कविता मेरी उजाला….
©गायकवाड विलास
परिचय- मिलिंद महाविद्यालय, लातूर, महाराष्ट्र
कविता मेरी आशाएं,
प्रीत जग को सिखाए
द्वेष मन से मिटाएं ,
लफ्ज़ ये कहते है।
कविता मेरी सरिता ,
जोड़ती दिलों से रिश्ता
छाए ख़ुशी संसार में,
लफ्ज़ ये लिखते है।
कविता मेरी उजाला,
चाहे संसार का भला
युद्ध छोड़ो बुद्ध पढ़ो,
लफ्ज़ ये सिखाते है।
कविता मेरी साधना,
पूजा और आराधना
पवित्र बनें नीतियां ,
लफ्ज़ ये सोचते है।
कविता मेरी अमर,
जीवन है ये नश्वर
कर्मों की आएं महक,
जैसे वो सितारें है।

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