Parivartan Sanstha Bharat Dholpur National Convention-✊✊ धौलपुर से गूँजी परिवर्तन की दहाड़! चौ. विनोद अम्बेडकर ने स्वार्थी नेताओं की खोली पोल, बताया समाज की बर्बादी का असली कारण!
Ch Vinod Ambedkar speech on Ambedkarite ideology and cadre building Dholpur

Parivartan Sanstha Bharat Dholpur National Convention-✊✊
Ch Vinod Ambedkar speech on Ambedkarite ideology and cadre building Dholpur-
Parivartan Sanstha Bharat Dholpur National Convention-✊✊
Parivartan Sanstha Bharat Dholpur National Convention-✊✊ धौलपुर, राजस्थान: राजस्थान की ऐतिहासिक धरती धौलपुर में उस समय वैचारिक क्रांति का सैलाब उमड़ पड़ा, जब गाँधी आईटीआई कॉलेज ग्राउंड में ‘परिवर्तन संस्था भारत’ द्वारा आयोजित आठवां राष्ट्रीय अधिवेशन संपन्न हुआ। इस अधिवेशन ने न केवल राजस्थान बल्कि पूरे देश के सामाजिक और राजनीतिक गलियारों में हलचल पैदा कर दी है। अधिवेशन की अध्यक्षता केंद्रीय अध्यक्ष वेदवीर सिंह आदिवासी जी ने की, जबकि मंच का कुशल संचालन राजस्थान प्रदेश अध्यक्ष दिलीप कुमार जी द्वारा किया गया।
Parivartan Sanstha Bharat Dholpur National Convention-✊✊ लेकिन इस पूरे कार्यक्रम का केंद्र बिंदु रहे संस्था प्रमुख चौ0 विनोद अम्बेडकर जी। उन्होंने अपने प्रखर और धारदार संबोधन में समाज की उन कमजोरियों को उजागर किया, जिन्हें अक्सर दबा दिया जाता है। उन्होंने समाज के सुनहरी भविष्य के लिए जो ‘गुरुमंत्र’ दिया, वह आज के युवाओं के लिए किसी मार्गदर्शिका से कम नहीं है।

स्वार्थी नेतृत्व और विचारधारा का घालमेल: समाज की सबसे बड़ी त्रासदी
Parivartan Sanstha Bharat Dholpur National Convention-✊✊ अधिवेशन को संबोधित करते हुए चौ0 विनोद अम्बेडकर ने सीधे उन लोगों पर प्रहार किया जो समाज के नाम पर अपनी रोटियां सेंक रहे हैं। उन्होंने कहा, “आज समाज में समस्याओं का अंबार है, लेकिन सबसे बड़ी समस्या बाहर नहीं, हमारे भीतर है। आज विचारधारा का भयंकर घालमेल हो चुका है।”
उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि आज गली-कूचों, ढाणियों और शहरों में ‘स्वार्थी नेताओं’ और ‘अक्षम नेतृत्व’ की भरमार है। ऐसे लोग कैडरहीन संगठन बनाकर समाज को गुमराह कर रहे हैं। विनोद अम्बेडकर जी के शब्दों में— “इन लोगों को खुद नहीं पता कि करना क्या है? क्यों करना है? कैसे करना है? और किसके लिए करना है? सबसे विडंबना की बात तो यह है कि इन्हें यह भी नहीं पता कि समाज का असली दोस्त कौन है और दुश्मन कौन?”
बुद्ध के दर्शन से समाधान की राह: दुख है तो निवारण भी है
निराशा के बादलों के बीच उम्मीद की किरण दिखाते हुए संस्था प्रमुख ने भगवान बुद्ध के दर्शन का सहारा लिया। उन्होंने कहा कि दुनिया में ऐसी कोई समस्या नहीं है जिसका समाधान न हो। उन्होंने बुद्ध के ‘चार आर्य सत्य’ का उल्लेख करते हुए कहा— “दुनिया में दुख है, दुख का कारण है, और यदि कारण मिल जाए तो निवारण भी संभव है।”
उन्होंने स्पष्ट किया कि अब जब हमने समाज की मुख्य समस्या (नेतृत्व की कमी और विचारधारा का भ्रम) को पहचान लिया है, तो इसका समाधान निश्चित है।
मिशन 2025: कैडर आधारित सांगठनिक शक्ति का निर्माण
चौ0 विनोद अम्बेडकर ने समाज के उत्थान का रोडमैप पेश करते हुए कहा कि समस्याओं का हल केवल और केवल बाबा साहेब डॉ. बी.आर. अम्बेडकर की विचारधारा पर आधारित ‘कैडर-बेस्ड सांगठनिक शक्ति’ के निर्माण से ही संभव है।
उन्होंने आह्वान किया कि हमें समाज के बीच से साफ-सुथरी छवि वाले, शिक्षित, समर्पित और निष्ठावान युवाओं को चुनना होगा। उन्हें वैचारिक रूप से ‘ट्रेन’ (शिक्षित) करके समाज के अंतिम व्यक्ति तक भेजना होगा। ये युवा धैर्यपूर्वक संगठन की विचारधारा और नेतृत्व की बातों को जन-जन तक पहुँचाएंगे, जिससे एक मजबूत और अटूट सामाजिक शक्ति खड़ी होगी।
दिग्गजों का जमावड़ा: देशभर से जुटे परिवर्तनकारी
इस आठवें राष्ट्रीय अधिवेशन में केवल राजस्थान ही नहीं, बल्कि देश के विभिन्न राज्यों से सामाजिक योद्धा शामिल हुए। कार्यक्रम की गरिमा बढ़ाने वाले प्रमुख नामों में शामिल थे:
सूरज डागर, अजय विश्वास, सरदार जसविंद्र सिंह, संजीव सारवान, अजय भीम, ई0राकेश कुमार, वेदप्रकाश कन्नौजिया, भारती नरवाल, बुलबुल घेंघट, नेमीचंद डागौर, संदीप डागर, लखन डागोर, कमल करोसिया, पवन, विशाल चौधरी, राजा, सुनील डागौर, अमन छीतर, SI विनोद डागौर, विक्की जादौन, विष्णु थनवाल, अनूप, रमेश साहू, बृजेश लाहौरीया, आजाद खरे, एड. चंद्रशेखर, कुलदीप, मनोज वर्मा, मेघराज मीणा।
इन सभी वक्ताओं ने एक सुर में स्वीकार किया कि समाज को अब खोखले नारों की नहीं, बल्कि जमीनी स्तर पर ठोस वैचारिक काम की जरूरत है। Parivartan Sanstha Bharat Dholpur National Convention-✊✊

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निष्कर्ष: क्या धौलपुर अधिवेशन बनेगा मील का पत्थर? Parivartan Sanstha Bharat Dholpur National Convention-✊✊
धौलपुर का यह अधिवेशन केवल एक सभा नहीं, बल्कि एक वैचारिक शंखनाद था। परिवर्तन संस्था भारत ने यह स्पष्ट कर दिया है कि वह भविष्य में ‘भीड़’ नहीं, बल्कि ‘कैडर’ तैयार करने पर ध्यान देगी। चौ. विनोद अम्बेडकर का यह संबोधन आने वाले समय में बहुजन समाज की दिशा और दशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
अगर समाज के युवा इस ‘गुरुमंत्र’ को समझ लेते हैं, तो वह दिन दूर नहीं जब विचारधारा का घालमेल खत्म होगा और एक सशक्त नेतृत्व का उदय होगा।












