अपना हित साधता। वह
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तृष्णा | ऑनलाइन बुलेटिन
©हिमांशु पाठक, पहाड़ परिचय– नैनीताल, उत्तराखंड. आदमी की तृष्णा का, अंत कहाँ है साहब! बस दौड़ता चला जाता,…
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