगह का कोई अंदाजा नहीं था। उसकी नई बहाली हुई थी बीडीओ के पोस्ट पर उसे अपने निवास पर जाना मगर उसका मोबाइल भी बंद हो चुका था। पैसेंजर ट्रेन में मोबाइल चार्ज करने की कोई सुविधा भी थी ऊपर से बारिश की वजह से तीन चार घंटे लेट आई थी।

 

अभी भी बारिश रुकने का नाम नहीं ले रही थी। आखिर वो अपने निवास तक कैसे जायेगी। उसे लेने उसके ऑफिस की गाड़ी और ड्राइवर आने वाला था मगर मोबाइल बंद होने से किसी से कोई संपर्क नहीं हो पा रहा था। पता नहीं सब आए भी होंगे या नहीं।

 

उसे डर भी लग रहा था अब क्या करेगी। तभी उसकी नजर वहा एक छोटे से चाय के स्टाल पर नजर पड़ी। उसने सोचा ठंड तो लग रही है चलो चाय पीते हैं, कुछ तो राहत मिलेगी।

 

चाय स्टॉल पर पहुंची और उसने एक चाय मांगा। वहां दो चार और लोग चाय पी रहे थे। सब लोग चाय पीकर चले गए।

 

स्टाल पर दुकानदार और जूही रह गए। चाय वाला लगभग एक 25 साल का नौजवान लड़का था। देखने से पढ़ा लिखा और सभ्य लग रहा था। जूही को चाय पीकर काफी राहत महसूस हुई। उसने चाय पीते हुए उस लड़के से अपने निवास का पता बताते हुए पूछा – मुझे इस पते पर जाना है कैसे जा सकते हैं। मगर उसने अपना परिचय भी दिया।

 

उस लड़के ने जूही को ध्यान से देखते हुए कहा- मैडम अभी रात के एक बज रहे हैं। इस समय आपको कुछ भी नहीं मिलेगा। आज ट्रेन लेट आई है इसलिए मैं भी इतना देर रुका हुआ हूं, वर्ना मैं भी 8- 9 बजे अपनी दुकान बन्द कर अपने घर चला जाता हूं।

 

अब इसके बाद कोई ट्रेन नहीं आती है, इसलिए स्टेशन बिल्कुल खाली और सुनसान हो जाता है।

 

सुनकर जूही और चिंतित हो जाती है।

 

मगर एक उपाय है उस लड़के ने कहा, जहां आपको जाना है मुझे भी वही जाना है मेरे पास मोटर साइकिल भी है। अगर आप चाहे तो आपको मैं आपको आपके घर तक छोड़ सकता हूं। लेकिन पूरे पांच सौ रुपए लूंगा। क्योंकि यह भी मेरा धंधा है। ट्रेन लेट आने पर मैं अक्सर एक- दो यात्रियों को देर रात उनके घर तक पहुंचाने का काम करता हूं।

 

सुनकर जूही को थोड़ी राहत तो हुई मगर एक भय भी हुआ की एक जवान और अनजान लड़के के साथ मैं अकेले इतनी रात में कैसे चल सकती हूं।

 

जूही को सोचते देख इस लड़के ने कहा ज्यादा सोचिए मत मैडम मुझपर विश्वास करें। मुझे मेरा पांच सौ रुपया किराया दें और चलें। अब मैं अपनी दुकान बंद कर जैसे ही बारिश रुकेगी अपने घर चला जाऊंगा अगर कोई सवारी मिल गई तो मैं आपको फिर भी ले जा पाऊंगा।

 

तभी वहां स्टेशन मास्टर आते हैं, चाय पीने। चाय पिलाओ धीरज। मैं भी चाय पीकर अपने क्वार्टर जाऊंगा। धीरज ने उनको प्रणाम किया और जूही के बारे में बताया। स्टेशन मास्टर ने कहा देखो बेटी धीरज ठीक कह रहा है। तुम इसपर विश्वास कर सकती हो। इसकी यह भी रोजी रोटी है। और इसे एक चायवाला मत समझना, यह जल्दी ही पुलिस ऑफिसर बनने वाला है। अपने परिवार का सारा खर्च ये चाय बेचकर और सवारी ढोकर चलाता है। रात में तुम यहां अकेले नहीं रह सकती।

 

स्टेशन मास्टर की बात सुनकर जूही को थोड़ा विश्वास हुआ।

 

वो धीरज की मोटर साइकिल पर पीछे बैठ गई। अभी भी हल्की बूंदा बूंदी हो रही थी। चारों तरफ घुप अंधेरा था। सामने बाइक की हेड लाइट से उजाला हो रहा था।

 

दोनों अभी कुछ ही दूर गये होंगे कि सामने सड़क पर एक पेड़ गिरा हुआ था और रास्ता बंद हो गया था। धीरज ने अपनी बाइक रोक दिया। तभी 4- 5 लोगों ने दोनों पर हमला कर दिया। धीरज उन बदमाशों से उलझ गया। काफी देर तक सबमें मारपीट चली। जूही डर से घबड़ा गई थी। उसकी समझ में नहीं आ रहा था क्या करे। आखिरकार धीरज ने सबको मार भगाया, मगर इस दरम्यान उसे काफी चोट आ गई थी। हाथ और सिर जख्मी हो गाए थे जहां से खून भी बह रहा था।

 

अपने जख्मों की परवाह न करते हुए धीरज ने पेड़ की कुछ टहनियों को तोड़कर थोड़ा सा रास्ता बनाया और अपनी बाइक को ठेलकर पार कराया और फुर्ती से जूही को बैठाकर बाइक स्टार्ट कर वहां से भाग निकला।

 

रास्ते में उसने बताया आज पहली बार ऐसी घटना घटी है। मैं कल शुबह ही पुलिस थाने में इसकी रिपोर्ट करूंगा और मामले की जांच करवाऊंगा।

 

जूही को अब धीरज पर विश्वाश होने लगा था। उसने काफी मार भी खाई थी। उसे बचाया भी और उसके साथ कोई गलत हरकत भी नहीं किया।

 

जूही के पूछने पर धीरज ने बताया उसके घर में उसकी मां और एक छोटी बहन और एक छोटा भाई है। घर की जिम्मेवारी वही निभाता है। खुद पढ़ता भी है और अपने भाई बहन को भी पढ़ाता है। कुछ प्राइवेट ट्यूसन भी कर लेता है।

 

वो एक पुलिस ऑफिसर बनना चाहता है। उसकी भी तैयारी कर रहा है।

 

बातों बातों में कब दोनों शहर पहुंच गए पता ही नहीं चला। धीरज जूही को उसके बताए पता पर ले गया मगर वहां कोई नहीं था। बंगले में ताला बंद था। जूही बड़ी उदास हो गई।

 

धीरज ने कहा, मैडम अगर आपको एतराज न हो तो आज रात आप मेरे घर पर गुजार लें, कल मैं आपको फिर यहां पहुंचा दूंगा।

 

जूही ने बड़ी मुश्किल से हामी भर दिया। धीरज को अब काफी दर्द महसूस होने लगा था कई जगह से अभी भी खून बह रहा था।

 

जैसे ही धीरज अपने घर पहुंचा उसकी मां उसे देखते ही रोने लगी। उसके भाई बहन भी रोने लगे। वास्तव में धीरज ने काफी बहादुरी का काम किया था। जूही भी उसकी हालत देखकर चिंतित हो रही थी। सबने उसे बिछावन पर किसी तरह लिटाया। उसकी मां ने अपनी बेटी से पानी गर्म करने के कहा और अपने आंचल से धीरज का घाव पोछने लगी थी।

 

मगर किसी का ध्यान जूही पर नहीं गया। जूही भी धीरज के घावों को धोने में उसकी मां की मदद करने में जुट गई।

 

दूसरा भाग पढ़ें अगले अंक में ….

 

 

 

श्याम कुंवर भारती

Shyam Kunwar Bharti

 

Juhi Ki Mehak, Story – Part One

 

 

 

The bitter cold and heavy rain from above had created a lot of shiver in the weather. In such cold and wet weather, the train stopped at that small station trembling for half a year, exhaling steam from its mouth. As soon as the train stopped, Juhi looked at her wristwatch, it was twelve thirty in the night. She quickly picked up her belongings and, getting wet in the rain, reached the bed of the platform inside. It was almost half drenched. It was too cold from above, she started trembling.

 

Juhi looked around and there were very few people on the platform. He was starting to worry, he had no idea of ​​this new place. He was newly reinstated, he went to his residence on the post of BDO, but his mobile was also switched off. There was also any facility of mobile charging in the passenger train, due to rain from above, it was late for three to four hours.

 

Still the rain was not taking its name to stop. After all, how will she go to her residence? His office car and driver was about to come to pick him up, but no one could be contacted due to the mobile being switched off. I don’t know whether everyone would have come or not.

 

She was also scared what would she do now. Then his eyes fell on a small tea stall there. He thought that he is feeling cold, let’s drink tea, there will be some relief.

 

reached the tea stall and asked for a tea. There were two or four more people drinking tea. Everyone went away after drinking tea.

 

The shopkeeper and Juhi remained at the stall. The tea seller was a young boy of about 25 years. Looked well read and decent. Juhi felt relieved after drinking the tea. While drinking tea, he asked the boy telling the address of his residence – I want to go to this address, how can I go. But he also introduced himself.

 

The boy looked at Juhi carefully and said- Madam, it is now one o’clock in the night. You will get nothing at this time. Today the train is late, that’s why I too have stayed for so long, otherwise I too close my shop at 8-9 pm and go to my home.

 

Now after this no train arrives, so the station becomes completely empty and deserted.

 

Hearing this, Juhi gets worried.

 

But there is a solution, the boy said, where you have to go, I have to go the same way, I also have a motorcycle. If you want, I can drop you to your house. But I will take full five hundred rupees. Because this is also my business. When the train is late, I often do the work of transporting one or two passengers to their homes late at night.

 

Hearing this, Juhi was relieved, but there was also a fear that how could I walk alone in such a night with a young and unknown boy.

 

Seeing Juhi thinking, this boy said, don’t think too much, believe me madam. Give me my five hundred rupees rent and go. Now I will close my shop and go home as soon as the rain stops, if I get a ride, I will still be able to take you.

 

Just then the station master comes there, drinking tea. Drink tea patient. I too will go to my quarters after having tea. Dheeraj bows to him and tells about Juhi. The station master said look, daughter Dheeraj is right. You can believe this. This is also his livelihood. And don’t take it as a chaiwala, it is going to be a police officer soon. He runs all the expenses of his family by selling tea and carrying rides. You can’t stay here alone at night.

 

Juhi felt a little confident after listening to the station master.

 

She sat back on Dheeraj’s bike. It was still drizzling lightly. It was dark all around. The front light was getting illuminated by the head light of the bike.

 

Both must have gone a short distance away that a tree had fallen on the road in front and the road was closed. Dheeraj stopped his bike. Then 4-5 people attacked both of them. Dheeraj got entangled with those miscreants. For a long time everyone fought. Juhi was terrified. He did not understand what to do. Eventually Dheeraj shooed everyone away, but in the meantime he was badly hurt. Hands and head were injured from where blood was also flowing.

 

Not caring about his injuries, Dheeraj broke some branches of the tree and made a little way and got his bike crossed and hurriedly made Juhi sit and started the bike and ran away from there.

 

On the way, he told that today such an incident has happened for the first time. I will report it to the police station early tomorrow and get the matter investigated.

 

Juhi was now beginning to believe in Dheeraj. He had also killed a lot. He saved her and did not do any wrong thing with her.

 

When asked by Juhi, Dheeraj told that he has a mother and a younger sister and a younger brother in his house. He takes care of the household. He studies himself and also teaches his siblings. Some private tuition also does.

 

He wants to become a police officer. He is preparing for that too.

 

It was not known when both of them reached the city in talks. Dheeraj took Juhi to the address given to her but there was no one there. The bungalow was locked. Juhi gets very sad.

 

Dheeraj said, madam, if you do not mind, then you spend the night at my house, tomorrow I will bring you here again.

 

Juhi readily agreed. Dheeraj was now feeling a lot of pain and blood was still bleeding from many places.

 

As soon as Dheeraj reached his home, his mother started crying on seeing him. His siblings also started crying. In fact, Dheeraj had done a great job of bravery. Juhi too was getting worried seeing her condition. Everyone made him lie on the bed somehow. Her mother asked her daughter to heat the water and started wiping Dheeraj’s wound with her lap.

 

But no one noticed Juhi. Juhi too gets involved in helping her mother wash Dheeraj’s wounds.

 

Read the second part in the next issue….

 

 

 

कुरान और अन्य इस्लामी पुस्तकों में शिक्षाओंं पर किसी का कॉपीराइट नहीं : कोर्ट kuraan aur any islaamee pustakon mein shikshaonn par kisee ka kopeerait nahin : kort

 

 

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