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गुजरात का राठवाँ नृत्य ने राष्ट्रीय आदिवासी महोत्सव व राज्योत्सव में मोहा लोगों का मन | ऑनलाइन बुलेटिन डॉट इन

रायपुर | [धर्मेंद्र गायकवाड़] | राष्ट्रीय आदिवासी नृत्य महोत्सव राष्ट्रीय आदिवासी नृत्य महोत्सव में पुरुष और महिला कलाकारों द्वारा पिरामिड बनाकर नृत्य प्रस्तुत किया गया। यह नृत्य छत्तीसगढ़ में बहुधा किए जाने वाला पंधी नृत्य के समान है। जो लोगों को अपनी ओर आकर्षित करता रहा। नृत्य में कलाकारों द्वारा मनमोहक दृश्य भी प्रस्तुत किया गया।।

 

राठवाँ आदिवासियों की एक जनजाति है जो मूल रूप से गुजरात के उदयपुर जिले में रहती है। इस जनजाति का एक खास लोक नृत्य है, जिसे ‘राठवां नृत्य’ के नाम से जाना जाता है।

 

कभी अपने क्षेत्र विशेष में सिमटा इनका यह डांस कुछ वर्षों से समूचे देश में विभिन्न कार्यक्रमों के जरिए विशेष पहचान बना चुका है।

एक बार इस लोकनृत्य को देखने वाला इस कला का मुरीद हो जाता है। यहाँ इनकी आकर्षक प्रस्तुति दी गयी।

 

दिवासी बाहुल्य राज्य छत्तीसगढ़ में आयोजित हो रहे राष्ट्रीय आदिवासी नृत्य महोत्सव का आज तीसरा व अंतिम दिन है। www.onlinebulletin.in अपने पाठकों के लिए नृत्य के कुछ अंश प्रस्तुत करेगा। कोशिश रहेगी कि हमारी टीम नृत्य की झलकियां आप तक हू-ब-हू पहुंचा सकें। हमसे जुड़ने के लिए आप फेसबुक पर online bulletin dot in सर्च करें और ट्विटर यूजर्स @onlinebulletin1 सर्च कर लाइक व फॉलों करें।

 

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