भले दूर से सही आज ख्वाबों मैं मुझे सताया है। हो अजीज कितनी कहने के लिए अल्फाज़ नहीं
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आशिकी | ऑनलाइन बुलेटिन
©रामकेश एम यादव परिचय- मुंबई. तेरी परछाईं को मैंने सीने से लगाया है, गुलाब की पंखुडियों से…
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