Inspirational Story: हाथ-पैर ने दिया साथ छोड़, लेकिन हौसले ने नहीं! मुंह में कलम दबाकर 10वीं में 93% लाने वाले फ़ैज़ानउल्ला की कहानी कर देगी भावुक
सेरेब्रल पाल्सी से जूझ रहे मोहम्मद फ़ैज़ानउल्ला ने मुंह से लिखकर 10वीं बोर्ड में 93% अंक हासिल किए, अब बनना चाहते हैं IAS अधिकारी

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Inspirational Story: सेरेब्रल पाल्सी से जूझ रहे मोहम्मद फ़ैज़ानउल्ला ने मुंह से लिखकर 10वीं बोर्ड में 93% अंक हासिल किए, अब बनना चाहते हैं IAS अधिकारी
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Inspirational Story: मुंह में कलम दबाकर लिखी तकदीर! 10वीं बोर्ड में 93% लाने वाले फ़ैज़ानउल्ला की कहानी हर छात्र को पढ़नी चाहिए
कई बार जिंदगी कुछ लोगों की इतनी कठिन परीक्षा लेती है कि सामान्य इंसान शायद हार मान ले. लेकिन कुछ लोग ऐसे भी होते हैं जो अपनी कमजोरी को ही अपनी ताकत बना लेते हैं. झारखंड के गोड्डा जिले के रहने वाले मोहम्मद फ़ैज़ानउल्ला ऐसी ही एक मिसाल बनकर सामने आए हैं.
सेरेब्रल पाल्सी जैसी गंभीर बीमारी से पीड़ित फ़ैज़ानउल्ला के हाथ-पैर बचपन से काम नहीं करते. वह न ठीक से चल सकते हैं, न बैठ सकते हैं और न ही हाथों से लिख सकते हैं. लेकिन इसके बावजूद उन्होंने जो कर दिखाया, उसने लाखों लोगों की आंखें नम कर दीं.
मुंह में कलम दबाकर लिखने वाले इस छात्र ने झारखंड 10वीं बोर्ड परीक्षा में 93 प्रतिशत अंक हासिल किए और दिव्यांग कैटेगरी में टॉपर बन गए.
उनकी कहानी अब सोशल मीडिया से लेकर शिक्षा जगत तक हर जगह चर्चा में है.
Inspirational Story: छह महीने की उम्र में पता चली गंभीर बीमारी
फ़ैज़ानउल्ला का जन्म एक सामान्य बच्चे की तरह हुआ था. लेकिन जब वह करीब छह महीने के हुए तो परिवार को महसूस हुआ कि उनके शरीर में कोई हलचल नहीं हो रही.
उनकी दादी ने सबसे पहले इस बात को नोटिस किया. इसके बाद परिवार उन्हें डॉक्टर के पास लेकर गया.
डॉक्टर ने बताया कि बच्चा “Cerebral Palsy” नाम की बीमारी से पीड़ित है. यह सुनकर पूरा परिवार टूट गया.
फ़ैज़ानउल्ला के पिता मोहम्मद अनवार आलम बताते हैं कि उस समय उन्हें इस बीमारी के बारे में कुछ भी जानकारी नहीं थी. रिश्तेदारों की सलाह पर उन्होंने बेटे का इलाज कोलकाता तक करवाया, लेकिन कोई खास सुधार नहीं हुआ.
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Inspirational Story: दो कमरे का घर और बड़े सपने
फ़ैज़ानउल्ला का परिवार बेहद साधारण जीवन जीता है. गोड्डा के शिवाजी नगर में उनका छोटा सा घर है जिसमें सिर्फ दो कमरे हैं.
एक कमरे में छोटी दुकान चलती है जबकि दूसरे कमरे में पूरा परिवार रहता है.
आर्थिक तंगी और बीमारी के बावजूद परिवार ने कभी फ़ैज़ानउल्ला की पढ़ाई नहीं रुकने दी.
उनकी मां नज़मा कहती हैं कि जब फ़ैज़ान सामान्य बच्चों की तरह बोलने लगे, तभी उन्हें उम्मीद मिली कि उनका बेटा जिंदगी में कुछ बड़ा कर सकता है.
वह कहती हैं:
“फ़ैज़ान खुद से बैठ नहीं सकते थे, उठ नहीं सकते थे, लेकिन जब उन्होंने बातचीत शुरू की तो हमें लगा कि हमारा बेटा आगे बढ़ सकता है.”
Inspirational Story: पिता ने घर को ही बना दिया स्कूल
फ़ैज़ानउल्ला के पिता एक प्राइवेट मदरसे में शिक्षक हैं. उन्होंने बेटे को घर पर ही पढ़ाना शुरू किया.
धीरे-धीरे उन्होंने उर्दू, हिंदी, अरबी, अंग्रेजी और गणित की शुरुआती शिक्षा मौखिक रूप से दी.
क्योंकि फ़ैज़ान हाथों से लिख नहीं सकते थे, इसलिए शुरुआत में पूरी पढ़ाई सुनकर और बोलकर होती थी.
लेकिन पिता जानते थे कि सिर्फ बोलकर पढ़ना काफी नहीं होगा. उन्हें किसी तरह लिखना भी सीखना पड़ेगा.
Inspirational Story: जब शिक्षक बनकर आए फरिश्ता
फ़ैज़ानउल्ला की जिंदगी में असली बदलाव तब आया जब उनका दाखिला छठी कक्षा में उच्च उत्क्रमित विद्यालय शिवाजी नगर में हुआ.
यहां शिक्षक जितेंद्र कुमार भगत ने उनकी जिंदगी बदल दी.
जितेंद्र कुमार भगत झारखंड शिक्षा परियोजना के अंतर्गत विशेष शिक्षा विशेषज्ञ के तौर पर नियुक्त थे.
जब उन्हें पता चला कि फ़ैज़ान बीमारी की वजह से स्कूल नहीं आ पाते, तो वह खुद उनके घर पहुंच गए.
वह कहते हैं:
“फ़ैज़ानउल्ला का आत्मविश्वास और IQ देखकर मैं हैरान रह गया. तभी मैंने ठान लिया कि मैं इन्हें हर हाल में पढ़ाऊंगा.”
Inspirational Story: मुंह से लिखना सीखने की शुरुआत
फ़ैज़ानउल्ला की सबसे बड़ी समस्या थी कि वह लिख नहीं पाते थे.
शुरुआत में शिक्षक ने धागे से कलम बांधकर लिखवाने की कोशिश की, लेकिन सफलता नहीं मिली.
फिर साल 2022 में उन्होंने एक नया तरीका अपनाया.
उन्होंने फ़ैज़ानउल्ला के दांतों के बीच कलम पकड़ाकर लाइन खिंचवाने की कोशिश शुरू की.
धीरे-धीरे यह अभ्यास काम करने लगा.
कुछ महीनों बाद फ़ैज़ान अक्षर लिखने लगे और फिर उनकी लिखावट इतनी साफ हो गई कि लोग पहचान नहीं पाते थे कि यह कॉपी किसी दिव्यांग छात्र ने लिखी है.
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फ़ैज़ानउल्ला बताते हैं:
“आठवीं तक पहुंचते-पहुंचते मेरी लिखावट सामान्य बच्चों जैसी हो गई थी.”
Inspirational Story: आठवीं और नौवीं में भी बने टॉपर
जितेंद्र कुमार भगत की मेहनत और फ़ैज़ान की लगन का असर जल्दी दिखने लगा.
उन्होंने आठवीं और नौवीं की परीक्षाएं खुद लिखकर स्कूल में टॉप किया.
इस सफलता ने उनका आत्मविश्वास कई गुना बढ़ा दिया.
फिर साल 2025 में जिला शिक्षा विभाग की ओर से आयोजित भाषण प्रतियोगिता में उन्होंने पहला स्थान हासिल किया.
इनाम में उन्हें एक लैपटॉप मिला जिसने उनकी जिंदगी बदल दी.
Inspirational Story: ChatGPT और AI से बदली पढ़ाई
लैपटॉप मिलने के बाद फ़ैज़ानउल्ला ने टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल शुरू किया.
उन्होंने MS Excel, PowerPoint और AI Tools सीखना शुरू किया.
सबसे दिलचस्प बात यह रही कि उन्होंने ChatGPT का इस्तेमाल पढ़ाई में करना शुरू किया.
वह बताते हैं:
“मैं NCERT की PDF ChatGPT पर अपलोड करता था और उससे सवाल तैयार करवाता था. फिर खुद उन सवालों को हल करता था.”
इस तकनीक ने उनकी तैयारी को और मजबूत बना दिया.
उनके शिक्षक कहते हैं कि यही तरीका फ़ैज़ान को दिन-प्रतिदिन आगे बढ़ाता गया.
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Inspirational Story: 10वीं बोर्ड में हासिल किए 93% अंक
जब 10वीं बोर्ड का रिजल्ट आया तो हर कोई चौंक गया.
फ़ैज़ानउल्ला ने 93 प्रतिशत अंक हासिल किए और दिव्यांग कैटेगरी में टॉपर बने.
हालांकि परीक्षा में उन्हें “राइटर” यानी सहायक लेखक की सुविधा मिली थी, लेकिन उन्होंने ज्यादातर पेपर खुद ही लिखे.
गणित में उन्होंने 98 अंक हासिल किए.
वह कहते हैं:
“गणित जैसे विषय को बोलकर लिखवाना मुश्किल था, इसलिए मैंने खुद ही लिखा.”
Inspirational Story: अब IAS बनने का सपना
फ़ैज़ानउल्ला अब सिर्फ पढ़ाई तक सीमित नहीं रहना चाहते.
उनका सपना है कि वह सिविल सर्विस परीक्षा पास करें और IAS अधिकारी बनें.
इसके साथ ही वह झारखंड के मुख्यमंत्री और भारत के प्रधानमंत्री से भी मिलना चाहते हैं.
उनकी यह इच्छा अब लाखों लोगों का सपना बन चुकी है.
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Inspirational Story: सोशल मीडिया पर क्यों वायरल हो रही है यह कहानी?
आज के दौर में जहां लोग छोटी-छोटी असफलताओं से टूट जाते हैं, वहीं फ़ैज़ानउल्ला की कहानी उम्मीद की नई रोशनी बनकर सामने आई है.
सोशल मीडिया पर लोग उन्हें “Real Hero”, “Inspiration” और “Fighter” कह रहे हैं.
उनका वीडियो देखकर लोग भावुक हो रहे हैं क्योंकि यह सिर्फ एक छात्र की कहानी नहीं बल्कि संघर्ष, मेहनत और जज्बे की मिसाल है.
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Inspirational Story: निष्कर्ष
मोहम्मद फ़ैज़ानउल्ला ने साबित कर दिया कि शरीर की कमजोरी इंसान के सपनों को नहीं रोक सकती.
जिस बच्चे के हाथ-पैर नहीं चलते थे, उसने मुंह से लिखकर 10वीं बोर्ड में 93% अंक हासिल कर इतिहास रच दिया.
उनकी कहानी हर छात्र, हर माता-पिता और हर शिक्षक के लिए एक प्रेरणा है.
यह कहानी बताती है कि अगर परिवार का साथ, शिक्षक का मार्गदर्शन और खुद पर विश्वास हो, तो जिंदगी की सबसे बड़ी मुश्किल भी छोटी पड़ जाती है.










