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कोई नहीं आता तुरबत पर koee nahin aata turabat par

©मजीदबेग मुगल “शहज़ाद” 

परिचय- वर्धा, महाराष्ट्र


 

गज़ल

 

न पर्दा डालों अपनी बुरी आदत पर ।

तुम को क्या असर पड़ेगा सेहत पर।।

 

थोडा करतें बढ़ जाता बुराई का समंदर।

कोई दवा नहीँ होती मुसीबत पर ।।

 

बुरी आदत पूरी करने का वो आदी हो।

घर भी बेच देगा अभी जरूरत पर ।

 

इज्ज़तों नाम से उसको क्या लेना ।

उसे खुशी मिली आदत की सवलत पर।।

 

दहर हरम से मतलब न पंडित मुल्ला से ।

नालत भेजता वो सब की नसीहत पर ।।

 

उसके रिश्ते दोस्त उसके जो लती ।

मजाक उडाया जाता हैसीयत पर ।।

 

‘शहज़ाद ‘जिन्दगी मिलीं चैन से गुजार।

मरे कोई नहीं आता तुरबत पर।।

 

 

मजीदबेग मुगल

Majidbeg Mughal


 

 

no one comes on turbat

 

 

Ghazal

Don’t cover your bad habit.
What will be the effect on your health.

Little by little, the sea of ​​evil increases.
There is no medicine on the problem.

He is used to completing a bad habit.
Will also sell the house now on need.

What should he get by the name of respect?
He got happiness on the basis of habit.

Dahar Haram does not mean Pandit Mulla.
He sends Nalat on the advice of everyone.

His relationship friends bring him to him.
Jokes are made on the will.

‘Shahzad’ life was found peacefully.
No one dies on the turbat.

 

 

बिना हड़ताल के हम जंग जीते! हॉकरों की मदद मिली थी !! bina hadataal ke ham jang jeete! hokaron kee madad milee thee !!

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