क्योंकि नारी महान होती है। मन ही मन में रोती फिर भी बाहर से हंसती है बार-बार बिखरे बालों को संवारती है शादी होते ही उसका सब कुछ पीछे छूट जाता है सखी – सहेली
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नारी होती है महान | ऑनलाइन बुलेटिन
©सुरेन्द्र आदिवासी परिचय– अजमेर, राजस्थान क्योंकि नारी महान होती है। मन ही मन में रोती फिर भी बाहर…
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