बुध्द….

Buddha:
©संजय वासनिक, वासु
परिचय- चेंबुर, मुंबई.
हे बुद्ध , हे अर्हंत
जिसका कोई शत्रु नही
शत्रु मानव या प्राणी नही
मानव के मन के शत्रु
काम, क्रोध, लोभ,
मोह, मत्सर और अहंकार
इन सब पर तुम्हारा विजय ही
नहीं पाया बल्की तुमने
मानव कल्याण का,
निब्बाण का,
दुख निवारण का
मार्ग बताया (Buddha)
मानव कल्याण हेतु केवल
तिन बातें पालन करने कही
शील, करुणा और प्रज्ञा
पाचं शील, दानशिलता
दयावानता के साथ
जागरूकता का पाठ पढ़ाया(Buddha)
चोरी , हत्या, काम, मिथ्या वचन
नशा तथा अभोज्य से
दुर रहना ही कल्याण का
मार्ग बताया
जिस पर तुम खुद तो
चले ही और सबको
चलने के लिये कहा
जो तुम्हारे मार्ग पर चला
उसका जीवन सुखकर हुआ(Buddha)
साधारण मानव के लिये
गृहस्थ जिवन का मुलमंत्र
केवल पाँच नियम ही बताया
भिक्षुक को आठ नियम का
पालन करने की दी हिदायत
तुम तो स्वयं तीस कठोर नियम
जिदंगी भर पालते रहे
कठोरता से पालन करते रहे
तभी तो तुम अर्हंत पद पर
पहुँच पाये और महा परिनिर्वाण
निब्बाण को प्राप्त कर सके,(Buddha)
तुमने कभी नहीं कहा तुम
ईश्वर हो बल्की ईश्वर की
कल्पना को ललकारा
क्योंकि तुम भगवान हो
भगवान वो होता है
जिसने सभी आंतरिक
शत्रुओंपर विजय पायी है(Buddha)
अतः मेरी यही प्रार्थना है
तुमसे मेरी मनोकामना है
सभी मानव जाती के प्राणी
तुम्हारे बताये मार्ग पर चले
मानव का मानव के साथ
मानव जैसा व्यवहार हो
सबका कल्याण हो!
सबका मंगल हो!(Buddha)
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