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हेकड़ी तजे पाकिस्तान ! इल्तिजा करनी पड़ेगी !! hekadee taje paakistaan ! iltija karanee padegee !!

के. विक्रम राव

©के. विक्रम राव, नई दिल्ली

-लेखक इंडियन फेडरेशन ऑफ वर्किंग जर्नलिस्ट (IFWJ) के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं।


 

  कैसा अड़ियलपना है ? विडंबना है ? बाढ़-पीड़ित लाहौर के रमजान बाजार में टमाटर छह सौ रूपये और आलू पांच सौ रूपये किलो बिक रहा है। सिर्फ तीस किलोमीटर दूर वागा-अटारी सीमा (भारत) पर मात्र पचास और चालीस रूपये किलो इनके दाम हैं। अब तक सैलाब से पाकिस्तान को दस अरब डालर की हानि हो चुकी है। एक अमेरिकी डालर बराबर सवा दो सौ पाकिस्तानी रूपये है। दो हजार लोगों के प्राण चले गये। चार सौ बच्चे तथा पौने दो लाख मवेशी भी। इसी बीच नरेन्द्र मोदी ने ट्वीट किया कि पड़ोसी की इस आपदा से वे आहत हैं। इस फ्लैश से लाहौर में ईद का महौल सर्जा कि मोदी मदद भेजेंगे। मगर मुस्लिम लीग (नवाज) के प्रधानमंत्री मियां मोहम्मद शाहबाज शरीफ ने ऐलान कर डाला कि पारम्परिक मसले अभी अनसुलझे है। मसलन कश्मीर ! अतः निलंबित व्यापारिक रिश्ते सुधरे नहीं जा सकते!! कूटनीतिक संबंध तो दूर की कौड़ी है। मतलब ?

 

याद आया। उन दिनों बेगम बेनजीर भुट्टो प्रधानमंत्री थीं। उनकी मांग पर राजीव गांधी ने आलू निर्यात करने का आदेश दिया था। तब टीवी पर विपक्ष के नेता नवाज शरीफ ने व्यंग किया था: ‘‘मोहतरमा हम पाकिस्तानियों को हिन्दुस्तानी आलू खिलायेंगी ?‘‘ उनका व्यंग आज उनके अनुज वजीरे आजम शाहबाज ने मुहावरे में दोहराया। इतनी नफरत ? सब्जी में भी मजहब ? मगर इस इस्लामी जम्हूरियत में सभी लोग ऐसे कड़वे और कट्टर नहीं हैं। वित्त मंत्री (वजीरे खजाना) मियां मिफ्ताह इस्माइल ने तो पिछले पांच अगस्त को आगाह कर दिया था कि ‘‘नकदी संकट से जूझ रहे देश के लिए आने वाले दिन ‘बुरे’ रहने वाले हैं।‘‘ उन्होंने कहा कि: ‘‘सरकार अगले तीन महीने के लिए आयात पर नियंत्रण जारी रखेगी। पिछले जून माह में पाकिस्तान का दिवाला निकालने से बचाने के लिये, इस इस्लामी राष्ट्र के गृह और योजना मंत्री अहसान इकबाल चौधरी ने (15 जून 2022) एक अपील जारी की थी कि: ‘‘केवल दो कप चाय ही पियें। इससे अरबों डालर की चाय पत्ती आयात से बचेंगे।‘‘ इस पर आम पाकिस्तानी बगावत की मुद्रा में आ गया था। हालांकि पाकिस्तानी मुस्लिम लीग (नवाज) के इस प्रधान सचिव का मजाक उड़ा। चाय तो आम आदमी का प्रिय पेय है। यदि उससे भी वह महरुम कर दिया गया तो खूनी इन्कलाब का खतरा होगा।

 

वित्त मंत्री का आकंलन है कि प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ की सरकार पूर्ववर्ती इमरान (तालिबानी) खान सरकार की आर्थिक नीतियों का खामियाजा भुगत रही है।‘‘ जियो टीवी पर मियां मिफ्ताह इस्माइल ने बताया: ‘‘पाकिस्तान मुस्लिम लीग-नवाज (पीएमएल-एन) सरकार के कार्यकाल में देश का बजट घाटा 1,600 अरब डॉलर था।‘‘

 

इन्हीं वित्त मंत्री ने गत सप्ताह अनुरोध किया है कि पड़ोसी भारतीय पंजाब से अनाज और सागभाजी का आयात किया जाये ताकि घातक महंगाई को रोका जा सके। तीन करोड़ नागरिक संकटग्रस्त हैं। बीस लाख एकड़ के हरे खेत डूब गये। सेनापति जनरल कमर जावेद बाजवा ने बताया कि 160 में से 72 जिले जलप्लवित है। उन सबके पुनर्वास में सालों लग जायेंगे।

 

मगर इस विकराल मानवी त्रासदी पर भारत का एक प्रभावी और ओजस्वी तबका है जो बाढ राहत की मदद देने का विरोधी है। उसका मानना है कि पाकिस्तान से आतंकी सरगना को भारत के सुपुर्द करने और स्थायी रूप से भारतीय सीमा के अतिक्रमण को खत्म करने के बाद ही, बाढ़ राहत देने पर अड़ा है। इस वर्ग ने लश्करे तैयबा, जैशे मोहम्मद को अवैध कराना, धारा 370 के खात्मे को स्वीकारने, इस्लामी देश में हिन्दुओं अल्पसंख्यकों के पूजास्थलों की हिफाजत, मुम्बई होटल बम विस्फोट, माफिया दाउद इब्राहीम, मसूद अजहर जैसे वान्टेड अपराधियों को लौटाना आदि मांगों को उठाया हैं। उनका आग्रह है कि जब तक पाकिस्तान शत्रुतापूर्वक हरकतें बंद नहीं करता, उसे लेशमात्र सहायता भी नहीं दी जानी चाहिये। यह वर्ग स्मरण कराता है कि 2010 के भीषण बाढ़ के बाद कांग्रेसी प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने पैंतीस अरब रूपये इस्लामी जम्हूरिया को दिये थे, तो नतीजा क्या हुआ ? पुलवामा में भारतीय सशस्त्र सिपाहियों की हत्या कर दी गयी। प्रतिकार में मोदी ने बालाकोट पर 2019 में बम गिराकर हिसाब चुकता किया।

 

कई हिन्दुस्तानी सवाल करते है कि क्या मिला नरेन्द्र मोदी (25 दिसम्बर 2019) को जब वे अकस्मात काबुल से दिल्ली लौटते समय लाहौर में पहली दफा उतरे और प्रधानमंत्री मियां मो. नवाज शरीफ की पोती (मेहरून्नीसा) की शादी में शिरकत की। बेगम कुलसुम नवाज से मिले। उनकी 90-वर्षीया माताश्री बेगम शमीम अख्तर के चरण स्पर्श कर आशीर्वाद लिया था।

 

कई भारतीय राष्ट्रवादियों की दृढ़ धारणा है कि जितना भी दूध पिलाओ सांप उसी हथेली को डसता ही है। अतः अब हल नरेन्द्र मोदी की उदारता पर निर्भर है। क्योंकि सनातन धर्म में परोपकाराय सतां विभूतया का सिद्धांत है। मोदी सनातन धर्म का ही अवलंबन करते हैं।

 

 

 

 

Hunky fresh Pakistan! Gotta guess!!

 

 

के. विक्रम राव

©K. Vikram Rao, New Delhi

The author is the National President of the Indian Federation of Working Journalists (IFWJ).


 

What kind of obstinacy? Is it a surprise? In the flood-hit Lahore’s Ramzan market, tomatoes are being sold for six hundred rupees and potatoes for five hundred rupees per kg. Their price is only fifty and forty rupees per kg on the Vaga-Attari border (India), only thirty kilometers away. So far, Pakistan has suffered a loss of ten billion dollars due to the inundation. One US dollar is equal to two hundred and fifty Pakistani rupees. Two thousand people lost their lives. Four hundred children and two and a half lakh cattle too. Meanwhile, Narendra Modi tweeted that he is hurt by this neighbour’s calamity. With this flash, the atmosphere of Eid in Lahore will be created that Modi will send help. But Muslim League (Nawaz) Prime Minister Mian Mohammad Shahbaz Sharif declared that the traditional issues were still unresolved. For example, Kashmir So the suspended business relationship cannot be repaired!! Diplomatic relations are far-fetched. Meaning ?

 

remembered. In those days Begum Benazir Bhutto was the Prime Minister. On their demand, Rajiv Gandhi ordered to export potatoes. Then the Leader of the Opposition on TV, Nawaz Sharif had satire: “Mohtarma we will feed Hindustani potatoes to Pakistanis?” His satire was repeated in the phrase today by his cousin Wazire Azam Shahbaz. Such hatred ? Religion in vegetables too? But not all people in this Islamic community are bitter and fanatical. Finance Minister (Wazire Treasury) Mian Miftah Ismail had warned last August that “the days ahead are going to be ‘bad’ for the cash-strapped country.” The import control will continue for three months. Last June, to save Pakistan from going bankrupt, the Islamic nation’s Minister of Interior and Planning, Ahsan Iqbal Chaudhry (15 June 2022) issued an appeal that: “Drink only two cups of tea. This will avoid imports of tea leaves worth billions of dollars. Although this principal secretary of Pakistani Muslim League (Nawaz) was ridiculed. Tea is the favorite drink of common man. If he is denied even that, then there will be danger of bloody revolution.

 

The Finance Minister’s assessment is that the government of Prime Minister Shahbaz Sharif is bearing the brunt of the economic policies of the previous Imran (Taliban) Khan government.” Mian Miftah Ismail on Geo TV reported: “Pakistan Muslim League-Nawaz (PML-N)”. The country’s budget deficit was $1,600 billion during the government’s tenure.

 

The same Finance Minister has requested last week that food grains and vegetables should be imported from neighboring Indian Punjab so that the deadly inflation can be stopped. Three crore citizens are in distress. Twenty lakh acres of green fields were submerged. General Qamar Javed Bajwa told that 72 out of 160 districts are inundated. It will take years to rehabilitate them all.

 

But there is an influential and dynamic section of India on this terrible human tragedy, which is opposed to providing help for flood relief. It believes that it is adamant on providing flood relief only after handing over the terrorist leader from Pakistan to India and permanently eliminating the encroachments on the Indian border. This class has raised the demands of Lashkar-e-Taiba, illegalization of Jaish Mohammad, acceptance of the abolition of Article 370, protection of places of worship of Hindu minorities in Islamic country, Mumbai hotel bombings, return of wanted criminals like Mafia Dawood Ibrahim, Masood Azhar etc. . He insists that till Pakistan does not stop its hostile activities, it should not be given even the slightest assistance. This section reminds that after the horrific floods of 2010, Congress Prime Minister Manmohan Singh gave thirty five billion rupees to Islamic Jamhuria, so what was the result? Indian armed soldiers were killed in Pulwama. In retaliation, Modi settled the account by dropping a bomb on Balakot in 2019.

 

Many Indians question what happened to Narendra Modi (25 December 2019) when he accidentally landed in Lahore for the first time while returning from Kabul to Delhi and Prime Minister Mian Mohd. Attended the wedding of Nawaz Sharif’s granddaughter (Mehroonisa). Begum Kulsoom met Nawaz. He took blessings by touching the feet of his 90-year-old mother Shri Begum Shamim Akhtar.

 

Many Indian nationalists have a firm belief that the snake bites the same palm as much milk as you give it. So the solution now rests on the generosity of Narendra Modi. Because in Sanatan Dharma, benevolence is the principle of Satan Vibhutaya. Modi follows Sanatan Dharma only.

 

 

जूही कुछ कहती इससे पहले सुधीर उसकी बांह पकड़ खींचता हुआ बाहर निकल गया, जूही बोलते रह गई तुम क्या मेरा अपहरण कर रहे हो सुधीर… पढ़ें कहानी जूही की महक कर भाग-14 joohee kuchh kahatee isase pahale sudheer usakee baanh pakad kheenchata hua baahar nikal gaya, joohee bolate rah gaee tum kya mera apaharan kar rahe ho sudheer… padhen kahaanee joohee kee mahak kar bhaag-14

 

 

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