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स्तनपान से हटता ध्यान, कैसे हो अमृत का पान ? stanapaan se hatata dhyaan, kaise ho amrt ka paan ?

प्रियंका सौरभ

©प्रियंका सौरभ

परिचय– हिसार, हरियाणा.


 

 

बदलते दौर में नई और आधुनिक माताओं में स्तनपान की बहुत सी भ्रांतियां है। आधुनिकता के दौर में माताएं नवजात बच्चों को अपना दूध पिलाने से परहेज कर रहीं हैं।  इस कारण बच्चे न केवल कमजोर हो रहे हैं, बल्कि उनमें रोग प्रतिरोधक क्षमता भी कम हो रही है। आहार की बात होती है तो पौष्टिक और संपूर्ण आहार केवल और केवल मां का दूध होता है। जिसे अमृत का भी नाम दिया गया है। अगर बच्चा अपनी मां का दूध आहार के रूप में लेता है तो वह स्वस्थ ,बलवान ,तीव्र बुद्धि का और उसकी प्रतिरोधक क्षमता अपने आप बढ़ जाती है।

 

1 से 7 अगस्त तक विश्व स्तनपान सप्ताह मनाया गया। इस वर्ष ‘स्टेप अप फॉर ब्रेस्टफीडिंग: एजुकेट एंड सपोर्ट’, सरकारों, समुदायों और व्यक्तियों को शामिल कर स्तनपान के संरक्षण, संवर्धन और समर्थन पर ध्यान केंद्रित किया गया। सरकारों, स्वास्थ्य प्रणालियों, कार्यस्थलों और समुदायों सहित महामारी के बाद की दुनिया में परिवारों के लिए स्तनपान के अनुकूल वातावरण प्रदान करने और बनाए रखने की उनकी क्षमता को मजबूत करने के लिए सूचित, शिक्षित और सशक्त बनाने पर जोर दिया गया।

 

स्तनपान, महामारी के बाद की सतत विकास रणनीतियों की कुंजी है, क्योंकि यह पोषण में सुधार करता है, खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करता है और देशों के बीच और भीतर असमानताओं को कम करता है। विश्व स्तनपान सप्ताह के उद्देश्य हैं, माता-पिता में स्तनपान के प्रति जागरूकता पैदा करना, माता-पिता को स्तनपान अपनाने के लिए प्रोत्साहित करना और पर्याप्त और उचित पूरक आहार के महत्व के बारे में जागरूकता पैदा करना।

 

स्तनपान महत्वपूर्ण है क्योंकि यह माताओं और बच्चों के लिए समान रूप से बेहतर स्वास्थ्य को बढ़ावा देता है। यह प्रारंभिक शैशवावस्था में दस्त और तीव्र श्वसन संक्रमण जैसे संक्रमणों को रोकता है और इस प्रकार शिशु मृत्यु दर को कम करता है। यह माताओं के स्तन कैंसर, डिम्बग्रंथि के कैंसर, टाइप 2 मधुमेह और हृदय रोग के विकास के जोखिम को कम करता है। यह शिशुओं को मोटापे से संबंधित बीमारियों, मधुमेह से बचाता है और आईक्यू को बढ़ाता है।

 

शिशु और छोटे बच्चे के आहार के सही मानदंड देखे तो जन्म के एक घंटे के भीतर स्तनपान की शुरुआत बेहद आवश्यक है। जीवन के पहले छह महीनों के लिए विशेष स्तनपान यानी केवल मां का दूध अन्य दूध, भोजन, पेय या पानी ‘नहीं’। स्तनपान जारी रखते हुए छह महीने की उम्र से उचित और पर्याप्त पूरक आहारके साथ दो साल या उससे अधिक की उम्र तक लगातार स्तनपान बच्चों के पोषण ममें अहम भूमिका रखते है।

 

मगर बदलते दौर में नई और आधुनिक माताओं में स्तनपान की बहुत सी भ्रांतियां है। आधुनिकता के दौर में माताएं नवजात बच्चों को अपना दूध पिलाने से परहेज कर रहीं हैं। सर्वे रिपोर्ट के मुताबिक देश में एक वर्ष तक के 79 फीसद बच्चों को शुरुआती दौर में ही बोतल से दूध पिलाया जाता है। इस कारण बच्चे न केवल कमजोर हो रहे हैं, बल्कि उनमें रोग प्रतिरोधक क्षमता भी कम हो रही है।

 

आहार की बात होती है तो पौष्टिक और संपूर्ण आहार केवल और केवल मां का दूध होता है । जिसे अमृत का भी नाम दिया गया है । अगर बच्चा अपनी मां का दूध आहार के रूप में लेता है तो वह स्वस्थ ,बलवान,तीव्र बुद्धि का और उसकी प्रतिरोधक क्षमता अपने आप बढ़ जाती है।

 

बच्चे की बौद्धिक क्षमता जिन बच्चों ने लंबे समय तक मां का दूध पिया होता है उनमें ज्यादा होती है । अगर हम पुराने समय में देखें तो जो हमारे पूर्वज पूर्वज थे जिन्होंने अपनी मां का स्तनपान किया था। वह ज्यादा बलिष्ठ और कुशाग्र बुद्धि की होते थे। आज आधुनिक परिवेश के चलते अपनी फिगर मेंटेन करने के लिए अनेक महिलाएं अपने बच्चे को दूध पिलाने से परहेज करती हैं।

 

आधुनिक माँ तीन दिन भी अपने नवजात बच्चे को दूध नही पिलाती और तर्क देती है कि स्तन खोलकर बच्चे को दूध पिलाने से बैकवर्ड फीलिंग होता है। फीगर बिगड जाती है वो खुद को देहाती माँ कहलाना नही चाहती। दरअसल इस का एक बडा कारण ये भी है कि आज शहरों में जो माताएं प्राकृतिक रूप से बच्चा जनना पसंद नही करती वो उस माँ बनने के अहसास को जीवन भर महसूस नही कर पाती।

 

उस पीडा उस दर्द को महसूस ही नही करती जो माँ और बच्चे के बीच में प्यार का रिश्ता बनाता है। बच्चे को दूध पिलाना अति आवश्यक है। यह आपके फिगर को खराब नहीं करता है बल्कि उल्टे ही आपको स्वस्थ और सुडौल बनाता है।

 

कई कारण हैं कि एक माँ अपने बच्चे को बोतल से दूध पिलाने का विकल्प चुनती है। उन्हें इस बात की चिंता हो सकती है कि वे जो भोजन और दवाएँ खाते हैं, वे उनके दूध के माध्यम से उनके बच्चों तक पहुँच सकते हैं। जिन महिलाओं को चिंता है कि उनके धूम्रपान या कॉफी की आदतों से उनके प्राकृतिक दूध में निकोटीन और कैफीन की मात्रा कम हो सकती है, वे बेबी फॉर्मूला को एक सुरक्षित विकल्प के रूप में देखती हैं।

 

स्तनपान अलग-अलग महिलाओं को अलग तरह से प्रभावित करता है। कुछ माताओं को लगता है कि यह उन्हें बहुत असहज और पीड़ादायक महसूस कराता है, और बोतल से दूध पिलाना उन्हें एक सुविधाजनक और दर्द रहित विकल्प प्रदान करता है। अन्य परिवार या नौकरी के दबाव के कारण अन्य लोग स्तनपान नहीं कराना चुनते हैं।

 

आधुनिक समाज को यह सुनिश्चित करने के लिए अपनी प्रथाओं को बदलने की जरूरत है कि ये दबाव स्तनपान में इतना हस्तक्षेप न करें कि महिलाओं को स्तनपान रोकने के लिए मजबूर किया जाता है जब वे नहीं चाहतीं। कारण यह है कि स्तनपान की दर लड़खड़ा रही है, इसका उतना ही सहायकों से लेना-देना है जितना कि मानव दूध के विकल्प बनाने वाले फॉर्मूला और दवा कंपनियों के साथ है।

 

अत्यधिक औद्योगीकृत विकसित देशों में, ब्रेस्टमिल्क या फॉर्मूला के पंपों और बोतलों के व्यापक उपयोग ने स्तनपान को सटीक रूप से परिभाषित करना भी मुश्किल बना दिया है। महिलाओं पर काम के लिए, बाहर घूमने आदि के लिए पंप करने का दबाव होता है। पंपिंग दूध की आपूर्ति को नुकसान पहुंचा सकती है। इससे होने वाली कठिनाइयों के कारण समय से पहले दूध निकलना पड़ सकता है। यह अक्सर बढ़ी हुई पूरकता और जल्दी दूध छुड़ाने की ओर ले जाता है।

 

इससे भी बदतर, यह स्तनपान के सार से विचलित करता है, जो कि एक माँ का अपने बच्चे के साथ संबंध है। शिशुओं को उनकी अपनी मां या उनके समूह के किसी अन्य महिला द्वारा स्तनपान कराया जाना भी आज एक फैशन बन गया है। अफ़सोस की बात है कि इस जैविक क्रिया से मुक्त होना अब कई आधुनिक महिलाओं के लिए एक उचित विकल्प के रूप में देखा जाता है।

 

एक बच्चा पोषण के लिए अपनी मां पर निर्भर करता है। इसमें स्तनपान शामिल है, लेकिन यह इन्हीं तक सीमित नहीं है। जागरूक स्तनपान कराने वाली माताएं समझती हैं कि स्तन उनके बच्चे के लिए भोजन का स्रोत है। माता, पिता, परिवार के सदस्यों और अन्य देखभाल करने वालों की प्यारी बाहें अपने बच्चों को दूध पिलाने के बीच खुशी-खुशी पकड़ लेंगी।

 

अध्ययनों से पता चला है कि शिशुओं के लिए स्तन का दूध फार्मूला की तुलना में पचाने में आसान होता है, और यह विभिन्न स्वास्थ्य लाभ प्रदान कर सकता हैस्तनपान कई बीमारियों को रोकता है जो छोटे बच्चों को प्रभावित कर सकती हैं, जिनमें पेट के वायरस, कान में संक्रमण, अस्थमा, किशोर मधुमेह और यहां तक कि बचपन का ल्यूकेमिया भी शामिल है।

 

 

प्रतिकात्मक चित्र

 

Meditation diverts from breastfeeding, how to drink nectar?

 

 

प्रियंका सौरभ

Priyanka Saurabh

 

 

In the changing times, new and modern mothers have many misconceptions about breastfeeding. In the modern era, mothers are refraining from feeding their newborn babies with their milk. Due to this, children are not only getting weak, but their immunity is also decreasing. When it comes to diet, nutritious and complete food is only and only mother’s milk. Which is also named as Amrit. If the child takes his mother’s milk as food, then he becomes healthy, strong, sharp intellect and his immunity increases automatically.

 

 

World Breastfeeding Week was observed from 1 to 7 August. This year ‘Step Up for Breastfeeding: Educate and Support’, focused on the protection, promotion and support of breastfeeding, involving governments, communities and individuals. Emphasis was placed on informing, educating and empowering families, including governments, health systems, workplaces and communities, to strengthen their ability to provide and maintain a breastfeeding-friendly environment in a post-pandemic world.

 

Breastfeeding is key to post-pandemic sustainable development strategies, as it improves nutrition, ensures food security and reduces inequalities between and within countries. The objectives of World Breastfeeding Week are to create awareness about breastfeeding among parents, encourage parents to adopt breastfeeding and create awareness about the importance of adequate and appropriate complementary feeding.

 

Breastfeeding is important as it promotes better health for mothers and babies alike. It prevents infections like diarrhea and acute respiratory infections in early infancy and thus reduces infant mortality. It lowers the risk of mothers developing breast cancer, ovarian cancer, type 2 diabetes and heart disease. It protects babies from obesity related diseases, diabetes and increases IQ.

 

It is very important to start breastfeeding within an hour of birth if you see the right parameters of infant and young child’s diet. Exclusive breastfeeding for the first six months of life i.e. only breast milk and ‘no’ other milk, food, drink or water. Continuing breast-feeding from the age of six months with proper and adequate complementary feeding until the age of two years or more plays an important role in the nutrition of children.

 

But in the changing times, new and modern mothers have many misconceptions about breastfeeding. In the modern era, mothers are refraining from feeding their newborn babies with their milk. According to the survey report, 79 percent of children up to one year in the country are bottle-fed in the early stages. Due to this, children are not only getting weak, but their immunity is also decreasing.

 

When it comes to diet, nutritious and complete food is only and only mother’s milk. Which is also named as Amrit. If the child takes his mother’s milk as food, then he becomes healthy, strong, sharp intellect and his immunity increases automatically.

 

The child’s intellectual ability is more in children who have drank mother’s milk for a long time. If we look at the old times, our forefathers were the ancestors who breastfed their mother. He was very strong and had a sharp intellect. Today, due to the modern environment, many women refrain from feeding their child to maintain their figure.

 

The modern mother does not feed her newborn child even for three days and argues that feeding the baby with the breast open causes backward feeling. The figure deteriorates, she does not want to call herself a rustic mother. Actually a big reason for this is also that today mothers who do not like to give birth naturally in cities, they cannot feel the feeling of becoming that mother throughout their life.

 

That pain does not feel the pain that creates the bond of love between mother and child. It is very important to feed the baby. It does not spoil your figure but on the contrary makes you healthy and shapely.

 

There are many reasons why a mother chooses to bottle feed her baby. They may worry that the food and medicines they eat may be passed on to their babies through their milk. Women who worry that their smoking or coffee habits may reduce the amount of nicotine and caffeine in their natural milk see baby formula as a safer alternative.

 

Breastfeeding affects different women differently. Some moms find that it makes them feel very uncomfortable and sore, and bottle feeding offers them a convenient and painless alternative. Others choose not to breastfeed because of other family or job pressures.

 

Modern society needs to change its practices to ensure that these pressures do not interfere with breastfeeding so much that women are forced to stop breastfeeding when they do not want to. The reason breastfeeding rates are faltering has as much to do with adjuvants as it has to do with formula and drug companies producing human milk substitutes.

 

In highly industrialized developed countries, the widespread use of pumps and bottles of breastmilk or formula has also made it difficult to define breastfeeding accurately. Women are under pressure to pump for work, for travel, etc. Pumping can damage the milk supply. The difficulties caused by this can lead to premature weaning. This often leads to increased supplementation and early weaning.

 

Worse, it distracts from the essence of breastfeeding, which is a mother’s relationship with her baby. It has also become a fashion today for babies to be breastfed by their own mother or any other woman in their group. Sadly, breaking free of this biological function is now seen as a reasonable option for many modern women.

 

A child depends on its mother for nourishment. This includes, but is not limited to, breastfeeding. Conscious lactating mothers understand that the breast is a source of food for their baby. The loving arms of mothers, fathers, family members and other caregivers will happily hold their babies in between feedings.

 

Studies have shown that breast milk for infants is easier to digest than formula, and may provide various health benefits. Breastfeeding prevents many diseases that can affect young children, including stomach viruses, Ear infections, asthma, juvenile diabetes and even childhood leukemia.

 

सच्चा मित्र…. sachcha mitr….

 

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