National Emblem of India: मिट्टी में मिला था ‘अशोक स्तंभ’, नेहरू-पटेल ने इसे ही क्यों बनाया देश की शान? अनसुनी कहानी
History of Ashok Stambh and changes in Indian symbols on Republic Day 1950

National Emblem of India:
National Emblem of India: History of Ashok Stambh and changes in Indian symbols on Republic Day 1950
National Emblem of India: मिट्टी में मिला था ‘अशोक स्तंभ’, नेहरू-पटेल ने इसे ही क्यों बनाया देश की शान; कैसे तय हुए थे नाम, नोट और राष्ट्रीय प्रतीक?
Republic Day 1950 History: 26 जनवरी 1950 की सुबह भारत के लिए सिर्फ एक कैलेंडर की तारीख नहीं थी, बल्कि यह एक पुनर्जन्म था। दिल्ली में कोहरा था, लेकिन देश के दिल में आजादी की नई चमक थी। इस दिन हम सिर्फ एक स्वतंत्र देश से ‘गणतंत्र’ (Republic) बने। लेकिन क्या आप जानते हैं कि उस सुबह जब सरकारी दफ्तर खुले, तो सब कुछ बदल चुका था?
National Emblem of India: ब्रिटिश राज की मुहरों को कूड़ेदान में फेंक दिया गया, नोटों से महारानी की तस्वीर गायब हो गई और सेना की वर्दी से ‘रॉयल क्राउन’ हटाकर ‘अशोक स्तंभ’ लगा दिया गया। आइए जानते हैं उस ऐतिहासिक बदलाव की पूरी कहानी, जिसमें मिट्टी में दबे एक स्तंभ को देश का गौरव बनाया गया।
1. गुलामी की आखिरी निशानियों को मिटाने की चुनौती
15 अगस्त 1947 को भारत आजाद तो हो गया था, लेकिन ढाई साल तक हम तकनीकी रूप से ब्रिटिश डोमिनियन (अधिराज्य) थे। हमारी सेना के आगे ‘रॉयल’ लगा था, नोटों पर किंग जॉर्ज VI की फोटो थी और ‘गॉड सेव द क्वीन’ के गीत बजते थे।
संविधान सभा में सरदार वल्लभभाई पटेल का स्पष्ट मानना था— “किसी भी राष्ट्र के प्रतीक उसकी जनता के आत्म-गौरव का आधार होते हैं। अगर हम दासता के प्रतीकों के साथ चलेंगे, तो जनता के मन से गुलामी की भावना कभी नहीं जाएगी।”
2. राष्ट्रीय प्रतीक के लिए क्या-क्या प्रस्ताव मिले?
जब ‘रॉयल क्राउन’ को बदलने की बात आई, तो सुझावों की बाढ़ आ गई।
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धार्मिक सुझाव: कुछ नेताओं का मानना था कि भारत की पहचान ‘ओम (ॐ)’, ‘गाय’ या ‘देवी-देवताओं’ की तस्वीरों से होनी चाहिए।
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आधुनिक सुझाव: कुछ प्रगतिशील नेता ‘फैक्ट्री’, ‘ग्लोब’, ‘बिजली के बांध’ या ‘हाथ मिलाने (Handshake)’ वाली आकृतियों को प्रतीक बनाना चाहते थे।
पंडित जवाहरलाल नेहरू और डॉ. भीमराव अंबेडकर ने इन सभी को खारिज कर दिया। उनका तर्क था कि भारत का राष्ट्रीय प्रतीक ऐसा होना चाहिए जो हमारी प्राचीन संस्कृति को भी दिखाए और आधुनिक लोकतंत्र व धर्मनिरपेक्षता का भी संदेश दे।
3. अशोक स्तंभ ही क्यों चुना गया?
लंबी बहस के बाद ‘अशोक स्तंभ’ (Lion Capital of Ashoka) पर सहमति बनी। इसके पीछे तीन मुख्य कारण थे:
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नैतिक शासन: सम्राट अशोक का शासन धम्म और नैतिकता पर आधारित था।
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कानून का राज: यह स्तंभ कानून की सर्वोच्चता को दर्शाता है।
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धर्मनिरपेक्षता: यह किसी एक धर्म का नहीं बल्कि भारतीय सभ्यता का प्रतीक था।
नेहरू और अंबेडकर दोनों का मानना था कि अशोक स्तंभ प्राचीन भारत के उस स्वर्ण युग को दर्शाता है जब भारत विश्व गुरु था और शांति का संदेश देता था।
4. मिट्टी में दबा मिला था देश का गौरव
दिलचस्प बात यह है कि जिस अशोक स्तंभ को हमने अपना गौरव बनाया, वह सदियों तक मिट्टी में दबा रहा। 1904-1905 में एक जर्मन सिविल इंजीनियर फ्रेडरिक ओर्टेल (Friedrich Oertel) ने चीनी यात्रियों (ह्वेनसांग और फाहियान) की किताबों के आधार पर सारनाथ में खुदाई करवाई।
लगभग 40-50 फीट का यह स्तंभ टुकड़ों में मिला था, लेकिन इसका ऊपरी हिस्सा, जिसमें चार शेर एक-दूसरे की ओर पीठ करके खड़े हैं, पूरी तरह सुरक्षित मिला। इसे उस समय की कला का नायाब नमूना माना गया। आज यही मूल स्तंभ सारनाथ संग्रहालय में सुरक्षित है।
5. कैसे तैयार हुई आज की डिजाइन?
जब अशोक स्तंभ को राष्ट्रीय प्रतीक बनाने का फैसला हुआ, तो इसे कागज पर उतारने की जिम्मेदारी प्रख्यात चित्रकार नंदलाल बोस और शांति निकेतन की उनकी टीम को दी गई। 1949 में तैयार हुई उनकी डिजाइन को ही आज आप अपने पासपोर्ट, नोटों और सरकारी दस्तावेजों पर देखते हैं। इस प्रतीक में तीन शेर दिखाई देते हैं (चौथा पीछे छिपा होता है) और नीचे ‘सत्यमेव जयते’ लिखा है, जिसका अर्थ है— ‘सत्य की ही जीत होती है’।

6. 26 जनवरी 1950 को क्या-क्या बदला? (The Great Transition)
उस ऐतिहासिक दिन देश की पूरी पहचान ही बदल गई। आइए एक नजर डालते हैं उन बड़े बदलावों पर:
| क्षेत्र | आजादी से पहले (British Era) | 26 जनवरी 1950 के बाद (Republic Era) |
| सेना (Army) | रॉयल इंडियन आर्मी | इंडियन आर्मी |
| वायुसेना | रॉयल इंडियन एयरफोर्स | इंडियन एयरफोर्स |
| मुद्रा (Currency) | किंग जॉर्ज VI की फोटो | अशोक स्तंभ |
| प्रतीक (Emblem) | ब्रिटिश रॉयल क्राउन | अशोक स्तंभ |
| राष्ट्रगान | गॉड सेव द क्वीन | जन गण मन |
| सिविल सेवा | इंपीरियल सिविल सर्विस (ICS) | इंडियन एडमिनिस्ट्रेटिव सर्विस (IAS) |
7. सेना और पुलिस में बड़े बदलाव
ब्रिटिश शासन ने CRPF का गठन 1939 में ‘क्राउन रिप्रेजेंटेटिव पुलिस’ के रूप में किया था ताकि विद्रोहियों को कुचला जा सके। लेकिन 26 जनवरी 1950 को इसका बैज बदल गया और यह ‘सेंट्रल रिजर्व पुलिस फोर्स’ बन गई। इसी तरह, सेना की वर्दियों से ‘क्राउन’ को हटाकर अशोक की लाट लगा दी गई।
8. नोटों से महारानी और राजा की विदाई
आजादी से पहले भारतीय नोटों पर जॉर्ज V और जॉर्ज VI की तस्वीरें हुआ करती थीं। 26 जनवरी 1950 के बाद जारी हुए नए नोटों पर पहली बार ‘Government of India’ लिखा गया और अशोक स्तंभ को मुख्य स्थान मिला। यह इस बात का प्रतीक था कि अब भारत की संपत्ति पर किसी राजा का नहीं, बल्कि भारत की जनता का अधिकार है।
9. अशोक स्तंभ के जानवरों का क्या है संदेश?
अशोक स्तंभ के नीचे के हिस्से (अबेकस) पर चार जानवर बने हैं, जो अलग-अलग दिशाओं और गुणों के प्रतीक हैं:
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हाथी: बुद्ध के जन्म और शक्ति का प्रतीक।
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दौड़ता हुआ घोड़ा: ऊर्जा, गति और निष्ठा।
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बैल: मेहनत और कृषि प्रधानता।
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शेर: साहस और विजय।
इनके बीच में ‘धर्मचक्र’ है, जो हमारे तिरंगे के बीच में भी मौजूद है।

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National Emblem of India: निष्कर्ष
26 जनवरी 1950 को अपनाए गए ये प्रतीक केवल कागजी बदलाव नहीं थे। यह इस बात का ऐलान था कि सदियों की गुलामी के बाद भारत अपनी जड़ों की ओर लौट आया है। मिट्टी में दबा मिला वह ‘अशोक स्तंभ’ आज 140 करोड़ भारतीयों की शान है। नेहरू, पटेल और अंबेडकर की दूरदर्शिता ने हमें एक ऐसी पहचान दी जो धर्मों से ऊपर उठकर राष्ट्र को एक सूत्र में पिरोती है।
जब भी आप अपने हाथ में एक रुपया का सिक्का या अपना पासपोर्ट देखें, तो याद रखिएगा कि इसके पीछे मिट्टी से निकलकर देश की शान बनने तक का एक लंबा और गौरवशाली संघर्ष छिपा है।
National Emblem of India: Disclaimer: यह लेख ऐतिहासिक तथ्यों और उपलब्ध जानकारी पर आधारित है। इसका उद्देश्य पाठकों को भारतीय गणतंत्र के इतिहास के बारे में जागरूक करना है।













