8वें वेतन आयोग में पेंशन का होगा बड़ा इजाफा? ₹20,000 से ₹50,000 तक ऐसे बदल सकती है Pension

नई दिल्ली
8वें केंद्रीय वेतन आयोग का गठन 3 नवंबर 2025 को किया गया था। आयोग के पास अपनी सिफारिशें सौंपने के लिए 18 महीने का समय है। इस बीच करीब 33.76 लाख केंद्रीय पेंशनभोगियों के बीच यह सवाल सबसे अहम बना हुआ है कि 8वें वेतन आयोग के लागू होने पर उनकी पेंशन में कितनी बढ़ोतरी होगी।फिलहाल, 7वें वेतन आयोग के तहत न्यूनतम बेसिक पेंशन ₹9,000 प्रति माह है। लेकिन कर्मचारी संगठनों और पेंशनर्स यूनियनों ने 8वें वेतन आयोग के तहत इसमें कई गुना बढ़ोतरी की मांग रखी है।
NC-JCM ने रखी है 3.83 फिटमेंट फैक्टर की डिमांड
पेंशन में होने वाली वास्तविक बढ़ोतरी पूरी तरह से फिटमेंट फैक्टर पर निर्भर करेगी। नेशनल काउंसिल-जेसीएम (NC-JCM) की स्टाफ साइड ने सरकार के समक्ष 3.83 फिटमेंट फैक्टर लागू करने की मांग रखी है। अगर सरकार इस मांग को मान लेती है, तो पेंशन की गणना का फॉर्मूला बेहद आसान हो जाएगा:
अनुमानित नई बेसिक पेंशन = मौजूदा बेसिक पेंशन × 3.83
फिटमेंट फैक्टर 3.83 के आधार पर संभावित पेंशन
अगर 3.83 के फिटमेंट फैक्टर की मांग को स्वीकार किया जाता है, तो अलग-अलग बेसिक पेंशन पाने वाले पेंशनभोगियों की नई बेसिक पेंशन का अनुमानित कैलकुलेशन इस प्रकार होगा:
फिटमेंट फैक्टर 3.83 के आधार पर संभावित पेंशन
न्यूनतम पेंशन ₹45,000 करने की मांग
भारत पेंशनर्स समाज (BPS) जैसे प्रमुख संगठनों ने पेंशनभोगियों के लिए ये प्रमुख मांगें उठाई हैं:
न्यूनतम पेंशन: न्यूनतम बेसिक पेंशन को ₹9,000 से बढ़ाकर ₹45,000 किया जाए।
महंगाई राहत (DR) का विलय: जैसे ही महंगाई राहत (DR) 25% के पार जाए, उसे बेसिक पेंशन में मिला दिया जाए।
तिमाही संशोधन: महंगाई राहत की समीक्षा हर 3 महीने में की जाए।
पेंशन में 5 साल में बदलाव की मांग
पेंशनर्स संगठन ने केवल एक बार पेंशन बढ़ाने की मांग नहीं की है. उसने पेंशन और वेतन की समीक्षा के लिए 5 साल का चक्र रखने की मांग भी की है।
यानी लंबे अंतराल के बाद होने वाली Pay Commission प्रक्रिया के बजाय हर पांच साल में पेंशन की समीक्षा हो. इससे महंगाई और जीवन-यापन की बढ़ती लागत के हिसाब से पेंशन में बदलाव किया जा सकेगा।
DA और DR में भी बदलाव की मांग
BPS ने Dearness Allowance और Dearness Relief को लेकर भी बदलाव का प्रस्ताव रखा है।
संगठन चाहता है कि DA/DR की समीक्षा हर तिमाही की जाए. इसके लिए तीन महीने के औसत को आधार बनाने की मांग की गई है।
साथ ही DR के 25% से ऊपर पहुंचने के बाद उसे बेसिक पेंशन के साथ मर्ज करने का प्रस्ताव भी रखा गया है।
पेंशनर्स के लिए मेडिकल सुविधा बढ़ाने की मांग
पेंशनर्स की जरूरतों में स्वास्थ्य खर्च सबसे अहम मुद्दों में से एक है. इसलिए BPS ने CGHS को मजबूत करने की मांग की है।
संगठन ने पेंशनर्स के लिए कैशलेस हेल्थकेयर सुविधा और ₹5,000 का Fixed Medical Allowance देने की मांग रखी है।
ग्रामीण और ऐसे इलाकों में रहने वाले पेंशनर्स के लिए बेहतर स्वास्थ्य सुरक्षा की भी मांग की गई है जहां CGHS की सुविधा उपलब्ध नहीं है।
कम्यूटेड पेंशन को लेकर भी बड़ी मांग
BPS ने Commuted Pension की बहाली को लेकर भी प्रस्ताव रखा है।
मांग है कि रिटायरमेंट के समय कम्यूट की गई पेंशन की राशि को 11 साल बाद या 71 साल की उम्र में, जो पहले हो, बहाल किया जाए. यह प्रस्ताव 60 साल की उम्र में रिटायर होने वाले कर्मचारियों के संदर्भ में रखा गया है।
65 साल से अतिरिक्त पेंशन की मांग
पेंशनर्स समाज ने उम्र बढ़ने के साथ अतिरिक्त पेंशन देने का प्रस्ताव भी रखा है।
संगठन की मांग है कि 65 साल की उम्र से Additional Pension शुरू हो और इसके बाद हर पांच साल के अंतराल पर इसमें बढ़ोतरी की जाए।
1 जनवरी 2026 से मिले संशोधित लाभ
BPS ने 8वें Pay Commission से संशोधित वेतन, पेंशन और भत्तों को 1 जनवरी 2026 से लागू करने की मांग भी की है।
यह मांग इसलिए अहम है क्योंकि 8वें CPC का गठन हो चुका है और आयोग फिलहाल विभिन्न पक्षों से सुझाव और मांगें ले रहा है. आयोग की आधिकारिक वेबसाइट पर भी अलग-अलग संगठनों के साथ बैठकों और राज्यों के दौरे की जानकारी जारी की जा रही है।
पेंशनर्स की मांगों में सिर्फ पेंशन नहीं
BPS ने HRA और LTC जैसे लाभों को पेंशनर्स तक बढ़ाने की मांग भी की है. इसके अलावा Central Autonomous और Statutory Bodies के पात्र पेंशनर्स तक 8वें CPC के लाभों को समान रूप से पहुंचाने का प्रस्ताव है. BSNL पेंशनर्स से जुड़े पेंशन-पैरिटी और हेल्थकेयर के मुद्दे भी मांगों में शामिल हैं।
8th CPC के लिए क्यों अहम है ये मांग?
8वां Pay Commission केवल कर्मचारियों की सैलरी तय करने तक सीमित नहीं है. इसके दायरे में पेंशन से जुड़े मुद्दे भी हैं. सरकार ने संसद में भी स्पष्ट किया है कि आयोग वेतन, भत्ते और पेंशन से जुड़े मामलों पर सिफारिशें करेगा।
आयोग अभी अलग-अलग हितधारकों से बातचीत और डेटा जुटाने की प्रक्रिया में है. आधिकारिक वेबसाइट के मुताबिक आयोग का गठन नवंबर 2025 में हुआ था और अगस्त-सितंबर 2026 में भी राज्यों में बातचीत और दौरे निर्धारित हैं।
इसलिए पेंशनर्स संगठनों की मांगें आने वाले महीनों में चर्चा का बड़ा हिस्सा बन सकती हैं।
सबसे जरूरी बात
₹45,000 न्यूनतम पेंशन, 67% Last Basic Pay पर पेंशन और 50% Family Pension अभी प्रस्ताव हैं. इन्हें 8वें Pay Commission का अंतिम फैसला नहीं माना जाना चाहिए।
आयोग अलग-अलग संगठनों की मांगों, सरकारी वित्तीय स्थिति, महंगाई, कर्मचारियों-पेंशनर्स की जरूरतों और अन्य आर्थिक पहलुओं को देखते हुए अपनी सिफारिशें देगा. अंतिम फैसला सरकार द्वारा सिफारिशों पर कार्रवाई के बाद ही होगा।
क्या 7वें वेतन आयोग की तरह मिलेगा फिटमेंट फैक्टर?
7वें वेतन आयोग के समय सरकार ने 2.57 का फिटमेंट फैक्टर मंजूर किया था, जिससे न्यूनतम बेसिक सैलरी ₹7,000 से बढ़कर ₹18,000 और न्यूनतम पेंशन ₹9,000 हो गई थी। 8वें वेतन आयोग के लिए अभी तक आधिकारिक फिटमेंट फैक्टर की घोषणा नहीं हुई है, क्योंकि आयोग अभी अपनी रिपोर्ट तैयार कर रहा है।
महंगाई राहत का क्या होगा?
पेंशनधारक ध्यान रखें कि नए वेतन आयोग के लागू होने पर वर्तमान में मिल रही महंगाई राहत (DR) को सीधे नई बेसिक पेंशन में नहीं जोड़ा जाता। जब भी नया वेतन आयोग लागू होता है, मौजूदा DR को शून्य कर दिया जाता है और उसे नई बेसिक पेंशन के ढांचे में समाहित कर लिया जाता है।
कब साफ होगी अंतिम तस्वीर?
आयोग 3 मई 2027 तक अपनी सिफारिशें सरकार को सौंपेगा। इसके बाद केंद्रीय मंत्रिमंडल इन सिफारिशों की समीक्षा करेगा और अंतिम फैसला लेगा। तभी पेंशनभोगियों को उनकी सटीक और संशोधित पेंशन की जानकारी मिल सकेगी।










