तेरी उठती जवानी पर ये पागल चोट खाया है। मेरे दिल का आंगन था वर्षों से बिलकुल सूना
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आशिकी | ऑनलाइन बुलेटिन
©रामकेश एम यादव परिचय- मुंबई. तेरी परछाईं को मैंने सीने से लगाया है, गुलाब की पंखुडियों से…
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