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हम पतझड़ को ही अपना साया बना बैठे ham patajhad ko hee apana saaya bana baithe

©हरविंदर सिंह, गुलाम

परिचय– पटियाला, पंजाब


 

शौंकिया हम जो उसकी महफ़िल में जा बैठे

अपने इस दिल को लाइलाज रोग लगा बैठे

बहारें आई कई बार और आकर चली गयी

हम पतझड़ को ही अपना साया बना बैठे

 

जो कुछ कहे उनसे कैसे कहे है बड़ी मुश्किल

अपने ही सवालों का बोझ हम तो उठा बैठे

एक ही खता हुई हमसे और वो ये है हुज़ूर

हम आप से आपकी महफ़िल से दिल लगा बैठे

 

कारगर है ये नुस्खा सोचा दिल लगाने का

शमा के पास क्या पहुंचे हम खुद को जला बैठे

मैं भी जो चला उस रस्ते कोई नई बात तो नहीं

कितने ही इस राह पर मुझसे पहले खुद को लुटा बैठे

 

‘ग़ुलाम’ को समझने वाला कोई न मिला

आखिर तुम फिर क्यूँ उसके रस्ते में जा बैठे

बेमकसद पीछा करते हो अंधेरों में साये का

ऐसे ही खुद अंधेरों में अंधेरों से टकरा बैठे  ….

 

 

 

हरविंदर सिंह गुलाम

Harvinder Singh Ghulam

 

 

We make autumn our shadow

 

amateurs we who sit in his gathering
This incurable disease in your heart
Many times it has come and gone
We make autumn our shadow

 

It is very difficult to say whatever they say
We have taken the burden of our own questions
There is only one letter from us and that is Huzoor.
We love you with your heart

 

This recipe is effective, thought of putting heart
What happened to Shama, we burnt ourselves
There is nothing new on the way that I also walked
How many have spent themselves on this road before me?

साहित्यकार दीपक मेवाती बने साहित्य चेतना मंच के उपाध्यक्ष saahityakaar deepak mevaatee bane saahity chetana manch ke upaadhyaksh
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No one was found to understand ‘Ghulam’
After all, why did you sit in his way again?
Pursue the shadows in the dark
In the same way, he himself collided with the darkness in the dark.

 

 

अग्निपथ योजना का विरोध बेरोजगारी संकट का सूचक है agnipath yojana ka virodh berojagaaree sankat ka soochak hai

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