दीप बनके जलना….

©गायकवाड विलास

परिचय- मिलिंद महाविद्यालय, लातूर, महाराष्ट्र


 

प्रेमभाव परिणीति,

मिले जीवन में गति

वही खुशियां अपार

चलते जीवन में ।

 

कर्म ही सच्ची साधना,

दुख सभी का हरना

फल की आशाएं छोड़,

बदले संसार में ।

 

चारों ओर है बाधाएं,

गमगीन है दिशाएं

दीप बनके जलना,

स्वार्थ भरें जग में ।

 

नीतियां हो चन्दन सी,

देखें दुनिया है प्यासी

यही है जीवन सार ,

बुद्ध के विचारों में ।

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