Supreme Court on stray dogs- ‘चिकन-मटन खाने वाले…’ तुषार मेहता की दलील पर सिब्बल का पलटवार- तो कुत्ते कहां जाएंगे? SC में हुई तीखी बहस

सुप्रीम कोर्ट में आवारा कुत्तों पर क्या बहस हुई (What was the debate on stray dogs in the Supreme Court?)

Supreme Court on stray dogs-

सुप्रीम कोर्ट में आवारा कुत्तों पर क्या बहस हुई (What was the debate on stray dogs in the Supreme Court?)

 

मुख्य बिंदु:

  • आवारा कुत्तों को हटाने के आदेश पर रोक की मांग पर सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रखा।

  • SG तुषार मेहता ने कहा- “चिकन-मटन खाने वाले आज एनिमल लवर बन गए हैं”, बच्चों की मौत का दिया हवाला।

  • कपिल सिब्बल ने पूछा- कुत्तों के लिए शेल्टर होम नहीं हैं, उन्हें कहां रखा जाएगा?

  • सुप्रीम कोर्ट ने कहा- संसद कानून बनाती है, पर उनका पालन नहीं होता; सभी पक्षों से मांगी जिम्मेदारी।

Supreme Court on stray dogs- नई दिल्ली: आवारा कुत्तों के मुद्दे पर देश भर में छिड़ी बहस अब देश की सर्वोच्च अदालत के गलियारों में गूंज रही है। दिल्ली-एनसीआर से आवारा कुत्तों को हटाने के आदेश पर रोक लगाने की मांग वाली याचिका पर गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट में देश के दो दिग्गज वकीलों, सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता और वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल के बीच जोरदार और तीखी बहस देखने को मिली। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद जस्टिस विक्रम नाथ की अध्यक्षता वाली तीन जजों की बेंच ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है।

Supreme Court on stray dogs- सुनवाई के दौरान अदालत का माहौल तब गरमा गया जब सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने पशु प्रेमियों पर एक तीखी टिप्पणी कर दी।

‘चिकन-मटन खाने वाले बने एनिमल लवर’ – तुषार मेहता

Supreme Court on stray dogs- सरकार का पक्ष रखते हुए एसजी तुषार मेहता ने कहा कि समाज में दो तरह के लोग हैं- एक वो जो इस मुद्दे पर सिर्फ बोलते हैं और दूसरे वो जो असल में इससे पीड़ित हैं। उन्होंने कहा, “एक ‘तेज आवाज वाली अल्पसंख्यक’ आबादी आवारा कुत्तों के पक्ष में बोल रही है, जबकि ‘पीड़ित बहुसंख्यक आबादी’ चुपचाप गंभीर नुकसान झेल रही है, जिसमें बच्चे भी शामिल हैं।”

Supreme Court on stray dogs- ‘चिकन-मटन खाने वाले…’ तुषार मेहता की दलील पर सिब्बल का पलटवार- तो कुत्ते कहां जाएंगे? SC में हुई तीखी बहस

उन्होंने सबसे बड़ी और विवादास्पद टिप्पणी करते हुए कहा, “चिकन-मटन खाने वाले आज एनिमल लवर बन गए हैं।” उन्होंने कहा कि जो लोग मांसाहार के वीडियो शेयर करते हैं, वे आज पशु प्रेम की दुहाई दे रहे हैं।

मेहता ने आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि भारत में हर साल लगभग 37 लाख कुत्तों के काटने के मामले आते हैं और 305 मौतें रेबीज से होती हैं। उन्होंने जोर देकर कहा, “आवारा कुत्ते छोटे बच्चों को अपना शिकार बना रहे हैं, बच्चे मर रहे हैं। नसबंदी और टीकाकरण से न तो रेबीज रुकता है और न ही बच्चों पर हमले।”

तो कुत्ते कहां जाएंगे? – कपिल सिब्बल का पलटवार

पशु प्रेमियों की ओर से पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने तुषार मेहता की दलीलों का जोरदार विरोध किया। उन्होंने सीधा सवाल किया कि अगर कुत्तों को हटाया जाता है तो वे कहां जाएंगे? सिब्बल ने कहा, “मसला कुत्तों को हटाने का है, लेकिन उनके लिए शेल्टर होम नहीं हैं। कुत्तों को पकड़ने की कार्रवाई शुरू हो चुकी है। जहां कुछ शेल्टर हैं भी, वहां जगह की कमी के कारण वे और खतरनाक हो जाएंगे।” उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के पुराने आदेश पर तत्काल रोक लगाने की मांग की और कहा कि बधियाकरण ही एक उपाय है, लेकिन उसे ठीक से लागू किया जाना चाहिए।

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सुप्रीम कोर्ट की अहम टिप्पणी

Supreme Court on stray dogs- दोनों पक्षों की तीखी बहस के बाद सुप्रीम कोर्ट ने एक अहम टिप्पणी की। जस्टिस नाथ ने कहा, “संसद नियम और कानून बनाती है, लेकिन उनका पालन नहीं होता। एक तरफ इंसान पीड़ित हैं और दूसरी तरफ पशु प्रेमी यहां खड़े हैं। थोड़ी जिम्मेदारी लीजिए।” कोर्ट ने मामले में हस्तक्षेप करने वाले सभी याचिकाकर्ताओं को हलफनामा दाखिल कर सबूत पेश करने का निर्देश दिया और अंतरिम राहत की मांग पर अपना आदेश सुरक्षित रख लिया।

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