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… बड़े बाबू की बात सुन जूही बोली- मैं किसी से डरने वाली नहीं हूं, मैं जैसा कह रही हूं वैसा करें, आगे जो होगा देखा जाएगा … पढ़ें, लेखक- श्याम कुंवर भारती की कहानी जूही की महक का सांतवा भाग … bade baaboo kee baat sun joohee bolee- main kisee se darane vaalee nahin hoon, main jaisa kah rahee hoon vaisa karen, aage jo hoga dekha jaega … padhen, lekhak- shyaam kunvar bhaaratee kee kahaanee joohee kee mahak ka saantava bhaag

©श्याम कुंवर भारती

परिचय- बोकारो, झारखंड


 

 

मगर सुधीर ने उसकी हालत को देखते हुए बड़े बाबू सोमनाथ से कहा- बड़े बाबू बेहतर है सबको आप समझा कर ऑफिस भेज दें और मैडम को आराम करने दिया जाए। बाकी आपको जहां जिसे सूचना देनी है दे दे।

 

आप ठीक कह रहे हैं धीरज जी मैं देखता हूं सबको।

 

इधर धीरज की मां ने जूही का पूरा ख्याल रखा। दवा और अच्छी देखभाल से जूही दो दिनों में पूरी तरह ठीक हो गई।

 

तीसरे दिन उसने ऑफिस का काम संभाल लिया। पिछले सारे काम निपटा कर उसने अपने जूनियर इंजीनियर (जेई कनीय अभियंता) को बुलाकर कहा, जेई साहब सामुदायिक भवन निर्माण का काम जो आया है जिसकी लागत लगभग दस लाख रुपए है उसे अभिकर्ता के रूप में एग्रीमेंट कर लें मगर काम धीरज करेगा।

 

वो अभी नया है उसे ठेकेदारी का अनुभव नहीं। उसे आप अपने साथ रखकर काम करवाएं मगर ध्यान रखें काम में कोई शिकायत न हो। काम की गुणवत्ता उत्तम स्तर की हो ताकी कोई हमलोगों पर अंगुली उठाने न सके।

 

काम पूरा हो जाने पर जो राशि बच जाए उसे धीरज के दे दें।

 

जेई ने कहा- ठीक है मैडम मैं इकरारनामा करवाने की तैयारी करता हूं और धीरज को बुलाकर उसे काम समझा देता हूं। जेई के जाने के बाद बड़ा बाबू सोमनाथ आता है।

 

उसने धीरे से कहा- मैडम विधायक मदन मोहन गुप्ता बहुत गड़बड़ी करवा रहे हैं। गरीबी रेखा की सूची में अपने सारे लोगों को शामिल करवाए हैं जो कहीं से भी गरीब नहीं है। सबके घर में चार चक्का गाड़ी है। पक्का मकान है। एसी, फ्रीज, कूलर सब है। इसी तरह राशन कार्ड में भी भारी गड़बड़ी हुई है। जो इनके पार्टी के नहीं है या इनको वोट नहीं देते हैं ऐसे गरीब लोगों को बिलकुल छंटवा दिए हैं।

 

जब मैंने अपने कर्मचारियों से पूछा कि आप लोगों को सरकार का नियम पता है फिर भी क्यों गड़बड़ी हुई। सबने कहा- विधायक जी दबंग नेता हैं हम लोगों से जबरजस्ती करवाया गया है। हमलोग क्या करते।

 

सुनकर जूही बहुत नाराज होती है और आदेश देती है कि सभी योजनाओं की सूची के पुनर्निरीक्षण करवाएं अगर सरकार के मापदंड पर सही नहीं पाई जाती है तो सारी सूची को रद्द करवाएं और साथ ही जिला मुख्यालय को सारी रिपोर्ट भेजकर आदेश प्राप्त करने का एक अनुरोध पत्र मेरी तरफ से बनवा कर लाएं, मैं साइन कर देती हूं।

 

लेकिन मैडम इससे विधायक जी नाराज हो जायेंगे। वे किसी भी ऑफिसर को कुछ नहीं समझते और ना ही इज्जत देते हैं। उनसे उलझना ठीक नहीं होगा। बड़े बाबू ने हिचकिचाते हुए कहा।

 

तो क्या करें, हम लोग सब कुछ जान कर भी हाथ पर हाथ रख कर बैठे रहें, इससे तो भ्रष्टाचार को बढ़ावा मिलेगा। और जरूरतमंद सरकार की लाभकारी योजनाओं से वंचित रह जायेंगे। मैं किसी से डरने वाली नहीं हूं। मैं जैसा कह रही हूं वैसा करें। आगे जो होगा देखा जाएगा। जूही ने निडर होकर कहा। बड़े बाबू अनमने ढंग से चला गया।

 

ऑफिस में जाकर बड़े बाबू ने अपने स्टाफ से कहा- मैडम मेरी बात नहीं समझ रहीं हैं। विधायक से उलझना चाहतीं हैं। आप लोगों को पता ही है उसके बारे में कैसा आदमी है।

 

मैडम को पूरी सर्वे सूची को चुपचाप जिला मुख्यालय अग्रेतर कार्यवाई हेतु भेज देना चाहिए था। मैंने तो उन्हें जानकारी के लिए बताया। अब अगर वो जांच करवाती हैं तो विधायक को मालूम पड़ जायेगा और कुछ भी कर सकता है।

 

मैडम की अभी नई नौकरी है अभी उनको ऐसे लोगों से उलझने से बचना चाहिए।

 

बड़े बाबू आप ज्यादा दिमाग मत लगाएं जो हो रहा है होने दें। या तो विधायक का होस ठिकाने आयेगा या मैडम को नुकसान उठाना पड़ेगा।

 

पता नहीं इस मामले में जिला मुख्यालय कितना मदद करेगा मैडम का, भगवान जाने क्योंकि सभी विधायक जी से डरते हैं। बड़े बाबू के सहायक ने कहा।

 

तीन दिन बाद जेई ने धीरज को सारा काम समझा दिया और एक दूसरा एग्रीमेंट धीरज से कराकर उसे एक लाख रुपए का चेक देते हुए कहा- इसमें से 50 हजार रूपए मेटेरियल के लिए है। तुम सीमेंट, बालू, इंटा, छड़ और कंक्रीट का एडवांस कर दो और बाकी पैसा लेबर पेमेंट के लिए है। दो दिन बाद तुम काम शुरू कर दो। ध्यान रहे काम पूरी ईमानदारी से करना। जैसा मैंने बताया है उसी तरह सीमेंट, मसाला बनाना है। ठीक है सर। धीरज ने जेई का आभार व्यक्त किया और कहा- सर मैं आपको शिकायत का मौका नहीं आने दूंगा।

 

उसने मन ही मन जूही का भी आभार व्यक्त किया कि मैडम ने जो कहा- वो कर दिखाया।

 

कुछ ही दिनों में सामुदायिक भवन काफी हद तक तैयार हो गया था। हर सप्ताह धीरज को एडवांस पेमेंट मिल जाता था जिससे उसे काम करने में दिक्कत नहीं हुई न घर से पूंजी लगानी पड़ी।

 

जूही ने जिला मुख्यालय जाकर डीडीसी से मुलाकात कर विधायक के बारे में सब बताया और पूछा आप बताएं सर मैं क्या करूं। मैं इस मामले को छोड़ नहीं सकती।

 

डीडीसी ने उसे समझाते हुए कहा- देखो जूही विधायक से सब अधिकारी परेशान हैं मगर कोई भी डर से उसका विरोध नहीं करता है। इसलिए तुम भी उससे मत उलझो सारी रिर्पोट यहां भेज दो। हमलोग भी उसे राज्य सरकार के पास उचित कार्यवाई हेतु भेज देंगे। मतलब हम लोग भी अपने सिर जिम्मेवारी नहीं लेंगे।

 

जूही ने कहा- लेकिन सर यह सब कब तक चलेगा आखिर हमलोग काम कैसे करेंगे। अगर सरकार की तरफ से कोई जांच हुई तो सबसे पहले मैं ही फसुंगी। इसलिए मुझे जांच करने का आदेश दें मैं गलत पाए जाने पर पूरी सूची रद्द कर दूंगी। जूही ने निर्णायक स्वर में कहा।

 

डीडीसी ने कुछ देर सोचा और बोला तुम थोड़ी देर रुको मैं डीसी साहब (डिप्टी कमिश्नर) से मिलकर आता हूं फिर बताता हूं।

 

जूही ने कहा- ठीक है सर।

 

डीडीसी अपने चेंबर से निकलकर डीसी साहब के चेंबर में चले गए और कहा- और जूही की सारी बात बताने के बाद कहा- सर आप तो जानते है ब्लॉक से लेकर जिला तक सभी अधिकारी विधायक से परेशान हैं। उसने किसी को नहीं छोड़ा है बात बात पर सबको गाली गलौज करना, हाथ छोड़ देना, धमकी देना और सरकार के नियम विरुद्ध काम करना उसके लिए आम बात हो गई है।

 

सर यही मौका है उससे निपटने का। हम लोगों को केवल इतना ही करना है जरूरत पड़ने पर पुलिस फोर्स जितना जूही मांगे उपलब्ध करा देना है। अगर विधायक ने उसका विरोध किया या धरना प्रदर्शन किया वो उससे निपट लेगी। मैं जूही से विधायक के खिलाफ जांच कराने का अनुरोध पत्र मांग लेता हूं और आपके पास भेजता हूं। आप उसे जांच का आदेश दे दें। बाकी मैं समझ लूंगा सर। साथ ही आप एसपी और डीएसपी को भी सतर्क रहने बोल दें।

 

डीसी साहब ने डीडीसी साहब की पूरी बात सुनने के बाद कहा- जूही को बुलवाएं। थोड़ी ही देर में जूही डीसी साहब के सामने खड़ी थी। डीसी साहब ने कहा- हम सब तुम्हारे साथ हैं तुम्हें जो भी करना है करो। बहुत हो चुकी विधायक की मनमानी। मैं राज्य सरकार को भी तुम्हारी शिकायत के आधार पर एक पत्र भेज देता हूं ताकी बाद में हम सबको कोई दिक्कत न हो।

 

जूही ने कहा- जी सर बहुत आभार आपका।

 

अब तुम जाओ डीडीसी साहब ने कहा। जूही सबको प्रणाम कर बाहर निकल गई।

 

शेष भाग अगले अंक 8 में …

 

 

श्याम कुंवर भारती

Shyam Kunwar Bharti


 

 

… listening to Bade Babu, Juhi said – I am not going to be afraid of anyone, do as I am told, what will happen next will be seen… read, author – The seventh part of the story of Juhi Ki Mehak by Shyam Kunwar Bharti

 

 

But Sudhir, seeing his condition, said to Bade Babu Somnath – Bade Babu is better to explain everyone and send them to the office and let the madam rest. Give the rest to whomever you want to inform.

 

You are right, Dheeraj ji, I see everyone.

 

Here Dheeraj’s mother took full care of Juhi. With medicine and good care, Juhi made a complete recovery in two days.

 

On the third day he took over the office work. After completing all the previous work, he called his junior engineer (JE Junior Engineer) and said, JE Saheb, who has come for the construction of community building, which costs about ten lakh rupees, make him an agreement as an agent but the work will be patient.

 

He is new and he has no experience of contracting. Keep him with you and get him to work, but keep in mind that there should be no complaint in the work. The quality of work should be of excellent standard so that no one can point fingers at us.

 

After the completion of the work, give the remaining amount with patience.

 

JE said- OK madam, I prepare to get the agreement done and I call Dheeraj and explain the work to him. Bada Babu comes to Somnath after JE leaves.

 

He said softly- Madam MLA Madan Mohan Gupta is making a lot of disturbances. I have got all my people included in the list of poverty line who are not poor from anywhere. Everyone has a four wheeler in their house. It is a solid house. There is AC, Freeze, Cooler. Similarly, there has been a huge mistake in the ration card. Those who do not belong to their party or do not vote for them, such poor people have been completely cut off.

 

When I asked my employees that you people know the rules of the government, yet why there was disturbance. Everyone said- MLA ji is a strong leader, we have been forced to do so. What do we do

 

Hearing this, Juhi is very angry and orders that the list of all the schemes should be reviewed, if it is not found correct on the criteria of the government, then the entire list should be canceled and also a request letter to get the order by sending all the reports to the district headquarters. Get it done by my side, I will sign.

 

But madam, this will anger the MLA. They do not understand or respect any officer. It would not be right to mess with them. Bade Babu said hesitantly.

 

So what to do, even after knowing everything, we keep sitting with our hands on our hands, this will encourage corruption. And the needy will be deprived of the beneficial schemes of the government. I am not afraid of anyone. Do as I am told. What happens next will be seen. Juhi said fearlessly. The elder babu left casually.

 

Going to the office, Bade Babu said to his staff – Madam, I do not understand. I want to mingle with the MLA. You guys know what kind of man he is.

 

Madam should have silently sent the entire survey list to the district headquarters for further action. I told them for information. Now if she gets the inquiry done, the MLA will come to know and can do anything.

 

Madam has a new job now, she should avoid getting entangled with such people.

 

Bade babu, don’t put too much mind on what is happening, let it happen. Either the MLA’s senses will come or the madam will have to suffer.

 

Don’t know how much the district headquarters will help in this matter, madam, God knows because everyone is afraid of MLA. Bade Babu’s assistant said.

 

Three days later, JE explained all the work to Dheeraj and after getting another agreement done with Dheeraj, giving him a check of one lakh rupees, he said – 50 thousand rupees of this is for material. You advance cement, sand, inta, rod and concrete and the rest is for labor payment. After two days you start work. Take care to do the work sincerely. As I have told, in the same way cement and spices have to be made. Ok sir. Dheeraj expressed his gratitude to JE and said- Sir, I will not let you get a chance to complain.

 

He also expressed his gratitude to Juhi in his heart for doing what Madam said.

 

Within a few days, the community hall was largely ready. Every week, Dheeraj used to get advance payment, so that he did not face any problem in working, nor did he have to invest money from home.

 

Juhi went to the district headquarters and met the DDC and told everything about the MLA and asked you sir what should I do. I cannot leave this matter.

 

The DDC explained to him and said- Look, all the officers are upset with the Juhi MLA, but no one opposes him out of fear. That’s why you also don’t get entangled with him, send all the reports here. We will also send it to the state government for appropriate action. Means we too will not take responsibility for our heads.

 

Juhi said- But how long will all this last sir, how will we work? If there is any inquiry from the government side, I will be the first one. So order me to check I will cancel the whole list if found wrong. Juhi said in a decisive voice.

 

The DDC thought for a while and said you wait a while, I will meet the DC Saheb (Deputy Commissioner) and then I will tell.

 

Juhi said- Alright sir.

 

DDC came out of his chamber and went to DC Saheb’s chamber and said – and after telling all the things of Juhi said – Sir, you know that all the officers from block to district are upset with the MLA. He has not left anyone but it has become common for him to abusive everyone, drop his hands, threaten and work against the rules of the government.

 

Sir this is your chance to deal with him. All we have to do is to make available the police force as much as it demands when needed. If the MLA opposes her or protests, she will deal with it. I ask Juhi for a request letter to conduct an inquiry against the MLA and send it to you. You order him to investigate. I will understand the rest sir. Along with this, you also tell the SP and DSP to be alert.

 

After listening to the whole talk of DDC sahib, DC sahib said – call Juhi. In a short while Juhi was standing in front of DC Saheb. DC Saheb said- We are all with you, do whatever you want to do. Enough MLA’s arbitrariness. I also send a letter to the state government on the basis of your complaint so that later we all do not face any problem.

 

Juhi said- Sir, thank you very much.

 

Now you go DDC sir said. Juhi saluted everyone and went out.

 

Remaining part in next issue 8…

 

 

वो दर्द अच्छे लगते हैं vo dard achchhe lagate hain

 

 

 

 

 

 

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