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45 साल के लंबे इंतजार के बावजूद जमीन का मुआवजा न मिलने पर नाराज शख्स ने उड़ा दी रेल लाइन; आतंकियों पर था शक, ऐसे पकड़े गए आरोपी | ऑनलाइन बुलेटिन

जयपुर | [राजस्थान बुलेटिन] | साल 1974- 75 व 1980 में आरोपी के परिवार की 70 बीघा जमीन रेलवे लाइन और हिंदुस्तान जिंक के लिए अवाप्त की गई थी। उदयपुर- अहमदाबाद नई रेलवे लाइन पर ओढ़ा ब्रिज पर ब्लास्ट करने वाले मुख्य अरोपी ने अपने भतीजों को साथ लेकर इस काम को अंजाम इसलिए दिया क्योंकि उसकी जमीन अवाप्ति के 45 साल बाद न तो उसे मुआवजा मिला और न ही नौकरी

 

आरोपियों ने पटरी के दोनों ओर 40-40 डेटोनेटर को जिलेटिन व यूज वायर से बांध और दो बम लगाकर आग लगाई थी। वारदात के बाद तीनों आरोपी घर जाकर सो गए। धमाके बाद वे पुलिस की गतिविधियों पर नजर रखते रहे। पुलिस ने आरोपियों की गिरफ्तारी के बाद यह कहानी सुनाई है।

 

एसओजी एटीएस के एडीजी अशोक राठौड़ के मुताबिक मुख्य आरोपी जावर माइंस थाना क्षेत्र में एकलिंगपुरा निवासी धूलचंद मीणा (32) ने अपने भतीजे प्रकाश मीणा (18) व एक अपचारी के साथ मिलकर इस काम को अंजाम तक पहुंचाया।

 

ट्रेन गुजरने के बाद लगाया बम

 

पुलिस के मुताबिक, इलाके में ब्लास्ट सामग्री बेचने वाले व्यापारी अंकुश सुवालका को हिरासत में लिया गया है। यह विस्फोटक सामग्री अवैध रूप से बेच रहा था। पुलिस उससे पूछताछ कर रही है। आरोपियों ने पूछताछ में बताया कि ट्रेन गुजरने के बाद तीनों ब्रिज पर पहुंचे। प्रकाश बाइक स्टार्ट करके खड़ा रहा। धूलचंद नाबालिग को साथ लेकर रेलवे लाइन पर पहुंचा, विस्फोट सामग्री लगाकर आग लगा दी। फिर बाइक के जरिये तीनों वहां से भाग निकले।

 

सुनवाई नहीं हुई तो विस्फोट 

 

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पुलिस के मुताबिक साल 1974-75 व 1980 में धूलचंद मीणा के परिवार की जमीन रेलवे और हिंदुस्तान जिंक ने अवाप्त की थी। इसके एवज में परिवार को न तो मुआवजा मिला और न ही नौकरी दी गई। कई सालों से वह रेलवे का चक्कर लगा रहा था। मदद नहीं मिलने के कारण ही उसने साजिश रची।

 

ऐसे पकड़े गए आरोपी

 

एसओजी के एडीजी ने बताया कि उदयपुर पुलिस अधीक्षक और उनकी टीम लगातार आरोपियों की पहचान कर पकड़ने में जुटी थी। पुलिस का शुरू से ही इस बात पर फोकस था कि आखिर रेलवे लाइन से किस को नुकसान हो रहा है या कौन इससे प्रभावित है?

 

लोगों से पूछताछ में सामने आया कि कुछ लोग जमीन अवाप्ति का मुआवजा व नौकरी नहीं मिलने से नाराज चल रहे हैं और वो रेलवे के चक्कर लगा रहे हैं। मुखबिर से पुलिस को धूलचंद के बारे में सूचना मिली।

 

धूलचंद को पकड़कर पूछताछ की गई तो उसने पूरी कहानी बयां कर दी। आरोपी धूलचंद मीणा ने 25 रुपए की दर से 80 डेटोनेटर खरीदा था। आसपास माइंस क्षेत्र होने से इलाके में आसानी से विस्फोटक सामग्री मिल जाती है।

 

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