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मेरे साथ घूमते हैं चाँद-तारे mere saath ghoomate hain chaand-taare

©भरत मल्होत्रा

परिचय– मुंबई, महाराष्ट्र


 

 

ज़ुबां पे कैसे आता मेरे इश्क का फसाना

उसे वक्त ही नहीं था जिसे चाहा था सुनाना

 

 

मेरे साथ घूमते हैं पूरी रात चाँद-तारे

इनका भी नहीं है क्या मेरी तरह ठिकाना

 

 

आज़मा ले शौक से तू गैरों की भी वफाएँ

कहीं भी ना मिलेगा मुझ सा तुम्हें दीवाना

 

 

तलाश-ए-ज़िंदगी में दर-दर भटक रहा हूँ

तुमको कहीं मिले तो मुझको ज़रा बताना

 

 

क्या चीज़ ये जवानी तूने खुदा बनाई

यही जागने का मौसम यही नींद का ज़माना

 

 

तेरे इश्क ने दिए हैं वस्ल-ओ-फिराक दोनों

इक पल में आह भरना इक पल में मुस्कुराना

 

 

 

 

भरत मल्होत्रा

 

 

The moon and stars revolve with me

 

 

 

How come the trap of my love comes on the tongue
he didn’t have time to listen to what he wanted

The moon and stars roam with me all night
They don’t even have a place like me

Try your hobby with others too
You will not find me anywhere you are crazy

I am wandering from door to door in Talaash-e-Zindagi
let me know if you find me somewhere

What thing did you make this youth God?
This is the time to wake up, this is the time of sleep

Tere Ishq has given both wasl-o-firak
sigh in a moment smile in a moment

 

 

 

 

वादा करो तुम vaada karo tum

 

 

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