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Bharat Jodo Yatra से पूरा होगा ‘कांग्रेस जोड़ो’ का मकसद, क्या मिलेगी संजीवनी | ऑनलाइन बुलेटिन

नई दिल्ली | [नेशनल बुलेटिन] | देश की राजनीति में कभी सबसे ताकतवर पार्टी रही और सबसे ज्यादा सत्ता पर काबिज रह चुकी कांग्रेस पार्टी इस वक्त भारी अंतर्कलह और बिखराव से जूझ रही है। Bharat Jodo Yatra: पार्टी न तो स्थायी अध्यक्ष पद पर किसी नाम पर फैसला ले पा रही है और न ही पार्टी के पुराने वफादार नेताओं को जाने से रोक पा रही है। ऐसे में 2024 लोकसभा चुनाव भी नजदीक है।

 

इस आपाधापी और अपने अस्तित्व की लड़ाई लड़ रही कांग्रेस पार्टी ने राहुल गांधी के नेतृत्व में भारत जोड़ो यात्रा की शुरुआत कर दी है। पांच महीनों तक की इस यात्रा में कांग्रेस नेता 12 राज्यों का भ्रमण करते हुए कन्याकुमारी से कश्मीर तक की यात्रा करेंगे।

 

कांग्रेस की इस यात्रा का मकसद सिर्फ भाजपा को चुनौती देना नहीं खुद का अस्तित्व बचाना भी है। इस यात्रा से क्या कांग्रेस जोड़ो मकसद पूरा हो पाएगा? पार्टी के असंतुष्ट खेमे की नाराजगी दूर हो पाएगी? इसके अलावा विपक्षी दलों में खुद को साबित करने की चुनौती भी है।

 

कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने आज तमिलनाडु के कन्याकुमारी में श्रीपेरुंबदूर इलाके से भारत जोड़ो यात्रा की शुरुआत की। यह स्थान पार्टी के लिए इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि इसी स्थान पर देश के पूर्व पीएम और राहुल गांधी के पिता राजीव गांधी की हत्या हुई थी। कांग्रेस पार्टी के वरिष्ठ नेता पी चिदंबरम ने इस यात्रा को दूसरा स्वतंत्रता संग्राम करार दिया है।

 

पार्टी चीफ सोनिया गांधी ने भी इस यात्रा को ऐतिहासिक बताया और उम्मीद जताई कि 3,500 किलोमीटर की पैदल यात्रा पार्टी को फिर से जीवंत करने में मदद करेगी। कांग्रेस की यह यात्रा करीब 150 दिन तक चलेगी और 12 राज्यों का भ्रमण करते हुए कश्मीर पर समाप्त होगी। इस दौरान राहुल गांधी समेत कांग्रेसी नेता पैदल ही इस यात्रा को पूरा करेंगे।

 

 दूर होगी असंतुष्ट खेमे की नाराजगी?

 

पिछले कुछ महीनों में, G-23 के कई नेताओं ने कांग्रेस पार्टी में संगठनात्मक बदलाव की मांग की है और कांग्रेस पार्टी की बिगड़ती स्थिति और इसकी स्थितियों में सुधार करने पर अपनी राय व्यक्त की है। अगस्त 2020 में सोनिया गांधी को लिखे एक पत्र में, इस खेमे ने पार्टी चलाने के तरीके में महत्वपूर्ण बदलाव की मांग की थी। मांग का क्या हुआ? इसका अंदाजा इसी बात से लगता है कि तब से गुलाम नबी आजाद, कपिल सिब्बल समेत कई दिग्गज कांग्रेसी पार्टी से राहें जुदा कर चुके हैं। ऐसे में कांग्रेस पार्टी की यह भारत जोड़ो यात्रा क्या रंग लाती है यह देखने वाली बात होगी।

 

पूरा होगा कांग्रेस जोड़ो मकसद?

 

कांग्रेस के लिए यह यात्रा अपने कुनबे को जोड़ने और टूट से रोकने के लिए काफी अहम है। जी-23 के प्रमुख नेता आनंद शर्मा ने भारत जोड़ी यात्रा के लिए समर्थन दिखाया है। उन्होंने ट्वीट किया, “भारत जोड़ी यात्रा भारत के समावेशी लोकतंत्र को बनाए रखने, अन्याय, असमानता और असहिष्णुता के खिलाफ लोगों को लामबंद करने का एक मिशन है। साथ ही राष्ट्रीय एकता को मजबूत करने की प्रतिबद्धता भी है।”

 

आनंद शर्मा के अलावा राज बब्बर और मुकुल वासनिक भी कांग्रेस की इस यात्रा को अपना समर्थन दे चुके हैं। जी-23 ग्रुप मेंबर्स का भारत जोड़ो यात्रा को अपना समर्थन देना पार्टी के लिए अच्छा संकेत है। हालांकि देखने वाली बात होगी क्या आने वाले दिनों में भी यह बरकरार रहता है?

 

विपक्षी नेता के तौर पर पहचान बनाने की कोशिश में राहुल गांधी

 

दूसरी ओर साल 2024 इलेक्शन के लिए विपक्षी दलों में सबसे बड़ी समस्या है नेता का चुनाव करना। नीतीश कुमार दिल्ली आकर विपक्षी नेताओं को एकजुट करके अपनी दावेदारी लगातार पेश कर रहे हैं। उधर, अरविंद केजरीवाल, ममता बनर्जी और तेलंगाना सीएम केसीआर भी इस मामले में खुद को पीछे मानने को तैयार नहीं है। ऐसे में क्या राहुल गांधी भारत जोड़ो यात्रा से विपक्षी खेमे में खुद को बड़ा साबित कर पाएंगे? ये उनके और कांग्रेस पार्टी के लिए सबसे बड़ी चुनौती है।

 

पार्टी अध्यक्ष पर क्यों नहीं है फोकस

 

राहुल गांधी कांग्रेस पार्टी के अध्यक्ष के तौर खुद को किनारा कर रहे हैं। कांग्रेस पार्टी के नेताओं के तमाम मान-मनौव्वल के बावजूद वे अपनी ना पर अडिग हैं। राहुल गांधी ने अपना फोकस फिलहाल भारत जोड़ो यात्रा पर किया है। पार्टी के सूत्रों का कहना है कि राहुल गांधी कांग्रेस के बिखराव और कुनबे को संरक्षित करने की कोशिश कर रहे हैं।

 

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