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जूही जैसे ही अपने आवास पर पहुंची तो देखा गेट खुला हुआ था, दो- चार लोग वहां मौजूद थे . . . पढ़ें जूही की महक कहानी का दूसरा भाग joohee jaise hee apane aavaas par pahunchee to dekha get khula hua tha, do- chaar log vahaan maujood the . . . padhen joohee kee mahak kahaanee ka doosara bhaag

©श्याम कुंवर भारती

परिचय– बोकारो, झारखंड


 

 

धीरज ने सबको परेशान होते देख समझाते हुए कहा- मां तुम चिंता मत करो मुझे कुछ नहीं हुआ है हल्की फुल्की चोट आई है। सब जल्दी ठीक हो जाएंगे।

 

तब तक उसकी छोटी बहन गुड़िया गर्म पानी लाकर दे दी। और जाते हुए बोली मैं सबके लिए चाय बनाकर लाती हूं।

 

धीरज की मां ने उसके जख्मों पर गर्म पानी से सेंकाई की तो उसे बहुत आराम लगा और सो गया।

 

जूही ने उसकी मां को खुद ही अपना परिचय दिया मगर अपना पद नहीं बताया। इतना जरूर बताया उसकी नई नौकरी लगी है। मुझे कल ही हर हाल में ज्वाइनिंग लेनी है। फिर उसने स्टेशन से लेकर अब तक हुई घटना के बारे में बता दिया।

 

सुनकर धीरज की मां बहुत दुखी हुई और बोली मेरा बेटा वैसा बड़ा बहादुर है। लोगों की मदद की इसकी आदत है।

 

गुड़िया चाय लेकर आ चुकी थी। धीरज की मां ने जूही को चाय देते हुए कहा- लो बेटी तुम भी चाय पी लो और हाथ मुंह धोकर फ्रेस हो लो। तब तक मैं खाना तैयार करती हूं।

 

धीरज ने अपने छोटे बेटे गुड्डू को कहा- तुम जूही दीदी के साथ यहां रुको और अपने भईया को देखते रहना। मैं और गुड़िया रसोई में जाते हैं।

 

थोड़ी देर में धीरज की मां ने जूही को खाना खाने के लिए बुलाया। उसे बड़ी जोर की भूख लगी थी। खाना टेस्टी लगा तो जल्दी जल्दी खाकर धीरज के पास आ गई, वो अभी तक सो रहा था। उसे उसकी इस हालत पर बड़ा दुख हो रहा था।

 

धीरज की मां ने उसे गुड़िया के कमरे में सोने के लिए गुड़िया के साथ भेज दिया। रात लगभग तीन बज चुके थे।

 

सुबह उठकर जूही ने अपना सामान उठाया और धीरज की मां को डेढ़ हजार रुपए देते हुए कहा- आंटी इसमें से 5 सौ रुपए धीरज का भाड़ा और एक हजार रूपए उसके इलाज के लिए है। अब मैं चलती हूं। मुझे देर हो जायेगी। क्या इधर कोई ऑटो मिल जायेगा। धीरज की मां ने पैसे लेते हुए कहा- धीरज अभी भी सो रहा है। उसके उठने पर मिल के जाती।

 

नहीं आंटी मुझे जाने दीजिए, फिर उसने धीरज और उसकी मां का मोबाइल नंबर लिया।

 

धीरज की मां के कहने पर गुड्डू एक ऑटो रिक्शा बुला लाया था।

 

जूही जैसे ही अपने आवास पर पहुंची तो देखी गेट खुला हुआ था। दो- चार और लोग वहां मौजूद थे। जूही को देखते ही सब लोग लपक के उसके पास आए, उसका अभिवादन कर उसका सामान उठा लिया।

 

उसमें से एक ने कहा- मैडम अच्छा हुआ वर्ना हमलोग स्टेशन जाने वाले थे। रात में काफी बारिश हुई और सड़क पर पेड़ गिर जाने की वजह से आपको लेने गई गाड़ी लौट आई थी। आपका फोन भी बंद था। हमलोग काफी चिंता कर रहे थे। यहां हमलोगों ने आपका रात 12 बजे तक इंतजार किया कि शायद आप किसी तरह आ जायेंगी। आप नहीं आई तो हमलोग अपने घर चले गए थे। अभी एक घंटा पहले आए हें। जूही ने उनकी बातों को ध्यान से सुना और जो हुआ सब बता दिया।

 

मैं 10 बजे ऑफिस पहुंचुंगी। उसने पूछा यहां का ऑफिस इंचार्ज कौन है। जी मैं हूं मैडम, मेरा नाम सोमनाथ मांझी है।

 

जूही ने सोमनाथ से कहा- आप 10 बजे ऑफिस के सभी स्टाफ को बुला लें। मुझे चार्ज लेने के साथ मीटिंग भी करनी है।

 

उससे पहले एक काम करें, अस्पताल फोन करके एक एंबुलेंस बुला लें और पता लीजिए धीरज नाम का जो लड़का रात में घायल हुआ है, उसके घर का पता है। उसे फौरन अस्पताल भेजकर उसका बेहतर इलाज कराएं। मैं उसकी मां को फोन कर देती हूं। और हां मीटिंग में थाना प्रभारी को भी बुला लें। सब तैयारी कर मुझे एक घंटा में रिपोर्ट करें। तब तक मैं तैयार हो जाती हूं।

 

दस बजे जूही अपने प्रखंड कार्यालय में प्रखंड विकास पदाधिकारी की कुर्सी पर चार्ज लेकर बैठ चुकी थी।

 

मीटिंग शुरू होती ही उसने अपने कार्यालय के सभी पदाधिकारियों और कर्मचारियों का परिचय लेने के बाद उस क्षेत्र के थाना प्रभारी से रात की घटना का जिक्र करते हुए कहा- सबसे पहले स्टेशन से लेकर शहर तक के रास्ते में रात में एक दो बार गस्त शुरू करा दें। ताकि कोई अपराधिक घटनाएं न घटे। उसके बाद रात में जिन लुटेरों ने हम दोनों पर हमला किया था उन्हें हर हाल में गिरफ्तार करें। ठीक है मैडम मैं अभी इसके लिए उचित कार्रवाई करता हूं। थाना इंचार्ज ने जूही के आदेश का पालन करते हुए कहा- और उसका अभिवादन करके चला गया।

 

जूही ने अपने ऑफिस इंचार्ज सोमनाथ को बुलाकर आदेश दिया -प्रखंड अंतर्गत जितनी भी योजनाएं जो ग्रामीण क्षेत्र के विकास और गरीबों की कल्याणकारी योजनाएं है उनकी पूरी रिपोर्ट मुझे तैयार कराकर आज ही दें। जिसमें राज्य सरकार और केंद्र सरकार की भी योजनाएं शामिल हो। यह भी उल्लेख करें किस योजना का कितना काम हो चुका है और कितना बाकी है। बड़े बाबू सोमनाथ ने हां में सिर हिलाकर जाने लगा। तभी जूही ने कहा- बड़े बाबू सुधीर को एंबुलेंस द्वारा अस्पताल भेजवा दिए थे कि नहीं। जी मैडम बड़े बाबू ने जवाब दिया। ठीक है मैं शाम को उसे देखने अस्पताल जाऊंगी आप मेरे ड्राइवर को गाड़ी लेकर तैयार रहने बोलें और बाकी स्टाफ को मैंने जो कहा- है वो रिपोर्ट तैयार करने बोल दें।

 

इधर ऑफिस के सारे स्टाफ में हड़कंप मचा हुआ था। सब आपस में खुसर फुसर कर रहे थे। नई वीडियो मैडम तो बड़ी कड़क और तेज तर्रार है। भाई आते ही बड़ी तेजी से भिड़ गईं है। काम में अब सारी फाइल खंगलवा रही हैं। फिर पैसे का भी हिसाब मांगेगी। देख लो भाईयों सब हिसाब किताब भी ठीक कर लो।

 

तभी चपरासी ने आकर बड़े बाबू से कहा- मैडम आपको अभी बुला रहीं हैं। ठीक है चलो मैं आता हूं।

 

जूही के ऑफिस में आते ही बड़े बाबू ने देखा जूही मैडम के पास दस पन्द्रह महिलाएं खड़ीं हैं। जूही ने कहा- बड़े बाबू इन महिलाओं की शिकायत है उन्होंने विधवा और वृद्धा पेंशन हेतु कई महीने पहले आवेदन दिया था, मगर अभी तक इनकी पेंशन शुरू नहीं हो पाई है। आप इन सबको जो पेंशन का काम देखते हैं उनके पास ले जाएं और जांच करवाएं। अबतक इन सबका काम क्यों नहीं हुआ।

 

एक काम और करें हमारे प्रखंड के अंतर्गत सबसे पिछड़ा और नजदीक का क्षेत्र जहां हो मैं उसका आज ही भ्रमण करना चाहती हूं। आप इन सबको भेजकर क्षेत्र भ्रमण की तैयारी करें। साथ में जेई साहब को भी ले लें। पंचायत के मुखिया और ग्रामीणों को खबर करें मैं आ रही हूं। सबकी समस्याये सुनने। ऑफिस के कंप्यूटर ऑपरेटर को बुलाएं, जिला मुख्यालय में एक पत्र भेजना है।

 

सबके जाते ही ऑपरेटर भागता हुआ आया, जी मैडम आपने बुलाया था। जूही ने उसे डी डी साहब को एक पत्र लिखकर रेलवे स्टेशन से लेकर शहर तक भेपर। लाइट लगाने हेतु फंड और स्वीकृति मांगनी है। तुरंत तैयार कर लाओ और मुझसे साइन कराकर तुरंत भेजो।

 

शाम सात बजे जूही सरकारी अस्पताल अपनी सरकारी गाड़ी से पहुंची साथ में बड़ा बाबू भी थे। गाड़ी से उतरते ही जूही लपकते हुए अस्पताल की तरफ भागी। पीछे पीछे बड़ा बाबू भी भागते चल रहे थे। जूही ने बड़ा बाबू से पूछा सुधीर कहा- भर्ती है। बड़े बाबू उसे सुधीर के बेड के पास ले गए। सुधीर चुपचाप बेड पर लेटा हुआ था। सिर और हाथ में पट्टी बंधी हुई थी।

 

उसकी मां उसके सिरहाने बैठकर उसे दवा खिला रही थी। जूही के आते ही उसकी मां उठकर खड़ी हो गई और दोनों हाथ जोड़ दी। जूही ने उसे रोकते हुए हुए कहा- क्या कर रही हैं आंटी आप मुझे हाथ जोड़े जैसे घर पर मुझे मेरे नाम से बुला रही थीं मेरे नाम से उसी तरह बुलाएं मुझे अच्छा लगेगा।

 

तुमने मुझे बताया नहीं बेटी तुम यहां की वीडियो साहिबा बनकर आई हो। कोई भूल हुई हो तो क्षमा करना बेटी।

 

अरे नहीं आंटी आप सबसे कोई गलती नहीं हुई है। बल्कि आप सबने मेरी मदद ही किया है।

 

जूही को देखकर सुधीर ने भी हाथ जोड़ दिया और उठने की कोशिश करने लगा मगर जूही ने ही आगे बढ़कर उसका हाथ पकड़ कर लेटे रहने को कहा- और उसकी बगल में बेड पर ही बैठ गई। सुधीर ने धीरे से कहा- मैडम आपने एक बार भी मुझे अपना परिचय नहीं दिया कि आप हमारे प्रखंड की प्रखंड विकास पदाधिकारी बन कर आई है।

 

बता देती तो तुम क्या करते मेरी मदद नहीं करते या गुंडों से नहीं लड़ते या ज्यादा भाड़ा लेते। जूही ने मुस्कुराते हुए कहा। सुधीर कुछ बोल नहीं पाया।

 

तब तक जैसे ही अस्पताल में प्रभारी डॉक्टर को पता चला वीडियो मैडम खुद आई हुई हैं वो भागता हुआ आया। जूही को प्रणाम किया और अपनी पूरी टीम के साथ खड़ा हो गया। जूही ने पूछा कोई चिंता वाली बात तो नहीं है डॉक्टर साहब।

 

प्रभारी ने कहा- चिंता वाली बात तो नहीं है मेडम, मगर अंदरूनी चोट ज्यादा लगी है। जिसे ठीक होने में थोड़ा समय लगेगा।

 

अगर जरूरत पड़ी तो हम इसे जिला के सदर अस्पताल भी भेज सकते हैं जूही ने कहा।

 

जी मैडम इसकी नौबत नहीं आयेगी मैं पूरी कोशिश करूंगा बेहतर इलाज हो जाए। आप चिंता न करें। जूही ने सबको बाहर जाने को कहा- मुझे सुधीर से थोड़ी बात करनी है। इतना सुनते ही सब लोग कमरे से बाहर चले गए।

 

सबके जाते ही जूही ने सुधीर से कहा- मैंने थाना को सूचित कर दिया है। उन गुंडों की धर पकड़ करने और रात में गस्ति करने के लिए। और जिला मुख्यालय को भी लिख दिया है। सड़क के किनारे लाइट लगाने के लिए।

 

अब तुम ठीक हो जाने के बाद चाय नहीं बेचोगे और न जान जोखिम में डालकर अपनी बाइक पर सवारी ढोने का काम करोगे।

 

सुधीर चुपचाप जूही की बात सुन रहा था।

 

तभी उसने अपनी जेब से जूही का दिया हुआ 15 सौ रुपए उसके हाथ में थमाते हुए कहा- इसे रख लें मैडम मुझे शर्मिंदा न करें।

 

जूही ने लौटाते हुए कहा- यह तुम्हारा है। रखो नहीं तो मैं दुबारा नहीं आऊंगी।

 

पहले ठीक हो लो फिर बात करेंगे। अब तुम आराम करो मैं चलती हूं। दिनभर भागम भाग करके थक गई हूं। रात में सोई भी नहीं ठीक से, यह लो मेरा नंबर जब जरूरत पड़े मुझे फोन कर लेना। इतना कहकर उसने एक निगाह सुधीर पर डाला और हाथ में पकड़े थैले को उसके बगल के स्टूल पर रखते हुए कहा- यह फल है खा लेना। इतना कहकर जूही उसके कमरे से निकल गई।

 

शेष अगले भाग 3 में।

 

 

श्याम कुंवर भारती

Shyam Kunwar Bharti

 

 

As soon as Juhi reached her residence, she saw the gate was open, two or four people were present there . . .  Read the second part of Juhi’s Mehek story

 

 

 

Seeing everyone getting upset, Dheeraj said, “Mother, don’t worry, nothing has happened to me, I have got a minor injury. Everything will be fine soon.

 

Till then his younger sister Gudiya brought hot water and gave it. And on the way, she said, I make tea for everyone and bring it.

 

When Dheeraj’s mother applied hot water to his wounds, he felt very relaxed and fell asleep.

 

Juhi introduced herself to her mother but did not reveal her position. Definitely told that he has got a new job. I have to join tomorrow only. Then he told about the incident from the station till now.

 

Hearing this, Dheeraj’s mother was very sad and said that my son is such a brave person. He has a habit of helping people.

 

Gudiya had brought tea. While giving tea to Juhi, Dheeraj’s mother said- Take daughter, you also drink tea and wash your hands and get fresh. Till then I prepare the food.

 

Dheeraj told his younger son Guddu – you stay here with Juhi didi and keep looking at your brother. Me and the doll go to the kitchen.

 

After a while Dheeraj’s mother called Juhi for dinner. He was very hungry. If the food was tasty, after eating it quickly, he came to Dheeraj, he was still sleeping. He was feeling very sorry for his condition.

 

Dheeraj’s mother sends him with the doll to sleep in the doll’s room. It was almost three o’clock in the night.

 

Waking up in the morning, Juhi picked up her belongings and gave one and a half thousand rupees to Dheeraj’s mother and said – Auntie, out of this, five hundred rupees is Dheeraj’s fare and one thousand rupees for his treatment. Now I go. I’ll be late Will I get an auto here? Taking the money, Dheeraj’s mother said – Dheeraj is still sleeping. Will meet him when he gets up.

 

No aunty let me go, then she took the mobile number of Dheeraj and his mother.

 

Guddu had brought an auto rickshaw at the behest of Dheeraj’s mother.

 

As soon as Juhi reached her residence, she saw the gate was open. Two or four more people were present there. On seeing Juhi, everyone came to her in a hurry, greeted her and picked up her belongings.

 

One of them said- Madam, it is good otherwise we were about to go to the station. It rained a lot in the night and the car that had gone to pick you up had returned due to a fallen tree on the road. Your phone was also switched off. We were worrying a lot. Here we waited for you till 12 o’clock in the night that maybe you will come somehow. If you didn’t come, we went to our house. Came just an hour ago. Juhi listened to their words carefully and told everything that happened.

 

I will reach office at 10 o’clock. He asked who is the office in-charge here. Yes, I am madam, my name is Somnath Manjhi.

 

Juhi told Somnath- You should call all the office staff at 10 o’clock. I have to hold a meeting along with taking charge.

 

Before that do one thing, call the hospital and call an ambulance and find out the address of the boy named Dheeraj who got injured in the night, his house. Send her to the hospital immediately and get her better treatment. I call his mother. And yes also call the station in-charge in the meeting. Prepare everything and report to me in an hour. Till then I am ready.

 

At ten o’clock, Juhi had sat in her block office taking charge on the chair of the Block Development Officer.

 

As soon as the meeting started, after taking the introduction of all the office bearers and employees of his office, referring to the incident of the night to the station in-charge of that area, he said- First of all, on the way from the station to the city, start patrolling a couple of times in the night. Give. So that no criminal incidents happen. After that arrest the robbers who attacked both of us in the night at any cost. ok madam i will take appropriate action for this now. The station in-charge followed Juhi’s order and said – and went away after greeting her.

 

Juhi called her office in-charge Somnath and ordered that all the schemes under the block, which are the development of rural areas and welfare schemes of the poor, should be prepared and given to me today. In which the schemes of the state government and central government are also included. Also mention which plan, how much work has been done and how much is left. Bade Babu Somnath nodded his head in yes. Then Juhi said – Bade Babu had sent Sudhir to the hospital by ambulance or not. Yes Madam Bade Babu replied. Ok, I will go to the hospital in the evening to see him, you tell my driver to be ready with the car and tell the rest of the staff to prepare the report what I have said.

 

There was a stir among all the staff in the office. Everyone was giggling amongst themselves. The new video madam is very loud and fast. As soon as the brother came, there was a fight very fast. Now all the files are being searched in the work. Then will ask for the account of the money too. Look, brothers, fix all the accounts too.

 

Then the peon came and said to the elder babu – Madam is calling you now. ok let me come

 

As soon as Juhi came to the office, Bade Babu saw ten fifteen women standing beside Juhi madam. Juhi said- Bade Babu, these women have a complaint, they had applied for widow and old age pension several months ago, but their pension has not started yet. You take all these to the pension work you see and get it checked. Why has all this not worked till now?

 

Do one more thing, I want to visit the most backward and nearest area under our block, where it is today. Prepare for the field trip by sending them all. Also take JE sahib along with you. Inform the head of the panchayat and the villagers, I am coming. Listening to everyone’s problems. Call the computer operator of the office, a letter is to be sent to the district headquarters.

 

As soon as everyone left, the operator came running, sir, you had called. Juhi sent him from the railway station to the city by writing a letter to DD Sahab. Funds and approval have to be sought for installation of lights. Get it ready immediately and send it immediately after signing me.

 

At seven o’clock in the evening, Juhi reached the government hospital in her government car, along with Bada Babu. As soon as she got down from the car, Juhi ran towards the hospital. Bada Babu was also running behind him. Juhi asked Bada Babu, said Sudhir – is admitted. Bade Babu took him to Sudhir’s bed. Sudhir was lying quietly on the bed. The head and hand were tied with a bandage.

 

His mother was feeding him medicine sitting by his head. As soon as Juhi came, her mother stood up and folded both her hands. Juhi stopped him and said – what are you doing aunty, fold your hands to me as if you were calling me by my name at home, I would love to call me by my name in the same way.

 

You didn’t tell me daughter, you have come here as a video sahib. If I have made any mistake, please forgive my daughter.

 

Oh no aunty you haven’t done anything wrong. Rather you all have helped me.

 

Seeing Juhi, Sudhir also folded his hand and started trying to get up, but Juhi only went ahead and asked him to lie down holding her hand – and sat on the bed next to her. Sudhir said slowly- Madam, you have not even once introduced yourself to me that you have come as the Block Development Officer of our block.

 

If I had told you what would you do, you would not help me or fight with the goons or charge more. Juhi said with a smile. Sudhir could not say anything.

 

Till then, as soon as the doctor in charge of the hospital came to know that the video madam himself had come, he came running. He saluted Juhi and stood up with his entire team. Juhi asked if there is anything to worry about, Doctor.

 

The in-charge said – there is nothing to worry about, madam, but internal injuries are more. Which will take some time to recover.

 

If needed, we can also send it to the district’s Sadar Hospital, Juhi said.

 

Sir, this will not happen, I will try my best to get better treatment. Please don’t worry. Juhi asks everyone to go out – I have to talk to Sudhir a little. Hearing this, everyone left the room.

 

As soon as everyone left, Juhi said to Sudhir – I have informed the police station. To nab those goons and patrol at night. and has also written to the District Headquarters. To install lights on the side of the road.

 

Now after you are cured, you will not sell tea or risk your life to carry a ride on your bike.

 

Sudhir was silently listening to Juhi.

 

Then, while handing the 15 hundred rupees given to Juhi from his pocket, he said, “Keep this, madam, don’t embarrass me.”

 

Juhi said while returning – this is yours. Keep it or I won’t come again.

 

Get well first, then we’ll talk. Now you rest, I go. I am tired of running all day long. Haven’t even slept at night properly, take this my number, call me whenever needed. Having said this, he put a glance on Sudhir and while keeping the bag in his hand on the stool next to him, he said – this fruit is to be eaten. Saying this Juhi left her room.

 

The rest in the next part 3.

 

 

 

जूही की महक, कहानी – भाग एक joohee kee mahak, kahaanee – bhaag ek

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