Supreme Court voter list- “हमें राहुल गांधी की प्रेस कॉन्फ्रेंस की जानकारी नहीं…”, 65 लाख वोटर लिस्ट मामले में SC की दो टूक, प्रशांत भूषण की दलीलों पर क्या हुआ?
बिहार वोटर लिस्ट से नाम हटाने पर सुप्रीम कोर्ट में क्या हुआ (What happened in the Supreme Court on removing names from the Bihar voter list?)
Supreme Court voter list-

बिहार वोटर लिस्ट से नाम हटाने पर सुप्रीम कोर्ट में क्या हुआ (What happened in the Supreme Court on removing names from the Bihar voter list?)
Supreme Court voter list- मुख्य बिंदु:
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बिहार की मतदाता सूची से 65 लाख नाम कथित तौर पर हटाने के मामले में सुप्रीम कोर्ट में हुई सुनवाई।
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वकील प्रशांत भूषण ने मामले को राहुल गांधी की प्रेस कॉन्फ्रेंस से जोड़ा, तो कोर्ट ने खुद को इससे अलग कर लिया।
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कोर्ट ने कहा- “एक ही पते पर 240 लोग नहीं हो सकते,” और चुनाव आयोग को दिए निर्देश।
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चुनाव आयोग ने आरोपों पर सीधा जवाब देने से परहेज किया, कोर्ट ने कहा- ERO दफ्तर में सूची उपलब्ध कराएं।
Supreme Court voter list- नई दिल्ली: बिहार की मतदाता सूची से 65 लाख नाम हटाए जाने के गंभीर आरोपों पर बुधवार को सुप्रीम कोर्ट में तीखी बहस हुई। याचिकाकर्ता की ओर से पेश हुए वरिष्ठ वकील प्रशांत भूषण ने इस पूरी प्रक्रिया को दुर्भावनापूर्ण और मनमाना बताते हुए इसे कांग्रेस नेता राहुल गांधी की एक प्रेस कॉन्फ्रेंस से जोड़ने की कोशिश की। हालांकि, कोर्ट ने इस राजनीतिक एंगल को सिरे से खारिज करते हुए दो टूक कहा कि उन्हें किसी प्रेस कॉन्फ्रेंस की जानकारी नहीं है।
Supreme Court voter list- मामले की सुनवाई के दौरान प्रशांत भूषण ने जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जे. बागची की बेंच के सामने दलील दी, “जैसे ही राहुल गांधी ने इस मुद्दे पर प्रेस कॉन्फ्रेंस की, उसके अगले ही दिन चुनाव आयोग ने अपनी वेबसाइट से वोटर लिस्ट का ‘सर्च बटन’ ही हटा दिया।”
‘एक ही पते पर 240 वोटर कैसे?’ – प्रशांत भूषण के गंभीर आरोप
प्रशांत भूषण ने आरोप लगाया कि हटाए गए 65 लाख नामों की सूची वेबसाइट पर सार्वजनिक करने के बजाय केवल राजनीतिक दलों के एजेंटों को दी जा रही है। उन्होंने प्रक्रिया को मनमाना बताते हुए कहा, “यह दुर्भावनापूर्ण इरादे से किया जा रहा है।” उन्होंने दावों को पुख्ता करने के लिए कहा कि ड्राफ्ट वोटर लिस्ट में भारी गड़बड़ियां हैं, जैसे एक ही पते पर 240 लोगों के नाम दर्ज हैं और कई मृत व्यक्तियों के नाम भी सूची में शामिल हैं।
सुप्रीम कोर्ट की तीखी टिप्पणी और निर्देश
प्रशांत भूषण की दलीलों पर जस्टिस सूर्यकांत ने टिप्पणी करते हुए कहा, “मृत या जीवित, 240 लोग एक ही पते पर नहीं हो सकते।”
जब प्रशांत भूषण ने बार-बार प्रेस कॉन्फ्रेंस का जिक्र किया, तो कोर्ट ने स्पष्ट रूप से कहा, “हमें किसी भी प्रेस कॉन्फ्रेंस की जानकारी नहीं है।” कोर्ट ने कहा कि वेबसाइट पर सूची का प्रकाशन एक स्वागत योग्य कदम है, लेकिन नियम के अनुसार न्यूनतम आवश्यकता यह है कि ड्राफ्ट वोटर लिस्ट चुनाव पंजीकरण अधिकारी (ERO) के दफ्तर में निरीक्षण के लिए उपलब्ध हो।
Supreme Court voter list- जब चुनाव आयोग के वकील ने आरोपों पर सीधा जवाब देने से इनकार किया, तो कोर्ट ने निर्देश दिया कि यह सुनिश्चित किया जाए कि मतदाता सूची ERO के दफ्तर में उपलब्ध है।

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Supreme Court voter list- प्रशांत भूषण ने कोर्ट से आग्रह किया कि मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए 65 लाख हटाए गए नामों की सूची को तुरंत ऑनलाइन किया जाए और एक अंतरिम आदेश पारित किया जाए, लेकिन कोर्ट ने फिलहाल इस पर कोई आदेश नहीं दिया।
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