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काश ! अगर मैं बेटी ना होती kaash ! agar main betee na hotee

©नीरज सिंह कर्दम

परिचय– बुलन्दशहर, उत्तर प्रदेश.


 

 

काश !

ना मैं होती बेटी

तो आज यूं ना रोती

खून के आंसू !

ना इज्जत मेरी

तार – तार होती

ना आधी रात में

जलाई जाती,

कोई मां ऐसे ना रोती,

काश !

अगर मैं बेटी ना होती।

 

ना तुम्हें देती जन्म

अपने सीने का

दूध ना तुम्हें मैं

पिलाती

काश !

अगर मैं बेटी ना होती।

 

मेरे जन्म पर भी

खुशियां बनती,

ना मुझे कभी

अलग किया जाता

मां के आंचल से

मेरे जन्म पर ना

मातम छाता,

तुम्हारी ऐसी

मानसिकता ना होती

काश !

 

अगर मैं बेटी ना होती।

 

 

नीरज सिंह कर्दम

Neeraj Singh Kardam

 

 

If only ! if i wasn’t a daughter

 

 

If only !
no i would be daughter
so don’t cry today
Tears of blood
no respect for me
was wired
not in the middle of the night
burnt,
No mother would cry like this,
If only !
If I were not a daughter

don’t give birth to you
of your chest
I don’t milk you
drank
If only !
If I were not a daughter

even at my birth
be happy,
never me
is separated
from mother’s lap
on my birth
weeds umbrella,
like yours
didn’t have the mindset
If only !

If I were not a daughter

 

 

मुझे चौकीदार नहीं होने देते mujhe chaukeedaar nahin hone dete

 

 

 

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